Kanjhawala Case: 20 साल की अंजलि की मौत के 20 रोज़ बाद भी 10 सवालों के चौराहे पर खड़ी दिल्ली पुलिस?

Anjali Death Mystery: साल के पहले दिन कंझावला कांड की शक्ल में दिल्ली पुलिस के सामने आकर खड़ा हुआ सवाल 20 दिन बाद भी उसका पीछा नहीं छोड़ रहा है।
कार में फंसी अंजलि को करीब 12 किलोमीटर तक घसीटा गया
कार में फंसी अंजलि को करीब 12 किलोमीटर तक घसीटा गया

Anjali Case Update: नये साल (New Year) यानी 2023 की पहली सुबह से भी पहले जिस खबर ने सामने आकर देश की राजधानी (Capital) को झकझोरकर उठा दिया था, वो था कंझावला कांड (Kanjhawala Case) और उस कांड का शिकार हुई थी अंजलि (Anjali) नाम की एक 20 साल की लड़की।

20 साल की अंजलि को गुज़रे हुए 20 रोज हो चुके हैं। और इन 20 दिनों में कंझावला केस अब तक अनगिनत यू टर्न (U Turn) लेने के बाद भी किस रास्ते पर आगे बढ़ रहा है इसका पूरा पूरा अंदाजा किसी को भी नहीं...यहां तक कि खुद दिल्ली पुलिस (Delhi Police) भी इस कांड को लेकर किसी चौराहे पर खड़ी दिखाई देती है।

अंजलि की मौत हादसा थी या हत्या? इस हादसे का असली कसूरवार कौन? इस मामले की जांच अब कहां तक पहुँची? यानी इस कांड से जुड़े कम से कम 10 तो ऐसे सवाल हैं ही...जिनको लेकर कानाफूसी हो रही है। और बात तो अब इस दो राहे पर आकर अटक सी गई है कि वो हादसे की तरफ जाए या फिर हत्या के रास्ते पर आगे बढ़े।

हालांकि मामले में गृहमंत्रालय के एक्शन में आने के बाद इस केस की FIR में दफा 302 भी जोड़ दी गई है और इस कांड के चार आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा भी दर्ज कर दिया गया है।

यानी IPC की धारा 302 जोड़ने के बाद ही ये साफ हो गया कि अब इस मामले में तफ्तीश का दायरा बढ़ जाएगा। लेकिन अब उन गलतियों का क्या होगा जो इस पूरे केस में पहले दिन से दिल्ली पुलिस ने की और तब तक करती रही जब तक इस मामले में दिल्ली पुलिस को सही ढंग से फटकार नहीं लगी।

31 दिसंबर की रात और 1 जनवरी 2023 की सुबह के दरम्यान सुल्तानपुरी के इलाके में एक बलेनो गाड़ी ने एक लड़की को क़रीब 13 किलोमीटर तक घसीटा। ये उस रात का वाकया है जब राजधानी के चप्पे चप्पे पर दिल्ली पुलिस का पहरा शायद सबसे तगड़ा होता है। लेकिन उस लड़की को घिसटते हुए पुलिस की नज़रों ने नहीं देखा।

अलबत्ता उसे दिल्ली की पथरीली सड़कों पर रगड़ते हुए कुछ निगाहों ने जरूर देखा...और दिल्ली पुलिस को वो आंखों देखा हाल भी बताने की भरपूर कोशिश की...लेकिन न जाने किस गुमान में खोई दिल्ली पुलिस के सिपाहियों ने पब्लिक की आंखों से हादसे को देखने की तब तक कोशिश नहीं की जबतक बात पुलिस के हाथ से निकल नहीं गई।

Delhi Crime News: अगले रोज सुबह जब पुलिस हरकत में आई तब तक बहुत कुछ हो चुका था। सबसे पहले तो वो लड़की जो गाड़ी से घिसट रही थी वो मर गई। जिस लड़की के साथ वो स्कूटी पर सवार थी...वो गायब हो गई और अगले कई घंटों तक उसका कोई अता पता ही नहीं चला।

पुलिस ने इसे हिट एंड रन केस के लिहाज से ही दर्ज किया और उन लोगों को क्लीन चिट देनी शुरू कर दी जो उस कार में सवार थे जिसके नीचे फंसकर अंजलि की जान निकल रही थी।

अंजलि की लाश जिस हाल में मिली थी...वो ही अपने आप में कई सवाल खड़े कर देती है। क्योंकि जिसने भी उसकी लाश को देखा उसके कलेजा कांप गया। पुलिस को सिर्फ उसका बेजान जिस्म ही सड़क पर पड़ा मिला था, न तो उसमें खून का एक भी कतरा मौजूद था और न ही शरीर के पूरे हिस्से।

