यह पंक्ति एक विशेष साक्षात्कार (Exclusive Interview) का मुख्य शीर्षक है, जिसमें पुलिस एनकाउंटर (मुठभेड़) की नैतिकता, कानून और उसकी सीमाओं पर चर्चा की गई है। इस बातचीत में प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक मेघना गुलज़ार और प्रमुख अभिनेता पृथ्वीराज सुकुमारन शामिल हैं, जो अपनी किसी सिनेमाई परियोजना (जैसे किसी अपराध, पुलिस या सत्य घटनाओं पर आधारित फिल्म) के संदर्भ में इस मुद्दे पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। इस साक्षात्कार का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि क्या अपराधी को मौके पर ही सजा देने या एनकाउंटर करने का कोई संवैधानिक और कानूनी दायरा तय होना चाहिए या पुलिस की ऐसी शक्तियों पर अंकुश लगाया जाना चाहिए। कुल मिलाकर, यह बातचीत सिनेमा के माध्यम से समाज, कानून व्यवस्था और पुलिसिया कार्रवाई के नैतिक पहलुओं पर एक विचारोत्तेजक और गंभीर बहस पेश करती है।
क्या Encounter का कोई 'दायरा' होना चाहिए, मेघना गुलज़ार और पृथ्वीराज सुकुमारन से ख़ास बातचीत
ADVERTISEMENT
• 08:02 PM • 28 Sep 2026
Should there be a limit to encounters?
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT










