रहस्यमयी डर के साये में गुज़रे एक परिवार के 16 साल, दिमाग़ी फ़ितूर की आजीबो ग़रीब कहानी

Shams Ki Zubani: ये क़िस्सा एक ऐसे परिवार का है, जिसने 20 से 30 सालों तक अपनी ज़िंदगी को बड़े ही रहस्यमय तरीक़े से गुज़ारी। इस परिवार की कहानी को दुनिया में जिसने भी सुना वो चौंके बिना नहीं रह सका।
रहस्यमयी डर के साये में गुज़रे एक परिवार के 16 साल, दिमाग़ी फ़ितूर की आजीबो ग़रीब कहानी

Shams Ki Zubani: ये पूरा परिवार एक ऐसे डर से भागने की फिराक़ में घूमता रहा जिसका राज़ आज तक नामालूम ही बना हुआ है। जिस परिवार को उस रहस्यमय हालात से गुज़रना पड़ा, उसकी वजह से हर कोई हैरत में ही नज़र आया। किसी को भी ये फलसफा समझ में ही नहीं आया कि आखिर ये परिवार ऐसी परिस्थिति में कब क्यों और कैसे पहुँच गया। वो कौन सी बात थी जिसने इस परिवार के सामने बेहद रहस्यमयी स्थिति पैदा करदी जिससे निकलने का रास्ता उन्हें ज़िंदगी के 30 सालों तक नहीं मिल सका।

अजीब-ओ-ग़रीब डर के साये में गिरफ़्त ज़िंदगी की ये दास्तां सामने आई है सात समंदर पार कनाडा से। यहां एक परिवार था वॉरेन का। उसके परिवार में उसकी पत्नी के अलावा दो छोटे मासूम और प्यारे बच्चे भी थे। पाउलिन डाकिन और उसका भाई। चार लोगों के इस परिवार में पाउलिन बड़ी बेटी थी। लेकिन जिस वक़्त ये क़िस्सा शुरू हुआ था उस वक़्त पाउलिन काफी छोटी थी।

Shams Ki Zubani: पाउलिन डाकिन यही वो नाम है जो इस कहानी का सबसे अहम किरदार है। जिसकी ज़िंदगी में ऐसा कुछ हुआ जिसे शब्दों में बयां करने की कैफ़ियत किसी के पास नहीं है। अलबत्ता ये ज़रूर कहा जा सकता है कि पाउलिन डाकिन पर जो कुछ गुज़री उसने दुनिया के सामने एक अजूबा ज़रूर लाकर खड़ा कर दिया।

क्राइम की इस कहानी की शुरुआत होती है आज से क़रीब 50 साल पहले। वो 1970 का दशक था। जब पाउलिन की ज़िंदगी में एक अनजाने डर ने दस्तक दी। लेकिन पाउलिन की रहस्यमयी कहानी पर आने से पहले एक छोटी सी नज़र उसके पिता वॉरेन पर डाल लेते हैं। क्योंकि आखिर वो घर के मुखिया थे। और कहीं न कहीं कहानी में उनका भी किरदार अहम तो हो ही जाता है।

तो वॉरेन घर के मुखिया तो थे। लेकिन एक बुराई की गिरफ़्त में। उन्हें शराब पीने की बुरी लत थी। और जब वो छक कर शराब पी लेते थे तो उनका सारा किरदार ही बदल जाता था। आमतौर पर खामोश और शांत रहने वाले वॉरेन शराब के असर में आकर मार पीट करने पर उतारू हो जाते थे और ज़ोर ज़ोर से बात करना, बहुत ज़्यादा बात करना और बात बात पर अपशब्दों का इस्तेमाल करना उनकी आदत का हिस्सा बन चुका था।

सात साल की पाउलिन अपने भाई और पिता वॉरेन और मां रूथ के साथ
सात साल की पाउलिन अपने भाई और पिता वॉरेन और मां रूथ के साथ

एक परिवार और उसकी रहस्यमयी दुनिया

Shams Ki Zubani: पहले तो ये सिलसिला कभी कभी ही होता था लेकिन गुज़रते वक़्त के साथ ये रोज रोज की बात होने लगी। ऐसे में वॉरेन के बदलते रवैये को जब उनकी पत्नी रूथ के बर्दाश्त की इंतेहा हो गई तो उन्होंने वॉरेन से अलग होने का इरादा कर लिया। रूथ ने अपनी शादी शुदा ज़िंदगी से किनारा करते हुए पति वॉरेन से अलग रहना शुरू कर दिया।

