Shraddha Murder Case: महरौली के जंगल के सच में छुपा है आफताब के झूठ का असली राज़

Shraddha Murder Case: महरौली (Mehrauli) के जिस जंगल में श्रद्धा की लाश के टुकड़ों को फेंकने की बात आफताब ने पुलिस को बताई, अब वही जंगल अपनी पूरी सच्चाई के साथ साथ कत्ल के आरोपी के सच को घेर रहा है।
महरौली के जंगल में क्राइम तक की टीम
महरौली के जंगल में क्राइम तक की टीम

Shraddha Murder Case: श्रद्धा मर्डर केस के सामने आने के बाद से ही दिल्ली (Delhi) में महरौली का जंगल इस वक्त पुलिस के साथ साथ मीडिया (Media) की नज़रों के फोकस में है। उसकी वजह भी है, कत्ल (Murder) के इस किस्से में आरोपी आफताब (Aaftab) ने अब तक जो कुछ भी बताया उसकी वजह से पुलिस (Police) हो या मीडिया हर किसी के लिए सीधा रास्ता इसी जंगल की तरफ जाता है।

पुलिस की अब तक की तफ्तीश कहती है कि मुल्जिम आफताब ने दिल्ली के इसी महरौली के जंगल के भीतर जाकर अपने गुनाहों के सबूतों को ठिकाने लगाया है। और उन्हीं सबूतों की तलाश करने के लिए दिल्ली की स्मार्ट पुलिस पिछले पांच दिनों से जंगल की खाक छान रही है।

जिस जंगल की बात की जा रही है...वो जंगल कैसा है..क्या वहां सबूत मिलेंगे...उस जंगल के बारे में आरोपी कितना जानता है...उस जंगल तक जाना क्या वाकई इतना ही आसान है जितना पुलिस को लगता है...और जिस वक़्त की बात की जा रही है यानी मई के महीने से लेकर अब तक पूरे छह महीनों के दौरान क्या जंगल में बिखरे वो तमाम सबूत वाकई अब भी वहीं मौजूद हैं...

ये सवाल पिछले पांच दिनों से ही अलग अलग शब्दों और अल्फाज के जरिए बार बार जेहन में कौंधने लगता है। इन्हीं सवालों को साथ लेकर जब उस जंगल का दौरा किया, तो जिस एक बात ने सबसे पहले दिमाग पर अपना असर दिखाया वो बड़ा ही चौंकाने वाला भी है...

महरौली का जंगल में है आवारा कुत्तों की भरमार
महरौली का जंगल में है आवारा कुत्तों की भरमार

Shraddha Murder Case: बात ये है कि उस घने जंगल में पुलिस को कुछ भी मिल सकता है, लेकिन सबूत मिलेगा इस बात पर शक है। ऐसा हम क्यों कह रहे हैं चलिए आपको उस जंगल की तरफ ले जाते हैं ताकि आप खुद अंदाज़ा लगा सकें कि महरौली के उस जंगल में क्या क्या मिल सकता है और असल में अब तक के इस खुलासे में पुलिस कहां कहां गच्चा खाती दिखाई दे रही है।

दिल्ली के कुतुब मीनार के बेहद नज़दीक महरौली का ये जंगल असल में दिल्ली का फेफड़ा भी कहा जाता है। दिल्ली से लेकर हरियाणा की हद तक फैले इस जंगल का दायरा क़रीब 35 किलोमीटर का है। और राजस्थान से आने वाली धूल भरी हवाओं को दिल्ली में आने से पहले इन्हीं जंगलों से जूझना पड़ता है।

ये जंगल इस कदर घना है कि यहां दिन के वक्त भी रास्ता तलाशना किसी बड़ी जद्दोजहद से कम नहीं। जंगल के भीतर जंगली जानवरों के साथ साथ आवारा कुत्तों की भी कोई कमी नहीं। जंगल के इर्द गिर्द बसी बस्तियों के जानवर भी इस जंगल में दिन भर घूमते दिख जाएंगे। इसके अलावा ये जंगल हरियाणा के उन जंगलों से भी जुड़ा है जहां से जंगली जानवरों की आवाजाही होती रहती है।

जंगल में आवारा और जंगली जानवरों की भरमार

Shraddha Murder Case: जैसे कि सियार, तेंदुए, या गुलदार जैसे जानवर। इसके अलावा जंगल के आसमान पर अक्सर आप चील और कौवों को भी मंडराते आसानी से देख सकते हैं। एक पत्थर की दीवार इस जंगल को आम लोगों से दूर कर देती है...यानी दीवार के इस तरह शहर का शोरशराबा है तो दूसरी तरफ घने जंगल का वो रहस्य जिसके बारे में जानने की शायद ही किसी को बहुत दिलचस्पी हो।

जंगल को घेरने वाली दीवार जगह जगह से टूटी हुई है और उस टूटी हुई दीवार से बनी जगह का इस्तेमाल आस पास की बस्ती में रहने वाले लोग अपने अपने तरीके से करते ही रहते हैं। इसीलिए जहां जहां से जंगल की दीवार टूटी हुई है वहां लोगों ने अपनी सुविधा के मुताबिक जंगल के उस हिस्से को या तो कूड़े घर में तब्दील कर दिया या फिर अपने लिए कोई शॉर्टकट रास्ता बना लिया। जो जंगल के एक हिस्से से होते हुए उन्हें दूसरे रास्ते पर ले जा सके।

हमने यानी क्राइम टीम ने जब इस जंगल में जाने का इरादा किया तो वही रास्ता लिया जहां से कत्ल का आरोपी आफताब पुलिस को लेकर जंगल के उस हिस्से में पहुँचा था...जहां उसके मुताबिक श्रद्धा के लाश के टुकड़ों को फेंकने के लिए पहुँचा था।

जहां दिन में जाना मुश्किल है वहां आफताब रात में कैसे पहुंचा? 

