फूलन देवी की हत्या करने वाले शेर सिंह राणा की वो असली कहानी जिस पर अब बन रही है फिल्म

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Phoolan Devi Murder Accused Sher Singh Rana Story : फूलन देवी की कहानी. इस कहानी से आप वाकिफ होंगे. ये भी जानते होंगे कि फूलन देवी ने 22 ठाकुरों को एक लाइन में खड़ा कराकर गोली मार दी थी. जिसका बदला लिया था शेर सिंह राणा ने. वही शेर सिंह राणा जिस पर फिल्म आ रही है.

शेर सिंह राणा वही जो आया था तो फूलन देवी की पार्टी एकलव्य सेना में शामिल होने. तारीख थी 25 जुलाई 2001. जगह थी दिल्ली. जहां बीहड़ से संसद का सफर करने वाली फूलन रहती थी. पार्टी में शामिल होने के बहाने शेर सिंह राणा आया था. फूलन ने बाकायदा स्वागत किया. खुद ही खीर बनाई थी.

उस खीर को प्रसाद के तौर पर शेर सिंह को खिलाया भी. इसके बाद शेर सिंह राणा घर से निकल गया था. घर से जाने के कुछ देर बाद दोपहर करीब डेढ़ बजे फिर लौटा. लेकिन अकेले नहीं. कुल तीन लोग थे. तीनों के चेहरे पर नकाबपोश था. और फूलन देवी दिल्ली वाले उसी बंगले के गेट पर खड़ी थी. लेकिन क्या पता था कि वो मौत का इंतजार कर रही हैं.

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Sher Singh Rana Biography in Hindi : तीनों नकाबपोश आते हैं और ताबड़तोड़ फायरिंग करते हैं. फिर तीनों वहां से मारुति-800 में सवार होकर चले जाते हैं. बैंडिट क्वीन रहीं फूलन देवी को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया जाता है. इस उम्मीद में शायद जान बच जाए. लेकिन उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.

दो दिन बाद अचानक शेर सिंह राणा सामने आता. फिर खुद को पुलिस के सामने सरेंडर करता है. अपना जुर्म कबूल करता है. ये सवाल पूछा जाता है कि आखिर उसने फूलन को क्यों मारा. जवाब मिलता है कि उसने बेहमई में ठाकुरों को मारा था. उसी का बदला है ये.

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अगर कहानी इतनी ही होती तो शायद इस पर फिल्म ना बनती. और एक्टर विद्युत जामवाल शेर सिंह की भूमिका में ना होते. लेकिन शेर सिंह राणा की कहानी इसके बाद ही शुरू होती है. लेकिन पहले ये जान लेते हैं कि शेर सिंह का जन्म (Sher Singh Rana Birth) 17 मई 1976 को उत्तराखंड के रुड़की में हुआ था. बचपन में शेर सिंह राणा का नाम पंकज सिंह राणा था. लेकिन बाद में उसने शेर सिंह राणा कर लिया. शेर सिंह के परिवार में एक भाई, माता-पिता और पत्नी हैं.

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तिहाड़ जेल से शेर सिंह राणा के फरार होने की पूरी फिल्मी कहानी

Sher Singh Rana Story : अब बताते हैं कि फूलन देवी की हत्या के बाद शेर सिंह राणा के साथ क्या हुआ. दरअसल, हत्या के दो दिनों बाद शेर सिंह ने देहरादून पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था. इसके बाद शेर सिंह राणा को दिल्ली के तिहाड़ जेल में लाया जाता है. वही तिहाड़ जिसमें देश के बड़े नामी क्रिमिनल. लेकिन शेर सिंह सिर्फ 3 साल तक उस जेल में रहता है. फिर फरार हो जाता है.

Sher Singh Rana Tihar Jail Story : तिहाड़ जेल से फरार होने की तारीख थी 17 फरवरी 2004. शेर सिंह राणा के जेल से फरार होने की कहानी भी पूरी फिल्मी है. इसे जानकर बड़े से बड़े क्रिमिनल का भी दिमाग चकरा जाएगा. दरअसल, जेल से भागने में नकली पुलिस से लेकर नकली वकील की कहानी है.

असल में फूलन देवी (Phoolan Devi Kahani) केस में शेर सिंह को पता था कि उसे फांसी की सजा होगी. ऐसे में उसकी जिंदगी जेल में ही कटेगी. इसलिए उसने ये प्लानिंग करनी शुरू कर दी कि जब उसे हरिद्वार के कोर्ट में पेशी के लिए दिल्ली से ले जाने की तैयारी होगी तभी वो जेल से भागेगा. लेकिन तिहाड़ जेल से भागना इतना आसान तो था नहीं.

