यह मुख्य रूप से पुलिस जांच में हुई गंभीर हेराफेरी, पक्षपात और न्याय व्यवस्था की लाचारी को दर्शाने वाली एक सनसनीखेज खबर का सार है। इस पंक्ति के अनुसार, मामला किसी गंभीर अपराध या हत्या की जांच से जुड़ा है, जहाँ पुलिस आयुक्त (Commissioner) पर यह संगीन आरोप लग रहा है कि उन्होंने मुख्य आरोपी,यानी बेटे को बचाने की नीयत से उसकी जगह बहू को ही कातिल बनाकर पेश कर दिया। इस पूरी घटना में सबसे बड़ा व्यंग्य और विडंबना यह है कि मामले की दिशा बदलने और जांच पर सवाल खड़े होने के बावजूद, बेगुनाही का दावा करने वाली महिला (शालू) को कोई राहत नहीं मिली है और उसे अब भी सलाखों के पीछे ही सड़ना पड़ रहा है। कुल मिलाकर यह विवरण पुलिस की मनमानी, कानून के दुरुपयोग और एक निरपराध व्यक्ति के साथ हो रहे अन्याय के कड़वे सच को उजागर करता है।