अब एक घर में वॉरेन था जो नितांत अकेला रहने लगा था। जबकि रूथ ने अपनी बेटी पाउलिन और बेटो को साथ लेकर अलग रहना शुरू कर दिया। और रफ़्ता रफ़्ता दोनों ने अपनी ज़िंदगी की गाड़ी को अपने अपने तरीक़ों से आगे बढ़ाना शुरू कर दिया। जिस वक़्त वॉरेन और रूथ ने एक दूसरे से रिश्ता तोड़कर अलग अलग रहना शुरू किया था उस वक़्त पाउलिन डाकिन की उम्र थी सात साल।

पति से अलग होने के बाद रूथ अपनी और अपने बच्चों की जिंदगी को पटरी पर लाने की जद्दोजहद में लगी हुई थी। एक रोज रूथ अपनी बेटी पाउलिन और बेटे को लेकर घूमने के लिए दूसरे शहर विनिपेग चले जाते हैं। ऐसा करने के पीछे शायद रूथ की यही वजह हो कि एक ही तरह के हालात में रहने से एक मायूसी और उदासी का माहौल घेर लेता है, कहीं घूमने जाएंगे तो सभी का दिल बहल जाएगा। और फिर नई ऊर्जा के साथ वापस लौटने के बाद ज़िंदगी की गाड़ी को फिर से आगे बढ़ाने का सिलसिला शुरू किया जा सकता है। लिहाजा रूथ अपनी बेटी पाउलिन और बेटे के साथ चली जाती है।

मां के अजीब फैसले ने बच्चों को उलझन में डाला

Shams Ki Zubani: कुछ दिन विनिपेग में घूमने फिरने और वक़्त बिताने के बाद अचानक एक रात रूथ अपने बच्चों से जो बात कहती है, उसे सुनकर बच्चे बुरी तरह सहम जाते हैं। रूथ कहती है कि वो अब अपने घर कभी नहीं वापस लौटेगी। ये सुनकर पाउलिन और उसका भाई बुरी तरह चौंक भी जाते हैं और घबरा भी जाते हैं।

पाउलिन बेशक उस वक़्त सात साल की थी लेकिन इतनी समझ तो उसे तब भी थी कि अपने शहर से इतनी दूर दूसरे शहर में वो कैसे रहेगी। क्योंकि उसके शहर में ही उसके पिता रहते थे। जबकि यहां वो सिर्फ अपनी मां के साथ ही है। कई दिनों से पिता से कोई मुलाकात नहीं हुई। न तो अपने पिता को वो बाय कर पायी थी और न ही अपने रिश्तेदारों से आखिरी बार मिल सकी थी।

मां रूथ के कहे शब्दों को सुनने के बाद पाउलिन पूछ बैठती है कि आखिर ऐसा फैसला क्यों किया। तब रूथ अपने बच्चों से कहती है कि ऐसी कोई बात नहीं, लेकिन अब वो लोग कभी अपने शहर वापस नहीं लौटेंगे। पाउलिन को अपनी मां रूथ से कभी तसल्लीबख़्स जवाब नहीं मिल सका। क्योंकि उस शहर में न तो उसके पिता थे, न ही उसका घर था, और न ही उसके अपने खिलौने थे, और न ही उसके अपने दोस्त थे।

पाउलिन इस बात का मतलब तो नहीं समझ सकी। लेकिन उसे अपनी मां का फैसला अच्छा नहीं लगा। मगर वो इतनी बड़ी भी नहीं थी कि वो कोई फैसला कर सके। लिहाजा उसके पास मां के फैसले को मानने के सिवाय कोई और दूसरा चारा भी नहीं था। लिहाजा एक अजनबी शहर में पाउलिन और उसका भाई अपनी मां रूथ के साथ रहने लगते हैं।

पाउलिन डाकिन 23 साल की उम्र में
पाउलिन डाकिन 23 साल की उम्र में

शहर दर शहर खानाबदोश की ज़िंदगी

Shams Ki Zubani: पाउलिन अब 11 साल की हो चुकी थी। अपने शहर से दूर अजनबी शहरों में रहते रहते अब तक उन्हें चार साल गुज़र चुके थे। रूथ एक बार फिर पाउलिन से कहती है कि चलो अब फिर किसी दूसरे शहर में चलते हैं, किसी अजनबी शहर में। पाउलिन के लिए ये नई बात नहीं थी। कुछ कुछ वक़्त में उसकी मां ये हुक्म सुनाती और वो तीनों अपने अपने सामान के साथ एक अनजान शहर से दूसरे अनजान शहर की हद में पहुँच जाते। लिहाजा मां रूथ जब उससे ये कहती कि चलो कहीं और चलते हैं तो पाउलिन बिना कुछ बोले अपना सामान समेट लेती और चल देती।