ऐसा भी नहीं था कि फिल्मों की तरह सुरंग बनाकर भाग जाता. इसलिए जेल में रह चुके और सभी नियम कायदों को जानने वाले एक गैंगस्टर संदीप ठाकुर से मिलकर साजिश रची. साजिश के तहत ही संदीप वकील बनकर शेर सिंह से मिलने जेल आने लगा.

इसके बाद 17 फरवरी 2004 को पूरी योजना के तहत संदीप पुलिस की खाकी वर्दी पहनकर सुबह 7 बजे ही जेल पहुंचा. उस समय वो नकली वॉरंट लेकर आया था. इसे जेल अधिकारियों को दिखाया और बाकायदा एक फॉर्म भरा.

फिर उसी वॉरंट के जरिए ये बताया कि उसे जेल से बाहर कोर्ट में ले जाना है. इसके लिए उसने बाकायदा नियमों के अनुसार कैदी के खाने के खर्चा के तौर पर 40 रुपये भी तिहाड़ प्रशासन से लिए. इसके बाद शेर सिंह राणा को हथकड़ी लगाई और जेल से बाहर निकालकर एक ऑटो में बैठाया और दिल्ली के कश्मीरी गेट पहुंचे. यहां से बस पकड़कर सीधे गाजियाबाद और फिर मुरादाबाद पहुंच गया.

यहां के एक होटल में पहुंचा. वहां किसी तरह से अपने रिश्तेदारों से संपर्क किया. उनसे एक लाख रुपये मंगाए. फिर रांची पहुंच गया. यहां से विदेश भागने की प्लानिंग थी. 2 महीने तक उसी चक्कर में भटकता है.

कभी वीजा के लिए तो कभी दूसरे काम के लिए. लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ तो चुपके से जुगाड़ लगाकर दिल्ली पुलिस के एक ACP के नाम का फर्जी पासपोर्ट बनाया. इसके बाद कोलकाता से होते हुए बांग्लादेश चला गया. यहां रहते हुए वो वीजा बनवाकर दूसरे देश में भी घूमने लगा.

बांग्लादेश में ही उसने करीब साढ़े 16 हजार रुपये खर्च करके एक सैटेलाइट फोन खरीदता है. ऐसा इसलिए क्योंकि उस सैटेलाइट फोन से वो ट्रेस नहीं हो सके.

शेर सिंह राणा ने विलेन से ऐसे बनाई हीरो की इमेज

Sher Singh Rana ki kahani hindi me : अब यहीं से शेर सिंह राणा अपनी इमेज को एक कातिल से बदलने की कोशिश में जुट जाता है. क्योंकि वो दावा करता है कि तिहाड़ जेल में रहते हुए कहीं पढ़ा था कि पृथ्वी राज चौहान की समाधि अफगानिस्तान में है. और वहां पर उनका कोई सम्मान नहीं है. बल्कि अपमानित किया जाता है. इसलिए उसने उनकी अस्थियों को भारत लाने की सोच बना डाली.

उसी सपने को पूरा करने के लिए शेर सिंह बांग्लादेश से निकलकर दुबई और फिर अफगानिस्तान पहुंच गया. यहां से वो गजनी पहुंचा. फिर वहां से 11वीं शताब्दी के सम्राट पृथ्वीराज चौहान की अस्थियां को अपने पास लेता है. और फिर भारत लौटता है. इस काम को पूरी दुनिया के सामने लाने के लिए उसने बाकयदा 33 मिनट का एक वीडियो भी बनाता है. उस वीडियो को यू-ट्यूब पर अपलोड भी किया.

Sher Singh Rana Afghanistan Prithvi Singh Chauhan Real Video :

sher singh rana afghanistan video : इस वीडियो में दिखाया गया है कि पृथ्वी राज चौहान की समाधि से अस्थियां और उनके जूते को लाने की बात कर रहा है. इस वीडियो में शेर सिंह राणा ने समाधि स्थल से अस्थियां निकालते हुए भी दिखाया है.

इसके साथ वादा भी किया है कि वो पृथ्वी राज चौहान की मिट्टी को लेकर भारत लेकर आएगा. इसके साथ ही वीडियो में पूरी कहानी भी दिखाता है. इस वीडियो को आप भी देख सकते हैं. ये सबकुछ वो तिहाड़ जेल से फरार होने के अगले 2 साल के दौरान करता है.

