कारतूस कांड जिससे हिल गया था यूपी, 24 पुलिसकर्मी को 10-10 साल की सजा

Up News: बहुचर्चित रामापुर कारतूस कांड में कोर्ट ने 24 पुलिसकर्मियों को दोषी पाया है.

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14 Oct 2023 (अपडेटेड: Oct 14 2023 3:50 PM)

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Up News: बहुचर्चित रामापुर कारतूस कांड में कोर्ट ने 24 पुलिसकर्मियों को दोषी पाया है. दोषियों को शुक्रवार को रामपुर कोर्ट के स्पेशल जज विजय कुमार ने दस-दस साल की कैद और दस दस हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है. इस घटना ने सुरक्षा एजेंसियों को हिलाकर रख दिया और पुलिस विभाग में भी हड़कंप मच गया. आज हम चर्चा करेंगे कुख्यात और बहुचर्चित रामापुर कारतूस कांड पर.

क्या था रामापुर कारतूस कांड?

29 अप्रैल 2010 को उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया. मामले की जांच का जिम्मा एसटीएफ के एसआइ प्रमोद कुमार पर था. जांच के दौरान एक डायरी मिली, जिसमें कई लोगों के नाम और मोबाइल नंबर थे. इस डायरी के आधार पर एसटीएफ ने 25 लोगों को गिरफ्तार किया.

आश्चर्यजनक पहलू यह था कि ये सभी लोग पुलिस कर्मी थे. उनमें से कुछ केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) से थे, जबकि अन्य प्रांतीय सिविल सेवा (पीसीएस) में तैनात थे. एसटीएफ ने खुलासा किया कि ये पुलिस और सुरक्षाकर्मी नक्सलियों और आतंकवादियों को कारतूस सप्लाई करने में शामिल थे. इस खुलासे से सनसनी फैल गई, क्योंकि गिरफ्तार किए गए कई लोग सीआरपीएफ और पीसीएस में कार्यरत थे।

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा हमले में कारतूसों का इस्तेमाल

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा इलाके में बड़ा नक्सली हमला हुआ था, जिसमें सेना के कई जवान शहीद हो गए थे. जब इस हमले की जांच की गई तो पता चला कि आतंकी नक्सलियों द्वारा इस्तेमाल किए गए कारतूसों के तार रामापुर से जुड़े हुए थे. इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने गहन जांच शुरू कर दी।

जांच से पता चला कि कारतूसों को खाली कारतूसों से बदला जा रहा था और फिर आतंकवादियों को बेचा जा रहा था। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, मामला और खुलता गया। यह स्पष्ट हो गया कि ये कारतूस एसटीएफ रामापुर से लाए जा रहे थे और आतंकवादियों और नक्सलियों के हाथों में जा रहे थे।

कोर्ट का फैसला

रामापुर क्षेत्र में नक्सलियों और आतंकियों को कारतूस सप्लाई करने वाले 24 आरोपियों को आवश्यक वस्तु अधिनियम की विशेष अदालत ने दोषी करार दिया है, जो पुलिस और सुरक्षाकर्मी थे. दोषियों को शुक्रवार को रामपुर कोर्ट के स्पेशल जज विजय कुमार ने दस-दस साल की कैद और दस दस हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है

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