ये ज़रूर है कि इन बीते चार सालों के दौरान पाउलिन और उसके भाई ने छह अलग अलग शहरों में छह अलग अलग स्कूल बदल लिए थे। अजनबी शहर में अजनबी दोस्त मिले और अजनबी सा दिखने वाला घर मिला। ये सब कुछ पाउलिन को परेशान ज़रूर करता जा रहा था। क्योंकि वो अपनी मां रूथ के फैसले को समझ नहीं पा रही थी कि आखिर क्या वजह है कि मां कुछ रोज बाद ही शहर बदल देती।

11 साल की उम्र में जब पाउलिन अपनी मां और भाई के साथ किसी दूसरे अजनबी शहर में पहुँचे तो उसे पहली बार एक तीसरा अजनबी चेहरा भी नज़र आया। जो उसकी मां और भाई के साथ उस शहर के उस मकान में रहने लगा था। उस अजनबी चेहरे का नाम स्टैन था। पाउलिन को याद था कि स्टैन से उसकी मां की मुलाक़ात एक चर्च में हुई थी।

उस चेहरे को देखकर पाउलिन ने महसूस किया कि उसकी मां के इर्द गिर्द दिखने वाला ये चेहरा हर उस जगह दिखाई दिया जहां जहां उसकी मां ने शहर और मकान बदले। तब पाउलिन को पहली बार लगा कि स्टैन उसके परिवार के लिए कुछ खास है, तभी तो वो हमेशा उसकी मां रूथ के इर्द गिर्द नज़र आ ही जाता था।

बचपन के सवालों के पीछे भागती रही एक ज़िंदगी

Shams Ki Zubani: इस स्टैन के उस परिवार के साथ आने के बावजूद उन लोगों का शहर और स्कूल बदलने का सिलसिला नहीं रुका। कई शहर और कई स्कूलों से गुज़रते गुज़रते आखिरकार पाउलिन 23 साल की हो गई। 23 साल की सयानी पाउलिन अब अपनी पढ़ाई क़रीब क़रीब पूरी कर चुकी थी।

और ये लोग अब ब्रुन्सविक शहर में रहने लगे थे। जहां पाउलिन एक जर्नलिस्ट बन जाती है। यहां तक कि ज़िंदगी तक आते आते पाउलिन कई बातों को अपने पीछे छोड़ चुकी थी लेकिन एक सवाल उसका साया बनकर पीछा करता रहा। वो ये बात अब भी सोचती रहती थी कि आखिर सात साल की उसकी उम्र से उसकी मां आखिर शहर शहर क्यों बदलती रही। क्यों उसे हर साल कम से कम दो नए ठिकानों में रहना पड़ता था। आखिर वो कौन सी बात है जो उसकी मां उससे छुपा रही है।

आखिर क्यों मां रूथ ने सारे रिश्तेदारों से नाते तोड़ लिए। क्यों रूथ ने उसके पिता से संबंध पूरी तरह से ख़त्म कर लिए। कई बार पाउलिन ने इन सवालों को अपनी आवाज भी दी और मां से पूछना भी चाहा, लेकिन हर बार की तरह मां अब भी उन सवालों से किनारा कर लेती। सयानी हो चुकी पाउलिन को ये तमाम सवाल अंदर ही अंदर खाये जा रहे थे।

पाउलिन के पिता वॉरेन डाकिन
पाउलिन के पिता वॉरेन डाकिन

अपने बचपन के सच का पता लगाने की उधेड़बुन

Shams Ki Zubani: अब पाउलिन खबरों के बीच में रहने लगी। पत्रकारों के बीच रहते रहते अब पाउलिन इतनी समझदार हो गई थी कि कुछ फैसले खुद कर सके। लिहाजा उसने सबसे पहला फैसला ये किया कि वो अपने उन सवालों का पीछा करना शुरू करे जिसके जवाब के लिए वो इतने सालों से शहर दर शहर भटकती रही।

अपने तमाम सवालों और उसके सच के बारे में उधेड़बुन के बीच अपने काम में व्यस्त रहने वाली पाउलिन के पास एक रोज अचानक उसकी मां का ही फोन आया। और उस फोन में मां रूथ ने उन्हीं सवालों का ज़िक्र किया, जिन सवालों के जवाब तलाशने के लिए पाउलिन ने फैसला कर लिया था। पाउलिन की मां रूथ कहती है कि वो अब अपना पुराना राज़ उसके सामने जाहिर करना चाहती है।

