क्या अनसेफ थी कोविशील्ड वैक्सीन? वैक्सीन से होने वाली जवान मौतों पर अब सुप्रीम कोर्ट में होगा फैसला

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Covishield: कोविशील्ड वैक्सीन से पैदा हुए जोखिम और साइड इफेक्ट्स की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट से रिटायर्ड जज की अगुवाई में एक एक्सपर्ट पैनल बनाने की गुजारिश की गई है। इसको लेकर एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है। उधर, कोविशील्ड वैक्सीन बनाने वाले कंपनी के खिलाफ एक शख्स अदालत में याचिका दाखिल करने जा रहा है। कोविशील्ड से कथित तौर पर वेणुगोपालन गोविंदन की बेटी करुण्या की मौत हो गई थी। उनका आरोप है कि उनकी बेटी की मौत वैक्सीन लेने की वजह से हुई। जुलाई 2021 में करुण्या ने वैक्सीन की डोज ली थी। हालांकि उस वक्त सरकार की ओर से बनाई गई एक राष्ट्रीय स्तर की समिति जांच के बाद इस नतीजे पर पहुंची थी कि करुण्या की मौत वैक्सीन लेने से नहीं हुई। 

कोविशील्ड के साथ जुड़ा विवाद

दरअसल कोविशील्ड वैक्टिसीन ब्रिटिश फार्मा दिग्गज एस्ट्राजेनिका ने ईजाद की थी। एस्ट्राजेनिका और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की साझा कोशिशों से बनाई गई कोविशील्ड का प्रोडक्शन भारत में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने किया था। देश में करोड़ों लोगों ने इसका इस्तेमाल किया। हैरानी की बात ये है कि अदालत में दिये दस्तावेजों में खुद कंपनी ने कुबूल किया है कि कुछ मामलों में इसका टीका प्लेटलेट काउंट कम करने के साथ साथ खून के थक्के जमाने जैसे साइड इफेक्ट पैदा कर सकता है। इसी को लेकर यूके की कोर्ट में मुकदमा दायर किया गया था। ये मुकदमा जेमी स्कॉट ने दाखिल किया था, जिन्हें अप्रैल 2021 में एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स झेलने पड़े। 

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

उधर, सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को एक पेटिशन दायर कर याचिकाकर्ता ने कोविशील्ड टीके से पैदा जोखिम और साइड इफेक्ट्स की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट से रिटायर्ड जज की अगुवाई में एक एक्सपर्ट पैनल बनाने की प्रार्थना की है। वकील विशाल तिवारी की ओर से याचिका दाखिल की गई है। 

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याचिका में कहा गया है कि ‘‘कोविड-19 महामारी के बाद दिल का दौरा पड़ने और लोगों के अचानक बेहोश होने से मौत के मामलों में इजाफा हुआ है। युवाओं में भी दिल का दौरा पड़ने के कई मामले सामने आए हैं। अब कोविशील्ड बनाने वाली कंपनी की ओर से ब्रिटेन की अदालत में दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि हम बड़ी संख्या में नागरिकों को लगाए गए कोविशील्ड टीके के जोखिम और खतरनाक नतीजों के बारे में सोचने पर मजबूर हैं।''

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