पंजाब की जेल तोड़़कर कनाडा भागे इस कैदी ने उड़ाई भारत सरकार की नींद : EXCLUSIVE

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अपनी एके 47 राइफल के साथ पंजाब की जेल से फरार हुआ कैदी जगमनदीप सिंह
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Story Of Jagmandeep Singh Absconding : जगमनदीप सिंह उर्फ जुगनू। ये नाम इस समय हिन्दुस्तान की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नया सिरदर्द बना हुआ है। क्योंकि जगमनदीप सिंह उर्फ जुगनू के एक वीडियो ने इस वक्त भारत में सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा रखी है और साथ ही साथ सियासी गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। केंद्रीय मंत्री के घर पर केंद्रीय मंत्री के बेटे के साथ अपने कथित वीडियो को लेकर सुर्खियों में आ गए जगमनदीप सिंह का एक ऐसा सच भी सामने आया है जिसके खुलासे ने हिन्दुस्तान की पुलिस और पुलिस में फैले भ्रष्टाचार को नए सिरे से सामने ला खड़ा किया है। 

कनाडा का रहने वाला जगमनदीप सिंह जो पंजाब के फरीदकोट जेल से हुआ था फरार

फिल्मी अंदाज में हुआ फरार

खुलासा ये है कि जगमनदीप सिंह 1 फरवरी 2022 को पंजाब की फरीदकोट जेल से बड़े ही फिल्मी अंदाज से फरार हो गया और पूरे 65 दिन तक हिन्दुस्तान के अलग अलग शहरों से होता हुआ नेपाल के रास्ते कनाडा फरार होने में कामयाब हो गया था। 

जेल तोड़कर भागने की एकदम फिल्मी कहानी

जगमनदीप सिंह की फरारी का ये किस्सा जितना हैरतअंगेज है उससे कहीं ज्यादा चौंकाने वाला, और इससे भी ज़्यादा बड़ी बात ये है कि जिस तरह से जगमनदीप उर्फ जुगनू फरीदाबाद की जेल तोड़कर भागा उसने तमाम सुरक्षा बंदोबस्त की भी पोल खोलकर रख दी है। 

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किस्से की शुरुआत होती है 11 मार्च 2021 से

क्राइम तक को मिली जानकारी और मिले दस्तावेजों के मुताबिक जगमनदीप सिंह के जेल से फरार होने का ये किस्सा किसी फिल्मी कहानी से कम नही है। असल में इस किस्से की शुरुआत होती है 11 मार्च 2021 से। यही वो दिन था जब जगमनदीप सिंह उर्फ जुगनू अपने निजी काम के सिलसिले में हिन्दुस्तान पहुँचा था। जगमनदीप सिंह कनाडा के वेंकुवर से वो सीधा अमृतसर पहुँचा था। लेकिन जगमनदीप सिंह को एयरपोर्ट पर ही उतरते ही पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया था। उसके खिलाफ इल्जाम ये था कि कनाडा के वर्किंग वीजा का झांसा देकर उसने एजेंसियों के साथ मिलकर कई बेरोजगारों को जमकर चूना लगाया है। 

वो एफआईआर जो जगमनदीप सिंह के फरार होने के बाद गुरुगोविंद सिंह मेडिकल कॉलेज के गार्ड्स और वॉर्डन के खिलाफ दर्ज हुई थी

वर्क वीजा की आड़ में ठगी का खेल

हालांकि जगमनदीप सिंह ने पुलिसवालों को दलील दी कि ऐसा उसने खुद नहीं किया बल्कि उसने जिन कंपनियों को अपने लाइसेंस का इस्तेमाल करके कामगारों को भर्ती करने का ठेका दिया था उन कंपनियों ने लोगों से कई कई लाख रुपये वसूले और फरार हो गए। चूंकि कनाडा सरकार का भर्ती का ठेका उसके नाम पर है इसलिए भारत में ठगी का शिकार हुए लोगों ने एजेंसियों के खिलाफ लिखवाई एफआईआर में उसका नाम भी दर्ज करवा दिया है। जिसकी जानकारी उसे भी तभी हुई जब पुलिस ने गिरफ्तार करके उसे इन आरोपों की जानकारी दी। 