लिहाजा रूथ ने पाउलिन को मिलने के लिए एक मोटेल में बुलवाया। चूंकि नौकरी के सिलसिले की वजह से पाउलिन अब अपनी मां के साथ नहीं रहती थी। अपनी मां की बात सुनकर पाउलिन बेहद खुश हो जाती है। सोचती है कि जिन सवालों के लिए वो इतने दिनों से परेशान थी, जिन सवालों ने उसकी जिंदगी को उलझन में डाल रखा था उनके सवाल खुद उसकी मां ही देने को तैयार हो गई है। खुद उसकी मां उस राज़ को बेपर्दा करने वाली है जिस पर बचपन से पर्दा पड़ा हुआ है।

और जब मां ने खुद सुनाया वो रहस्यमयी सच

Shams Ki Zubani: अपनी सवालों के जवाबों को जानने की बेताबी के बावजूद पाउलिन तय वक़्त पर उसी मोटेल में पहुँच जाती हैं जहां मिलने के लिए उसकी मां रूथ ने उसे बुलाया था। पाउलिन जैसे ही मोटेल के गेट पर पहुँचती है तो वहां उसे वहीं चेहरा नज़र आता है स्टेन का।

वहीं स्टेन जो उसकी मां का पुराना दोस्त था और मां के साथ शहर दर शहर वो और उसका परिवार भी उनकी ही तरह ठिकाने बदलता रहा। स्टेन को वहां देखकर पाउलिन बुरी तरह चौंक जाती है। तभी स्टेन पाउलिन की तरफ एक लिफाफा बढ़ाता है। स्टेन पाउलिन से कहता है कि पहले वो लिफाफे में रखी चिट्ठी पढ़ ले उसके बाद ही वो कमरे में आए।

लिफाफे में रखी चिट्ठी में जो सबसे पहली लाइन लिखी थी, उसे पढ़कर वो और भी ज़्यादा चौंक जाती है, क्योंकि उसमें लिखा हुआ था कि जितने भी गहने पहने हुए हैं उन्हें उतार दो। और सारे गहने उसी लिफ़ाफ़े में रख दो जिसमें चिट्ठी थी। इसके साथ ही एक और शर्त लिखी हुई थी कि इस बारे में कोई भी सवाल नहीं करोगी।

और ये शर्त पूरी करते हुए ही कमरे में दाखिल हो। हैरत में पड़ी पाउलिन चिट्ठी में लिखी शर्तों को पूरा करने लगती है, वो अपने तमाम गहने उतार देती है और उन्हें चिट्ठीवाले लिफाफे में रख देती है। चिट्ठी को उसने गौर से देखा तो उसे और भी ज़्यादा ताज्जुब हुआ क्योंकि ये शर्त उसकी मां ने ही लिखी थी। अपने जेवरों वाला लिफाफा स्टैन को देने के बाद पाउलिन कमरे में दाखिल हो जाती है।

पाउलिन अपनी मां रूथ और भाई के साथ ग्रेजुएशन के बाद डिग्री लेने के वक़्त
पाउलिन अपनी मां रूथ और भाई के साथ ग्रेजुएशन के बाद डिग्री लेने के वक़्त

16 साल तक शहर दर शहर भटकने की अजीबो ग़रीब दास्तां

Shams Ki Zubani: उस वक़्त कमरे में मां अकेली थी, वहां मां से मुलाकात करने के बाद पाउलिन भी वहीं बैठ जाती है। तभी स्टैन पर उस कमरे में पहुँच जाता है। ये देखकर भी पाउलिन हैरान रह जाती है कि वो अपनी मां से मिलने आई है ऐसे में स्टैन कबाब में हड्डी क्यों बन रहा है। स्टैन वहीं कमरे में बैठ जाता है। इसी बीच रूथ अपना सारा किस्सा सुनाती है।

रूथ कहती है कि असल में उसके इस तरह तेजी से शहर बदलने और बार बार जगह बदलने की सबसे बड़ी वजह ये है कि बचपन से ही एक माफिया उनके पीछे पड़ा हुआ है। और उस माफिया के निशाने पर मेरे साथ मेरा पूरा परिवार है। वो माफिया हमें जान से मार देना चाहता है। लिहाजा उसी माफिया से बचने के लिए उसे शहर शहर भटकने को मजबूर होना पड़ा। पिछले 16 सालों से वो ऐसा ही कर रही है। अपनी और अपने बच्चों की जान की सलामती की ख़ातिर मुझे ऐसा करना पड़ा।

पाउलिन अपनी मां रूथ की बात सुनकर और भी ज़्यादा चौंक गई। और सोच में पड़ गई कि आखिर ये कैसे मुमकिन हो सकता है। एक माफिया पीछे पड़ा है, जो जान लेना चाहता है, लेकिन सवाल ये है कि आखिर क्यों?