उसके एक पैर के घुटने पूरी तरह से घिस चुके थे, कमर की हड्डी बाहर आ चुकी थी...और पीठ से खाल नदारद थी, यहां तक कि फेफड़ों को संभालने वाला पिंजर भी आधे से ज़्यादा घिस चुका था। उसका सिर दो हिस्सों में बट गया था, सामने माथे वाला हिस्सा तो था लेकिन सिर का पिछला हिस्सा ग़ायब...और इससे भी बड़ी बात कि उसका भेजा कहीं सड़क पर ही गिर कर बिखर चुका था।

इसके बाद पुलिस की तरफ से लीपापोती का नया सिलसिला शुरू हुआ जो शायद अब तक जारी है। हालांकि उसे चार्जशीट जल्द से जल्द तैयार करने के कड़े निर्देश तो मिल चुके हैं मगर अभी बहुत कुछ समेटना और बटोरना बाकी है।

पुलिस पहले दिन से या यूं कहें पहले घंटे से ही कहानी को बदल बदलकर सुनाने की कोशिश में लगी हुई है। मगर सवाल यही उठता है कि 20 दिनों के बाद आखिर बात कहां पर रुकी है।

Delhi Crime & Police: तो इस मामले में वो 10 कौन कौन से सवाल हैं जिन्होंने दिल्ली पुलिस का चैन चुरा रखा है।

1)- आखिर उस रात सुल्तानपुरी से कंझावला तक यानी पूरे 12 किलोमीटर के फासले में कोई पुलिसवाला क्यों नहीं था?

2)-  बिना तहकीकात के पुलिस ने इसे हादसा कहना क्यों शुरू कर दिया था? ऐसी क्या मजबूरी या जल्दबाजी थी कि पुलिस इसे ओपन एंड शट केस बनाने में तुली थी?

3)- क्या पुलिस को पता चल चुका था कि आरोपियों में एक रसूखदार सियासी नेता भी शामिल है?

4)- क्या पुलिस जान चुकी थी कि स्कूटी पर अंजलि के साथ एक और लड़की भी है फिर भी उसतक पहुँचने में कई घंटे लगा दिए?

5)- इस मामले में अंजलि के साथ स्कूटी पर सवार निधि पहले दिन से ही संदिग्ध दिखाई दे रही है...पुलिस ने भी उससे पूछताछ की और मीडिया में भी उसकी बात चली, लेकिन फिर वो अचानक सीन से गायब कैसे हो गई?

6)- घटना वाली रात ये बात निकलकर सामने आ चुकी है कि अंजलि और निधि का होटल में किसी पैसे को लेकर झगड़ा हुआ था, तो वो पैसा किसका था कौन सा था और कहां से आया था? और ये बात पुलिस अभी तक साफ क्यों नहीं कर पाई है?

7)- ये बात तो साफ हो चुकी है कि उस रात कार पर सवार सभी आरोपी नशे में थे, और कार तेजी से चला रहे थे, तो कहीं ये हादसा जानबूझकर तो नहीं किया गया था, यानी इस हादसे के पीछे कोई और किसी तरह की साज़िश तो नहीं?

8)- क्या हादसे की रात निधि भी नशे में थी...क्या पुलिस ने इस बात का पता लगाने की कोशिश की?

9)- पुलिस क्यों इस बात की सफाई देने में लगी हुई थी कि ये हादसा का मामला है और हत्या का इससे कोई लेना देना नहीं?

10)-अब इस केस में दफा 302 लगने के बाद क्या पुलिस को हत्या के लिए जरूरी सबूत और सुराग मिल गए हैं? क्या इन 20 दिनों की लापरवाही का इस हत्या के केस में कोई फर्क नहीं पड़ेगा?

Delhi Crime Update: इन सवालों की रोशनी में अब पुलिस को इस मामले की चार्जशीट भी जल्दी दाखिल करने की चुनौती है ताकि हत्या का मुकदमा चलाया जा सके। बकौल पुलिस इस कांड की जांच के लिए दिल्ली पुलिस की 18 टीमें लगी हुई हैं।

हालांकि खुद पुलिस की एक अफसर यानी स्पेशल कमिश्नर शालिनी सिंह ने अपनी जो रिपोर्ट गृहमंत्रालय को दी उसने तो पहले ही दिल्ली पुलिस को सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया।

रहा सवाल इस बात का कि अब हादसा कांड हत्या के केस में तब्दील हो जाने के बाद पुलिस को नए सिरे से सारे पहलुओं को न सिर्फ खंगालना है बल्कि ऐसे मजबूत सबूत और सुराग भी इकट्ठे करने हैं ताकि अदालत में फटकार खाने से बच सके और हत्या की FIR का भी सही ठंग से बचाव कर सकें...और उसी रोशनी में ये सवाल भी झांकता दिखाई पड़ सकता है कि क्या इतना सब होने के बाद भी अंजलि की मौत का पूरा सच सामने आ सकेगा?

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