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जेल का NRI

लेकिन पुलिस ने उसकी दलील नहीं सुनी और उसे उठाकर फरीदकोट जेल में भेज दिया। जेल में जगमनदीप सिंह एक एनआरआई की हैसियत के बावजूद एक विचाराधीन के तौर पर बंद हो गया। जमगनदीप उर्फ जुगनू को अफीम खाने की लत थी। लिहाजा उसने जेल में नींद न आने और अपनी तलब के बारे में जुगनू ने जेल के वॉर्डन और जेल के अधिकारियों को बताया। 

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फरीदकोट जेल में कैदियों के संग बैठा जगमनदीप सिंह (लाल कुर्ते में)

कैदी ही लगाते हैं जेल में इंजेक्शन

तब जुगनू की तलब दूर करने और नींद का टीका यानी इंजेक्शन लगाने का जिम्मा फरीदकोट जेल के भीतर दूसरे नशेड़ियों को इंजेक्शन लगाने वाले दूसरे कैदियों को ये हुक्म दे दिया गया। ऊपर से आदेश हो गया कि जो कैदी दूसरे नशेड़ी कैदियों को इंजेक्शन लगाते हैं वो जगमनदीप सिंह को भी नींद का इंजेक्शन लगाएंगे। 

इंजेक्शन से हुआ इनफेक्शन

इसी बीच एक रोज जेल में जब जुगनू की हिप पर इंजेक्शन लगाया गया तो वो गलत लग गया जिससे उसकी हिप में इन्फेक्शन फैलना शुरू हो गया। इसी दौरान अपने एनआरआई की हैसियत से अपनी जान पहचान बढ़ाते हुए पंजाब पुलिस के एक डीआईजी रैंक के अफसर के साथ अपनी पहुँच बना ली थी, जिसकी वजह से जुगनू को न सिर्फ जेल में तमाम सुविधाएं मिलने लगी बल्कि उसे दूसरे कैदियों से बचाकर रखने और उसे पैसों के बदले सुविधा देने में जेल प्रशासन काफी दिलचस्पी लेने लगा। 

पुलिस के बड़े अफसरों को उतारा शीशे में

इसी बीच जब जुगनू के हिप का इंफेक्शन काफी बढ़ गया और उसका चलना फिरना तक मुहाल हो गया तो उसने अपनी तकलीफ उस समय के जेल प्रशासन के साथ साथ अपनी जान पहचान के पुलिस अफसरों तक पहुँचाई। इस बीच करीब 9 महीने से ज़्यादा जुगनू जेल में विचाराधीन के तौर पर बिता चुका था और जेल में रहते हुए वहां के तमाम दांव पेच भी सीख लिए थे।  जगमनदीप सिंह की तकलीफ को सुनने के बाद पुलिस अफसर और जेल के अधिकारियों ने बाकायदा एक ऑर्डर पास करके जुगनू को इलाज की खातिर फरीदकोट के ही गुरु गोविंद सिंह मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने का रास्ता साफ कर दिया। 

जगमनदीप सिंह को पता था कि पैसा फेंककर वो गार्डों को शीशे में उतार सकता है और अपना उल्लू सीधा कर सकता है

पहरेदारों का जीता भरोसा

हालांकि मेडिकल ग्राउंड पर जेल से मेडिकल कॉलेज पहुँचे जगमनदीप सिंह ने अब बड़े ही शातिर तरीके से अस्पताल में उसकी पहरेदारी में मौजूद गार्ड्स के साथ न सिर्फ दोस्ती की बल्कि उनका भरोसा भी जीतना शुरू कर दिया। 