एक माफ़िया का वो अनजाना ख़ौफ़ करता रहा पीछा

Shams Ki Zubani: इसके बाद आगे की कहानी स्टैन सुनाना शुरू करता है। स्टैन बताता है कि जिस खूंखार माफिया के ख़ौफ की वजह से तुम्हारी मां दर दर भटक रही थी, दरअसल मैंने उस गैंग के एक गुर्गे को इस गैंग से बाहर निकलवाया था। उसका ब्रेन वॉश किया था, उसे समझाया था और गुनाह की ज़िंदगी से उसे दूर जाने के लिए तैयार किया था।

उसे अच्छा इंसान बनाकर उसका गैंग से नाता ही तुड़वा दिया। लेकिन ये बात गैंग के लीडर को पता चल गई लिहाजा जिसे मैंने गैंग से बाहर निकाला था उस माफिया ने उसे ख़त्म कर दिया। लेकिन जब उन्हें इस बात का पता चला कि स्टैन ने ही उसका ब्रेन वॉश किया था और गैंग से दूर हटने की सलाह दी थी तो माफिया उसके पीछे पड़ गया।

लेकिन इसके बाद स्टैन ने जो कहा उसने पाउलिन को बुरी तरह से झकझोरकर रख दिया। स्टैन ने बताया कि पाउलिन के पिता वॉरेन भी ऐसे ही एक गैंग से जुड़े हुए थे। लेकिन अपने परिवार की वजह से वॉरेन ने भी उस गैंग से दूरी बना ली थी, लिहाजा माफिया ने उनके साथ भी दुश्मनी पाल ली थी। लिहाजा माफिया ने वॉरेन को पूरे परिवार समेत ख़त्म करने का इरादा किया था। और खासतौर पर वॉरेन की पत्नी रूथ को।

स्टैन और रूथ
स्टैन और रूथ

ज़िंदगी बचाने के लिए दांव पर लगा दिया था बचपन

Shams Ki Zubani: इसी लिए मैं खुद भी भटकता रहा ताकि मैं खुद को और अपने परिवार को उस माफिया से बचा सकूं साथ ही मैं अपने साथ साथ तुम्हारी मां की भी देखभाल करता रहता हूं। ताकि इन्हें भी माफिया से बचाया जा सके। इसके बाद फिर स्टैन की बात ने पाउलिन को बुरी तरह से चौंका दिया।

स्टैन ने कहा कि यहां सीक्रेट डिपार्टमेंट के एजेंट और लोग हमारी इस काम में मेरी मदद करते थे। इसी लिए तुम्हारी मां के लिए हमें जब भी खतरा महसूस होने लगता था, हम वो शहर बदल देते थे और किसी ऐसे शहर पहुंच जाते थे जिसके बारे में उन्हें अंदाज़ा भी नहीं हो पाता था। इसी वजह से हमने जगह बदल बदलकर जैसे तैसे जान बचा ली।

हालांकि इस चक्कर में हमने बच्चों का बचपन पूरी तरह से सत्यानाश कर दिया क्योंकि उन्हें न तो कभी दोस्त मिल सके और न ही एक स्कूल की अच्छी परवरिश।

पुरानी घटनाओं ने दिया नए क़िस्सों का साथ

Shams Ki Zubani: पाउलिन बड़ी तसल्ली से पूरी कहानी सुन लेती है, लेकिन उसे कहानी की सच्चाई पर यकीन नहीं होता है। वो सोचने लगती है कि आज के इस दौर में ऐसी दकियानूसी कहानी का कोई मतलब नहीं है। जिसका न तो कोई सिर है और न ही कोई पैर। क्या कोई फैमिली सिर्फ इस लिए शहर शहर भटकती रही कि एक माफिया उसकी जान का दुश्मन है और अगर वो लोग कहीं एक शहर में टिक जाएंगे तो माफिया उन्हें जान से मार डालेगा।