Shraddha Murder Case: उस जगह छतरपुर पहाड़ी से शायद एक से डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर ही है। जहां से जंगल में पुलिस गई थी वहां से जब हम जंगल में दाखिल हुए तो सिर्फ 100 गज की दूरी तक पहुंचे तो ये बात समझ में आने लगी जिस जंगल में हम दिन के उजाले में सिर्फ 100 गज का फासला तय करने में डर गए...

जहां एक कदम से दूसरे कदम तक पहुंचने में भी जूझना पड़ रहा था...तो सवाल यही उठ खड़ा हुआ कि उस जंगल में कोई रात के दो बजे शायद टॉर्च या मोबाइल की रोशनी में कैसे कोई इतने भीतर तक जा सकता है और वो भी लाश के टुकड़ों को अपने कंधे पर उठाकर। जैसा कि पुलिस के सामने दिए गए कबूलनामे में आफताब ने माना था।

जबकि उस जंगल में वहां से भी करीब 200 गज आगे जाकर पुलिस ने आफताब की निशानदेही पर कुछ हड्डियों को उठाने का दावा किया है। अब एक और बात। हम जब जंगल में भीतर की तरफ जा रहे थे...तो हमें भी रास्ते में कुछ हड्डियों के टुकड़े...कुछ छोटी और कुछ बड़ी हड्डियां नज़र आईं...वैसे काले रंग के पॉलीथिन भी दिखाई दिए जिनमें अक्सर लोग कूड़े या कचरा भरकर फेंक दिया करते हैं।

जंगल से पुलिस ने क्या सच मुच श्रद्धा की लाश के टुकड़े उठाए?

Shraddha Murder Case: आस पास घूमते आवारा जानवर, आसमान में मंडराते चील और कौवों को देखकर एक और सवाल जेहन में कौंधा कि क्या जिन हड्डी के टुकड़ों को पुलिस ने उठाया...वो क्या वाकई सही हैं?

इसके अलावा जिस बात ने सबसे ज़्यादा ध्यान खींचा वो ये था कि कत्ल की ये वारदात मई के महीने में हुई और आरोपी के मुताबिक उसने 20 दिन तक लाश के टुकड़ों को जंगलों में फेंका...। लेकिन गर्मियों के बाद बरसात भी आती है, और बारिश के वक्त जंगल के ज़्यादातर हिस्सों में पानी भी भर जाता है।

ऐसे में सवाल तो उठता ही है कि जब लाश के टुकड़े ज़्यादा बड़े नहीं थे तो फिर इस बात की कितनी संभावना बचती है कि आरोपी जिन जगहों पर पुलिस को लेकर गया...और मान लिया जाए कि वो जगह वही थी जहां आरोपी ने वाकई लाश के टुकड़ों को फेंका तो फिर जब बारिश का पानी जंगल के ज़्यादातर हिस्सों में भरा तो क्या वो टुकड़े अपनी जगह से बहकर दूसरी जगह नहीं चले गए होंगे...

आफताब ने लगा रखे हैं अपने चेहरे पर कई नक़ाब?

Shraddha Murder Case: लेकिन इससे भी हटकर जिस बात ने सबसे ज़्यादा हैरान किया वो ये था कि आफताब दिल्ली का रहने वाला नहीं है। वो मुंबई से कुछ रोज पहले ही दिल्ली आया था। यानी वो शहर के लिए पूरी तरह से अनजान था। ऐसे में क्या ये मुमकिन है कि पुलिस को शहर से अनजान एक शख्स जंगलों में ऐन उसी जगह ले जाकर खड़ा कर दे जहां वो पहले कभी आया ही नहीं।

और दूसरी बात ये है कि रात के अंधेरे और दिन के उजाले में भी बड़ा फर्क होता है। तो क्या ये मुमकिन है कि जंगल के जिन रास्तों से होकर वो रात के अंधेरे में गया हो...उन्हीं रास्तों पर वो कई महीनों के बाद पुलिस को दिन के उजालों में लेकर पहुँचा दे...।

ज़रा इन सवालों की रोशनी में ज़रा अब पूरे मामलों को देखने की कोशिश कीजिए...।

एक जंगल...35 किलोमीटर का दायरा....4 दिन और 15 घंटे की तफ्तीश...जी हां, महरौली के इसी घने जंगल की तरह रहस्यमय है आफताब पूनावाला का किरदार....

जाहिर है कि अबतककीपूछताछसेदिल्लीपुलिसके साथ साथ इस खबर पर दिलचस्पी रखने वालों को ये बात अच्छी तरह समझ में आ गई है कि आफताब ने अपने चेहरे पर कई किस्म के नकाब लगा रखे हैं... और उन नकाबों के जरिए वो सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रहा है.. वो दिल्ली पुलिस को तरह-तरह की वजहें बता कर बरगलाने में लगा है..

Related Stories

No stories found.
Crime News in Hindi: Read Latest Crime news (क्राइम न्यूज़) in India and Abroad on Crime Tak
www.crimetak.in