पहरेदारों ने सौंप दी चाबी

जगमनदीप सिंह के मुताबिक जब उसे मेडिकल कॉलेज में सेल में रखा गया था तो उसने अपनी नई रणनीति के हिसाब से रात में कई कई बार वहां के पहरेदारों को सेल से बाहर निकलकर बाथरूम जाने का बहाना बनाने लगा। दो चार दिन तो पहरेदारों ने उसकी हर गुहार पर उसे सेल से निकालकर बाथरूम तक ले जाने लगे लेकिन तीन दिन के बाद पहरेदारों ने खुद सेल की चाबी जुगनू को इस भरोसे पर दे दी कि वो जिस हाल में है न तो वो कहीं जा नहीं सकेगा और उसने भरोसा भी कुछइसी अंदाज से जीता था कि गार्ड ने आंख बंद करके उस पर भरोसा कर लिया था और उसे सेल की चाबी पकड़ा दी। ये जुगनू की चाल की पहली कामयाबी थी। 

एंबुलेंस से अस्पताल से हुआ फरार

1 फरवरी की दोपहर करीब साढ़े 12 बजे जुगनू ने बड़े ही शातिर अंदाज में अस्पताल के एंबुलेंस वाले को पटाया और चंडीगढ़ के पीजीआई जाने के लिए उसे मना लिया। और दोपहर में सारे गार्ड की आंख में धूल झोंकता हुआ वो सीधे एंबुलेंस से उसी रात चंडीगढ़ के पीजीआई में उतर गया। सवा दो सौ किलोमीटर का रास्ता एंबुलेंस से जगमनदीप सिंह ने इसलिए तय किया ताकि रास्ते में उसे पंजाब पुलिस का सामना न करना पड़े और रास्ते में कोई भी उसके रास्ते में रुकावट पैदा न करे। क्योंकि अगर वो यहां पकड़ा गया तो फिर जेल में वो लंबा अंदर हो जाएगा और उसके खिलाफ पहरा भी सख्त हो जाएगा। लिहाजा जुगनू किसी भी सूरत में कानून के सिपाहियों के हाथ आने से बचने के लिए फरीदकोट से चंडीगढ़ जाने का रास्ता भीतर ही भीतर लिया था। 

चंडीगढ़ पीजीआई से पकड़ी टैक्सी

चंडीगढ़ पीजीआई रात करीब 7 साढ़े सात बजे पहुँचने के बाद जगमनदीप सिंह ने पहले तो एंबुलेंस से वहां से जाने का इंतजार किया और फिर एक टैक्सी ली, और टैक्सी पर सवार हो कर जुगनू सीधे चंडीगढ़ से आधी रात के बाद दिल्ली पहुँचा। 

जेल से भागकर पहुँचा केंद्रीय मंत्री के घर!

कनाडा से टेलीफोन पर बातचीत करते हुए जगमनदीप सिंह ने खुद बताया कि उस रात वो दिल्ली में कहीं और जाने के बजाए सीधे केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के सरकारी बंगले 3 कृष्णा मैनन मार्ग पहुँचा था। जगमनदीप सिंह के मुताबिक चंडीगढ़ से दिल्ली पहुँचने का मकसद ही यही था कि वो वहां उन लोगों से मुलाकात करे जिनसे मिलने के लिए वो कनाडा से हिन्दुस्तान आया था। वहां उसकी मुलाकात केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे और उनकी बहू से मुलाकात की। और फिर वो कुछ दिन वहीं रुका भी। 