इसी उधेड़बुन के बीच पाउलिन अपने बचपन से लेकर सायने होने तक के अपने अतीत पर नज़र दौडाने की कोशिश करती है। तो उसे कुछ कुछ याद आता है। और तब उसे महसूस होता हैकि कोई तो ऐसी बात ज़रूर है जिसकी वजह से इनकी कही बात को झुठलाया भी नहीं जा सकता है। मुमकिन है कि उसकी मां रूथ और स्टैन दोनों सही कह रहे हों। क्योंकि उसे बचपन का एक क़िस्सा याद आ रहा था।

एक रोज रूथ अपने बच्चों के साथ खाना खाने के लिए जैसे ही डायनिंग टेबल पर पहुँचते हैं कि अचानक रूथ सारा खाना उठाकर बाहर कचरे के डिब्बे में डाल देती है। पाउलिन उस घटना को भूली नहीं थी। और समझ भी नहीं सकी थी कि आखिर उसकी मां ने क्यों उसके मुंह से निवाला छीन कर उसे कचरे के डिब्बे में डाल दिया।

बचपन की यादों से उलझ गया जवानी का सच

Shams Ki Zubani: लेकिन जब वो अपनी मां और स्टैन की बात को सुनती है तो अंदाजा ही लगाती है कि हो सकता है कि मां को उस वक़्त शक हुआ हो कि किसी गैंगस्टर ने उनके खाने में जहर मिला दिया हो, लिहाजा उसने सारा खाना फेंक दिया।

इसी तरह एक और वाकया उसके जेहन में घूम गया जब एक रात उसकी मां ने अपने दोनों बच्चों को नींद से जगाया और घर से निकलकर चलने को कहा। और फिर वो तीनों घर से दर एक पहाड़ी पर चले जाते हैं और वहीं पहाड़ पर पूरी रात काटते हैं। और जब अगली सुबह लौटे तो घर में ज़्यादा देर नहीं टिके बल्कि सामान लेकर किसी दूसरे शहर की तरफ रवानगी डाल दी थी।

एक बार का क़िस्सा शायद पाउलिन उस वक़्त भी नहीं भूली थी जब बचपन में एक रोज़ उसकी मां ने दोनों बच्चों को प्लास्टिक के मोज़े और जूते पहना दिए थे। जब मां से पाउलिन ने पूछा था कि ऐसा क्यों तो मां रूथ ने जवाब दिया था कि किसी ने उसके घर के फ़र्श पर ख़तरनाक कैमिकल बिखेर दिया है जो हमारे शरीर को नुकसान पहुँचा सकता है।

16 साल से ज़िंदगी बचाने का अहसान

Shams Ki Zubani: अतीत की इन यादों को जब पाउलिन ने अपनी मां और स्टैन की कहानियों से जोड़कर देखना शुरू किया तो उसे लगा कि हो सकता है कि यही डर उनके परिवार के पीछे था जिसकी वजह से उन्हें अलग अलग शहरों में वक्त गुज़रने को मजबूर होना पड़ा।

इस बीच रूथ ने स्टैन का पहली बार पाउलिन से तार्रुफ करवाया। बताया कि स्टैन के जान पहचान के लोग खुफिया विभाग में काम करते हैं और उनकी वजह से ही उन्हें वक़्त पर सूचना मिल जाती थी जिससे उन्हें जान बचाने के लिए उपाय करने में सहूलियत हो जाया करती थी।

मां रूथ पाउलिन से कहती है कि पिछले 16 सालों से स्टैन ने हमारी और हमारे पूरे परिवार की हिफाज़त की है। इस दौरान हम दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया। हम एक दूसरे के बारे में सोचते रहे लेकिन कभी अपने ज़ज्बातों को एक दूसरे के सामने इज़हार नहीं कर सके। लेकिन अब कुछ अरसा पहले ही हमने अपने अपने ख्यालात साझा किए हैं और तय किया है कि हम दोनों एक दूसरे के साथ ताउम्र रहें इसके लिए हम लोग अब शादी करना चाहते हैं।

सच्चे क़िस्से के पीछे छुपे असली सच को जानने की ज़िद

Shams Ki Zubani: वॉरेन को पहले ही छोड़ चुकी हैं इसलिए मेरे सामने कोई दुविधा जैसी स्थिति तो है नहीं। पाउलिन को अपने सवालों के जवाब तो मिल जाते हैं लेकिन ज़ेहन में उलझन बरकरार रहती है। पाउलिन जब वहां से उठकर जाने लगती है तो स्टैन उसे एक ट्रांसमीटर देकर कहता है कि तुम अकेले रहती हो। ऐसे में ख़तरा महसूस होते ही अगर तुम इसका बटन दबा दोगी तो हमें खबर हो जाएगी और हमारे आदमी तुम्हारी हिफाज़त को पहुंच जाएंगे।