अफगानिस्तान से लौटने के बाद 2006 में ऐसे अरेस्ट हुआ था शेर सिंह राणा

Phoolan Devi Killer Sher Singh Rana ki puri kahani : अब अफगानिस्तान से पृथ्वी राज चौहान की अस्थियां लेकर पहले बांग्लादेश आता है. यहां से फिर वो कोलकाता आता जाता रहता था. क्योंकि उसे वीजा को रिन्यू कराने की जरूरत होती थी.

उसी दौरान कोलकाता से ही शेर सिंह राणा को साल 2006 में कोलकाता के एक गेस्ट हाउस से अरेस्ट कर लिया जाता है. फिर से उसे दिल्ली लाया जाता है. गिरफ्तारी के बाद उसने पुलिस को 2 साल तक काटी फरारी की कहानी सुनाता है.

वो बताता है कि वो फरार नहीं हुआ था बल्कि पृथ्वीराज चौहान की समाधि से मिट्टी लाने के लिए अफगानिस्तान गया था. वहां पर पृथ्वीराज सिंह चौहान की समाधि की खुदाई कराकर मिट्टी ली थी और उसे लेकर भारत में आया और इटावा भेज दिया था. अब गिरफ्तारी के बाद कोर्ट में मुकदमा चलता है.

14 अगस्त 2014 को शेर सिंह राणा को हुई थी उम्रकैद की सजा

Sher Singh Rana Up Election : इसी बीच जब उसके अफगानिस्तान की चर्चा होती है तो जेल से ही शेर सिंह राणा ने साल 2012 में यूपी चुनाव का पर्चा भर दिया था. वो चुनाव भी लड़ा. लेकिन हार गया था. इस दौरान शेर सिंह को फूलन देवी की हत्या के मामले में 14 अगस्त 2014 को उम्रकैद और 1 लाख जुर्माने की सजा सुनाई गई.

लेकिन इस बीच उसकी इमेज पृथ्वी राज चौहान की अस्थियां और मिट्टी भारत लाने की वजह से हीरो वाली भी बन रही थी. एक तबका विरोध करता तो दूसरा हीरो मानता. साल 2016 में मामला हाई कोर्ट पहुंचा और शेर सिंह राणा को अंतरिम जमानत मिल गई.

अब जेल से आ के बाद पब्लिक में उसकी इमेज फूलन देवी की हत्यारे से कहीं ज्यादा महान सम्राट पृथ्वीराज चौहान की अस्थियां दूसरे देश से भारत लाने की चर्चा होती है. ये कहा जाता है कि शेर सिंह राणा ने कैसे अपनी जान को खतरे में डालकर ये काम किया. खासकर राजपूत समाज में उसका नाम बेहद ही आदर से लिया जाने लगा. सोशल मीडिया पर उसके वीडियो को देखकर लोगों ने असली हीरो भी बताना शुरू कर दिया.

जेल से आने के बाद शेर सिंह राणा ने अपनी मां की मदद से यूपी के गाजियाबाद के पिलखुआ में पृथ्वीराज चौहान का मंदिर बनवाया. इस मंदिर में आज भी पृथ्वी राज चौहान की अस्थियां रखीं हैं.

दहेज के 10 करोड़ ठुकराकर फिर से चर्चा में आया था

Sher Singh Rana Marriage : शेर सिंह राणा की कहानी यहीं पर खत्म नहीं होती है. जेल से आने के बाद उसकी छवि लगातार बढ़ती ही रही. अब तो मध्य प्रदेश के पूर्व विधायक राणा प्रताप सिंह ने अपनी बेटी प्रतिमा राणा की शेर सिंह से शादी तय कर दी.

20 फरवरी 2018 को दिल्ली के एक आलीशान होटल में दोनों की शादी हुई. उस समय दहेज के तौर पर शेर सिंह राणा को सबके सामने 10 करोड़ 31 लाख रुपये का दहेज दिया जा रहा था. लेकिन शेर सिंह ने उसे ठुकरा दिया था.

इसके बाद उसने शादी की रस्म के लिए चांदी का एक सिक्का लिया और कहा था कि यही हमारे लिए दहेज है. जेल में बिताए दिनों को लेकर शेर सिंह राणा ने एक किताब भी लिखी है. उसमें जेल से भागने की पूरी कहानी है. और फूलन देवी को मारने की वजह का भी जिक्र किया है.

फूलन देवी : उस रात 1 सेकेंड के लिए ना सोई, ना कुछ खाई, एक आवाज़ सुन निकल आए थे आंसू

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