जगमनदीप सिंह का वो ETD जिसके सहारे वो नेपाल से होकर दोहा के रास्ते कनाडा पहुँचा

लुकआउट नोटिस से बचने का निकाला रास्ता

अब जुगनू जेल से बाहर आ चुका था। जेल में रहने के दौरान ही जुगनू ने एक और बात पता कर ली थी कि अगर कोई कैदी जेल से फरार हो भी जाता है तो उसके लिए हिन्दुस्तान के किस किस एयरपोर्ट पर आमतौर पर LO यानी लुकआउट नोटिस जारी हो जाता है। उसे मालूम पड़ चुका था कि दिल्ली, अमृतसर के अलावा, अहमदाबाद, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरू के हवाई अड्डे पर लुकआउट नोटिस पहुँच जाता है। लिहाजा उसने इन शहरों के बजाए उन हवाई अड्डों का रुख किया जहां उसके खिलाफ पुलिस का लुकआउट नोटिस होने की गुंजाइश नहीं थी। 

न पासपोर्ट न वीजा

जुगनू जेल से तो बाहर था लेकिन न तो उसके पास उसका पासपोर्ट था और न ही वीजा। तब वो किसी जुगाड़ के जरिए बेंगलूरू में कनाडा काउंसुलेट पहुँचा लेकिन वहां उसे पता चला कि जब तक उसके पास बेल ऑर्डर नहीं होगा उसे अस्थायी वीजा और पासपोर्ट नहीं मिल सकता। 

65 दिनों में 60 शहरों की खाक छानी

समस्या उसके सामने थी और इस समस्या को दूर करने के लिए जगमनदीप सिंह अब हिन्दुस्तान भर में एक शहर से दूसरे शहर से होता हुआ 65 दिनों तक करीब करीब 60 शहरों की खाक छान चुका था। अलग अलग शहरों में ये एनआरआई ट्रक मालिक का वेश बनाकर हिन्दुस्तान के करीब करीब दो चक्कर लगाए। और आखिर में उसे बिहार में पटना साहिब से नेपाल तक जाने का रास्ता नज़र आया। वो बिहार से अपने पैसों के दम पर बॉर्डर पर खड़े पहरियों की जेब को नीले और हरे नोटों से भरता हुआ बिहार के बेरगानिया इलाके से नेपाल में दाखिल हो गया और फिर वहां से करीब साढ़े चार घंटे की बस यात्रा से सीधे काठमांडो पहुँच गया। 

जगमनदीप सिंह को ट्रेवल परमिट जिसके सहारे उसने नेपाल से कनाडा एंबेसी में कनाडा जाने के लिए अपना टिकट और वीजा का इंतजाम किया

काठमांडो से  कनाडा वाया दोहा

काठमांडो में उसने एक होटल स्टाफ की मदद से कनाडा दूतावास से संपर्क किया और वहां से उसने अपनी परेशानियों को बताकर कनाडा दूतावास से दो दिन का इमरजेंसी ट्रेवलिंग डॉक्यूमेंट यानी ETD हासिल कर लिया। इसके जरिए उसे दोहा के रास्ते कनाडा पहुँचने का टिकट का इंतजाम करने में सहूलियत हो गई। बस फिर उसने इन्हीं दो दिनों में कतर के दोहा के रास्ते से सीदे मॉंट्रियल का टिकट कटवाया और 5 अप्रैल 2022 को हिन्दुस्तान से करीब 12 हजार किलोमीटर दूर अपने महफूज ठिकाने तक जा पहुँचा। 

कनाडा में गांजे और भांग की खेती

सबसे दिलचस्प ये है कि जगमनदीप सिंह ने पुलिस को बता भी रखा था कि वो कनाडा में गांजे और भांग की खेती करता है और भारत से कई मजदूरों को अपने यहां नौकरी भी दिलाता रहा है। लेकिन जगमनदीप सिंह ने बातचीत में ये भी खुलासा किया है कि जेल प्रशासन किस तरह आकंठ भ्रष्टाचार की नदीं में डुबकियां लगा रहा है जिसकी वजह से उसे वहां से निकलकर भागने और भारत की सुरक्षा एजेंसियों की नाक के नीचे से निकलने का रास्ता मिल जाता है। 

NOTE- EXCLUSIVE STORY EPISODE ONE (Jagmandeep Singh का ये पहला पार्ट है, जल्दी ही दूसरी स्टोरी सामने आएगी)

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