पाउलिन लौट जाती है लेकिन उलझन बरकरार रहती है। स्टैन ने पाउलिन को बताया था कि हम हमेशा खुफिया बिभाग की नज़र में रहते हैं यहां तक कि हमारे इर्द गिर्द कई हम जैसे दिखने वाले लोगों भी हैं। इतना सब कुछ होने और सुनने के बावजूद पाउलिन के लिए रूथ और स्टैन की कहानी को गले से उतार पाना मुश्किल हो रहा था। उसे पच नहीं रही थी। तमाम उधेड़बुन की रातों को बिताने के बाद आखिरकार पाउलिन ने तय किया कि जो कहानी रूथ और स्टैन ने सुनाई उसका पूरा सच अब वो जान कर रहेगी। वो ये जानना चाहती है कि जो उसे बताया गया क्या वाकई वही सच है या फिर इस सच का कोई और भी सच है।

उस सच की तलाश में निकलने से पहले पाउलिन ने अपने ब्यॉय फ्रेंड से भी दूरी बना ली, ये कहते हुए कि उसकी ज़िंदगी के कुछ ऐसे पन्ने हैं जिन्हें वो तसस्ली से पढ़ लेना चाहती है, तब तक उसके लिए कोई वक़्त नहीं दे सकती।

जब बेटी ने अपनी ही मां का सच जानने के लिए किया स्टिंग ऑपरेशन

Shams Ki Zubani: अब पाउलिन अपने ब्यॉयफ्रेंड के साथ साथ अपनी नौकरी को भी छोड़ देती है, ताकि पूरी तरह से आज़ाद होकर वो उस सच का पता लगा सके जिसका क़िस्सा उसे सुनाकर समझाया गया था कि आखिर क्यों इतने सालों तक वो लोग बंजारे की तरह भटकने को मजबूर होते रहे।

अब पाउलिन उस तलाश के पीछे निकल पड़ती है जो उसे उसकी मां और स्टैन ने सुनाई थी। इसी बीच पाउलिन के पास उसकी मां का फोन आता है जिसमें वो एक बार फिर खतरा होने की बात कहती है और अंडरग्राउंड होने की हिदायत भी दे देती है। लिहाजा पाउलिन सच का पता लगाने के लिए और इस खतरे की आहट के बारे में सुनकर वो सीधे मां के पास पहुँच जाती है। रूथ और स्टैन की शादी हो चुकी है। दोनों साथ रहते हैं। लेकिन जब पाउलिन वहां पहुँचती है तो वो दोनों अंडरग्राउंड होने की बात कहने के बावजूद अंडरग्राउंड नहीं होते हैं।

तब पाउलिन का माथा ठनकता है और वो अपनी ही मां का स्टिंग ऑपरेशन करने का इरादा करती है। और अपनी इसी कोशिश में वो एक रोज अपनी मां को अपने घर की खिड़की टूटने और घर में सुरंग बनाने की बात बताती है। ये भी कहती है कि उसके घर में किसी के घुसने के भी निशान हैं। ऐसे में उसे डर लग रहा है।

पाउलिन शादी के वक़्त स्टैन के साथ
पाउलिन शादी के वक़्त स्टैन के साथ

उस झूठ के पीछे का असली सच और पूरी प्लानिंग का मास्टरमाइंड

Shams Ki Zubani: पाउलिन की मां उसे राहत देती है और पाउलिन की कही बात स्टैन को बताती है। स्टैन रूथ को लेकर सीधा पाउलिन के घर पहुँचता है और पाउलिन को बताता है कि उसके घर में घुसने के जुर्म में दो लोगों के गिरफ़्तार किए जाने की इत्तेला देता है। लेकिन ये भी कहता है कि जिन लोगों को पुलिस ने पकड़ा है उनके पास से पाउलिन की तस्वीर भी मिली है।

स्टैन की बात सुनते ही पाउलिन खुद को रोक नहीं पाती है और हंसने लगती है। और फिर वो सच बोलती है कि उसने ये सब स्वांग किया था उस प्रतिक्रिया का पता लगाने के लिए कि ऐसा सुनने के बाद आप कैसे पेश आएंगे। और फिर पूछती है कि आखिर इस झूठ के पीछे की क्या वजह है। स्टैन घबरा जाता है।

