SHAMS TAHIR KHAN से सुने "दिमाग़ से टुकड़ों तक" श्रद्धा आफ़ताब की हैरान करने वाली कहानी!

Shraddha Murder Case: श्रद्धा मर्डर केस में पिछले 9 दिनों से दिल्ली पुलिस के हाथ बिल्कुल खाली हैं. पुलिस को अब तक श्रद्धा के कत्ल का ठोस सबूत नहीं मिला है. महरौली के जंगल से अब तक कई हड्डियां बरामद की गई हैं.
Shraddha Murder Case
Shraddha Murder Case

Shraddha Murder Case: दिल्ली पुलिस को अब तक श्रद्धा के कत्ल का एक भी सबूत नहीं मिला है. दिल्ली पुलिस (Delhi Police) को शायद श्रद्धा की लाश का कोई टुकडा भी नहीं मिला है. दिल्ली पुलिस के हाथ शायद कोई इंसानी हड्डियां भी नहीं लगी हैं. पिछले 9 दिनों से दिल्ली पुलिस के हाथ बिल्कुल खाली हैं.

अब आप कहेंगे कि अब तक तो यही सुना था कि दिल्ली पुलिस ने महरौली के जंगल से करीब 13 हड्डियां (13 Bones) बरामद की थी, शक यही था कि हड्डियां इंसानी हैं और बहुत मुमकिन है कि श्रद्धा की लाश से जुडी ये हड्डियां हैं। लोग तो अब ये सवाल करने लगे थे कि इन हड्डियों की फॉरेंसिक रिपोर्ट कब तक आएगी? कितने दिनों में आ जाएगी? पर आप शायद यकीन करें या ना करें, अब जो हम खुलासा करने जा रहे हैं, वो आपको चौंका देगी। जी हां, दिल्ली पुलिस ने आज की तारीख तक यानी 21 नवंबर तक रोहिणी फॉरेंसिक लैब में श्रद्धा मर्डर केस से जुडा एक भी सबूत फॉरेंसिंक जांच के लिए नहीं भेजा है। यानी जिन 13 या 17 हड्डियों की बरामदगी की बात कही जा रही है, उनमें से एक हड्डी भी अब तक फॉरेंसिक लैब में नहीं पहुंची हैं।

Shraddha Murder Case: श्रद्धा मर्डर केस की जांच के बाद दिल्ली पुलिस की टीम पहली बार आफताब की निशानदेही पर महरौली के इस जंगल में पहुंची थी। तब यहां से उसने चंद हड्डियां बरामद की थी। इसके बाद वो दो बार आफताब को लेकर और तीन बार बिना आफताब के इस जंगल में पहुंची। करीब 20 घंटे तक जंगल की तलाशी ली। 13 हड्डियां बरामद करने का दावा किया। लेकिन इसके बावजूद श्रद्धा मर्डर केस से जुडे इस सबसे अहम सबूत को पिछले छह दिनों से फॉरेंसिक जांच के लिए नहीं भेजा गया। ये हड्डियां अब भी शायद महरौली पुलिस थाने के मालखाने में है।

आपको याद दिला दूं कि इसी महीने सु्पीम कोर्ट ने छावला गैंग रेप और मर्डर केस में दो अदालतों से फांसी की सजा पानेवाले तीन लडकों को बरी कर दिया था। वजह ये थी कि जिन फॉरेंसिक या डीएनए सैंपल के आधार पर निचली अदालत और हाई कोर्ट ने तीनों को मौत की सजा दी थी, उन्हीं सबूतों को सुपीम कोर्ट ने मानने से इनकार कर दिया। ये कह कर कि ये फॉरेंसिक नमूने करीब 11 दिनों तक थाने में खुले में पडे रहे थे। इसलिए इसकी विश्वसनीयता पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

Shraddha Murder case facebook chat
Shraddha Murder case facebook chat

तो सवाल ये है कि श्रद्धा मामले में भी दिल्ली पुलिस वही गलती करने जा रही है? अगर नहीं तो फिर क्या वजह है कि पिछले छह दिनों से बरामद हड्डियों को जांच के लिए फॉरेंसिक लैब नहीं भेजा गया। आखिर पुलिस किस चीज का इंतजार कर रही है? सवाल ये भी उठता है कि कहीं इन हड्डियों को लैब ना भेजने के पीछे वजह ये तो नहीं कि ये हड्डियां इंसान की हैं ही नहीं? या फिर पुलिस ने अब तक ऐसा कोई सबूत बरामद ही नहीं किया है। जाहिर है इन सवालों के जवाब दिल्ली पुलिस ही दे सकती है। मगर श्रद्धा मर्डर केस के सबूतों की तरह दिल्ली पुलिस भी गुम और खामोश है।

Shraddha Murder case
Shraddha Murder case

Shraddha Murder Case: वैसे अब अचानक कोई चमत्कार हो जाए तो अलग बात है। वरना मान कर चलिए कि इस पूरे हफ्ते भी श्रद्धा मामले में कोई खुलासा नहीं होनेवाला। वजह ये कि अदालत से इजाजत मिलने के बावजूद आफताब का नार्को टेस्ट इस हफ्ते के आखिर से पहले हो ही नहीं सकता। दरअसल नार्को से पहले कई मेडिकल एग्जामिनेशन से गुजरने के बाद पॉलीगाफ टेस्ट होता है। पॉलीगाफ टेस्ट के बाद कुछ दिन इंतजार करना पड़ता है। तब कहीं जा कर नार्को टेस्ट होता है।

अब सवाल ये है कि महरौली के जंगलों से लेकर गुरुग्राम, ऋषिकेश, हिमाचल और महाराष्ट के वसई तक में भटक रही दिल्ली पुलिस जब अब तक श्रद्धा केस में कोई सबूत नहीं जुटा पाई, तो फिर फॉरेंसिक लैब कैसे सबूत जुटा लेगी? तो आइए, आज इसे भी तफ्सील से समझ लीजिए। यकीनन फॉरेंसिक जांच से श्रद्धा का केस सुलझ सकता है। कैसे.. चलिए बताते हैं।

Aftab Killed Shraddha
Aftab Killed Shraddha

दरअसल हर मुजरिम क्राइम सीन पर या फिर मौका ए वारदात से हमेशा कुछ लेकर जाता है या फिर देकर। मसलन आफताब और श्रद्धा केस को ही ले लेते हैं। बकौल आफताब उसने श्रद्धा का कत्ल छतरपुर पहाडी के इसी घर में किया था। यानी आफताब इस घर से बेशक श्रद्धा की लाश और उसके टुकडे, उसके कपडे, मोबाइल सब बाहर ले गया। बाहर ले जाकर उसने उस सभी चीजों को या तो ठिकाने लगा दिया, या छुपा दिया। अब आफताब जो कुछ भी बाहर ले गया, उसे ढूंढने और तलाशने का काम दिल्ली पुलिस का है।

जो पुलिस पिछले 9 दिनों से कर रही है। लेकिन इस दौरान जो कुछ आफताब देकर गया, वो भी इसी घर में है। बस फर्क इतना है कि वो जो लेकर बाहर गया, वो दिखाई देता था। जो घर में छोड गया वो नंगी आंखों से देखा नहीं जा सकता। इसे बस फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स अपनी कलाकारी से ही देख पाते हैं। जैसे घर में खून का कोई निशान, लाश के महीन से महीन टुकडे, बाल, नाखुन, कपडे, चादर, बर्तन, फर्श, छत, दीवार, जूते चप्पल, इन सभी में कोई ना कोई सबूत छुपा होता है। जिसे फॉरेंसिक एक्सपर्ट जांच के बाद सामने ले आते हैं।