पाउलिन की तलाश जारी रहती है और रूथ और स्टैन भी अब संभल संभलकर रहते हैं। अब पाउलिन को इस बात का अहसास हो जाता है कि शायद इस पूरे सिलसिले में उसकी मां ही अंधेरे में रही तभी वो स्टैन की बातों के जाल में उलझी रही। अब पाउलिन को महसूस होने लगता है कि उसके बचपन से लेकर जवानी तक के वक़्त में ये सारा सब कुछ स्टैन का किया धरा है। लेकिन सवाल यहीं खड़ा हो गया कि अगर स्टैन मास्टरमाइंड है तो फिर वो ऐसा क्यों कर रहा।

जब सामने आई दिमाग़ी बीमारी फॉलीड्यू सिंड्रोम की सच्चाई

Shams Ki Zubani: अब पाउलिन ने अपना फोकस स्टैन के पीछे लगा दिया ताकि उसका पूरा अतीत समझ सके। स्टैन की जानकारी इकट्ठा करते समय पाउलिन को ऐसी कोई भी चीज नहीं नज़र आई जिसको लेकर शक पैदा हो। लेकिन ये भी सही था कि स्टैन को किसी से भी कोई ख़तरा नहीं था और न ही कभी उसे कोई धमकी मिली। तब सवाल उठता है कि आखिर स्टैन ने फिर क्यों इतना बड़ा झूठ बोला। स्टैन के बारे में पाउलिन जब सारा रिसर्च पूरा कर लेती है तो तमाम जानकारियों को लेकर वो सीधे एक मनोवैज्ञानिक के पास पहुँच जाती है। और उससे अपने सवालों के जवाब पूछती है।

मनोवैज्ञानिक पाउलिन के सवाल और उसके रिसर्च को लेकर उसके अध्ययन में जुट जाता है। लम्बी जद्दोजहद और रिसर्च के बाद मनोवैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुँचता है कि असल में स्टैन एक सिंड्रोम का शिकार है। इस बीमारी का नाम है फॉलीएड्यू। ये ऐसी बीमारी है जिसमें कोई इंसान अपने ख्वाबों की दुनिया में जीता है।

दिमाग़ी फितूर जिसमें ख़्वाबों की दुनिया लगने लगती है हक़ीक़त

Shams Ki Zubani: वो मनोवैज्ञानिक पाउलिन को बताता है कि ये एक दिमाग़ी बीमारी है और इस बीमारी का शिकार जो सोचता है वही उसे अपने आस पास होता हुआ महसूस भी होता है। सपने की बात को वो असल जिंदगी मान लेता है। यानी बीमार को ख्वाबों की दुनिया में यकीन करने लगता है। लेकिन ये बात यहीं तक नहीं है।

बल्कि वो बीमार किसी दूसरे सामान्य इंसान को भी ये यकीन दिलाने में कामयाब हो जाता है कि वो जो सोच रहा है वो उसकी दुनिया का भी हिस्सा है। ये माफिया से झगड़ा और फिर माफिया का उसके पीछे हाथ धोकर पड़ जाना और उससे बचने के लिए उसे अलग अलग शहर में पनाह लेना असल में ये सब कुछ उसका दिमाग़ी फितूर है।

स्टैन को जब पॉउलिन की मां मिलती है तो वो रूथ को अपनी बातों पर यकीन दिलाने में कामयाब हो जाता है और फिर सारा क़िस्सा सिलसिलेवार तरीकें से वैसे ही होता जाता है जैसा स्टैन सोचता है और फिर रूथ को बताता है।

सच जान कर मां को कर दिया माफ़ लेकिन...

Shams Ki Zubani: यानी स्टैन ने जो तसव्वुर किया उसे वो रूथ को ज़िंदगी की हकीकत की तरह बता देता है और रूथ उसे सच मान कर उसकी कही बातों को अमल में लाने लगती है।

मनोवैज्ञानिक ने जब पाउलिन को सारी बात बताई तो उसे समझ में आ गया कि उसकी मां का इसमें कोई कुसूर नहीं वो तो खुद भोली थी जो अपने परिवार को ज़िंदा बचाने की जद्दोजहद सारी उम्र करती रही। इसलिए उसने अपनी मां को माफ कर दिया।

सब कुछ सामान्य सा हो गया। पाउलिन की मां ने बाद में कैंसर से अपना दम तोड़ दिया। पाउलिन ने भी शादी कर ली और स्टैन ने उसका पूरा फर्ज भी निभाया। लेकिन पाउलिन ने स्टैन को कभी माफ नहीं किया। हालांकि कभी पाउलिन ने स्टैन को लेकर कोई शिकायत भी नहीं किया।

Related Stories

No stories found.