Shraddha Murder
Shraddha Murder

Shraddha Murder Case: तो ये तो साफ हो गया कि हर मुजरिम क्राइम सीन से कुछ ले जाता है या फिर कुछ छोड कर जाता है। अब मान लीजिए कि जो वो लेकर गया, उसके कोई सबूत नहीं मिले, जैसा फिलहाल श्रद्धा केस में। या फिर वो जो छोड कर गया, उसके भी कोई सबूत नहीं मिले, जैसे इसी श्रद्धा केस में। तो फिर केस कैसे सुलझेगा और और मुजरिम को कैसे सजा होगी, तो यहां पर अब तीसरी चीज आती है। और वो है मुजरिम का दिमाग। ये तीसरी चीज बेहद जरूरी है। वजह ये है कि जब पुलिस या फॉरेंसिक साइंस भी सच का पता ना लगा पाए, तो मुजरिम के दिमाग में घुस कर सच तक पहुंचा जा सकता है।क्योंकि हर मुजरिम के दिमाग में उसके हर जुर्म का सच छुपा होता है।

Aftab CCTV | Crime Tak
Aftab CCTV | Crime Tak

Shraddha Murder Case: अब सवाल है कि मुजरिम का दिमाग कैसे पढा जाए? तो बस इसीलिए नार्को टेस्ट होता है। ताकि मुजरिम के दिमाग में घुस कर उसका सच बाहर लाया जा सके। लेकिन नार्को टेस्ट के लिए पहले अदालत और खुद उस मुल्जिम की सहमति जरूरी है। नार्को टेस्ट के दौरान आरोपी को कुछ डग्स दिए जाते हैं। आरोपी की कद, काठी, सेहत, वजन और उम्र को देखते हुए। दवाओं की ये डोज इतनी मात्रा में दी जाती है कि आरोपी ना तो पूरी तरह बेहोश हो और ना ही पूरी तरह नींद की आगोश में हो।

बस नीम बेहोशी वाली हालत हो। यानी ऐसी कि वो ना सो रहा है और ना जाग रहा है। ना वो होश में है और ना बेहोश। कहते हैं कि ऐसी हालत में इंसान अक्सर सच बोलता है। और इसी हालत में अब आरोपी से सवाल पूछे जाते हैं। वो सवाल जो उस केस से और उस आरोपी से जुडे हैं। आरोपी से पूछे जानेवाले सवाल केस के जांच अफसर और मनोवैज्ञानिक की एक टीम मिल कर तैयार करती है।

Aftab Amin Poonawalla confession
Aftab Amin Poonawalla confession

Shraddha Murder Case: यहां ये भी जान लीजिए कि नार्को टेस्ट की रिपोर्ट अदालत में कतई मान्य नहीं है। पुलिस भी ये बात अच्छी तरह जानती है। इसके बावजूद आरोपियों का नार्को टेस्ट इसलिए कराया जाता है, ताकि उसके दिमाग से उगले राज के जरिए केस से जुडे सबूतों तक पहुंचा जा सके। मसलन, आफताब और श्रद्धा केस में पुलिस को इस वक्त जो सबसे जरूरी सुराग और सबूत चाहिेए, वो श्रद्धा की लाश, लाश के टुकडे या फिर वो आरी है, जिससे लाश के टुकडे किए गए।

अगर नार्को टेस्ट के दौरान आफताब उन जगहों के बारे में सच बोल गया, जहां जहां उसने इन सबूतों को ठिकाने लगाया है, तो समझ लीजिए नार्को टेस्ट कामयाब। पर अगर वो नार्को टेस्ट में भी पुलिस को उलझा गया तो फिर केस वहीं खडा नजर जाएगा, जहां पिछले नौ दिनों से है। आपकी जानकारी के लिए ये बता दूं कि जरूरी नहीं है कि नार्को टेस्ट के दौरान आरोपी या उसके दिमाग ने हमेशा सच ही बोला हो। तेलगी से लेकर अबु सलेम और यहां तक कि आरुषि केस में भी नार्को टेस्ट नाकाम ही साबित रहा था।

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