कैसी होती है मौत की छटपटाहट, कैसे निकलती है जान, कत्ल का मज़ा लेने के लिए किया कत्ल, चौंका देगी जूनियर साइको किलर्स की कहानी

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जांच में जुटी पुलिस
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Bihar Crime News: क्राइम की इस खौफनाक कहानी के जरिए हम बच्चों से जुड़ी एक ऐसी कड़वी हकीकत पेश करने जा रहे हैं जिसे पढ़ने के बाद आप चौंक जाएंगे। बच्चे हमारी आबादी का करीब 48 फीसदी हिस्सा हैं। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में क़लम होनी चाहिए उन हाथों मे बंदूकें हैं। जिन हाथों में किताबें होनी चाहिए वो हाथ ख़ून की स्याही से गुनाहों के पन्ने भर रहे हैं।

जुर्म के खतरनाक जूनियर

बच्चों के जुर्म की ताज़ा और दिल को दहला देने वाली कहानी बिहार के मधुबनी से सामने आई है। कत्ल की ये वो कहानी है कि जिसे बिहार के तीन नाबालिगों ने अंजाम दिया। कत्ल के केस में जो खुलासा हुआ उसने सभी को चौंका के रख दिया। बिहार के मधुबनी जिले में 14 फरवरी की सुबह नरुआर फ्लाईओवर के नीचे पुलिस को एक लाश मिली। एनएच-57 पर खून से लथपथ लाश का मौका मुआयना कर पुलिस अफसरों ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।

पुल के नीचे मिली खून से लथपथ लाश

पुलिस के सामने सबसे पहली चुनौती थी कि शव की शिनाख्त की जाए। जाहिर है शव की शिनाख्त होगी तभी कातिलों तक पहुंचा जा सकता है। शव की शिनाख्त के बाद पुलिस को कातिलों तक जाना था लिहाजा मधुबनी पुलिस अधीक्षक ने डीएसपी अशोक कुमार के नेतृत्व में एक टीम बनाई। पुलिस को शव की तस्वीरों को सोशल मीडिया पर शेयर किया। अगले ही दिन कुछ लोगों ने पुलिस से संपर्क किया और शव की शिनाख्त की। शव की पहचान भैरव स्थान थाना इलाके के रहने वाले कथना मोहनपुर गांव देवेंद्र यादव उर्फ देबू के तौर पर हुई। देबू पेशे से ड्राइवर था जो प्रमोद कामत की स्कॉर्पियो चलाता था।

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नाबालिगों ने बुक की थी स्कॉर्पियो

पुलिस ने प्रमोद कामत से संपर्क किया तो पता चला कि 14 फरवरी को स्कॉर्पियो की भाड़े पर बुकिंग की गई थी। सवारियों को राजनगर से भैरवस्थान जाना था। 13 घंटे की लगातार मशक्कत के बाद पुलिस ने जो खुलासा किया वो हौलनाक था। झंझारपुर एसडीपीओ अशोक कुमार ने बताया कि स्कॉर्पियो की बुकिंग 16 वर्षीय किशोर ने अपनी बहन को ससुराल से लाने के लिए की थी। नाबालिग ने चालक देबू को अपने घर राजनगर थाना क्षेत्र के अलीचक बुलाया था। इसके बाद कार में तीन नाबालिग सवार हुए। 

गले में घोंप दी कील

तीनों ने ड्राइवर को मधेपुर की तरफ चलने को कहा। रास्ते में एनएच-57 पर नरुआर कट के पास पेशाब करने के लिए स्कार्पियो रुकवाई। जैसे ही कार रुकी। पीछे सीट पर बैठे एक नाबालिग ने चालक की गर्दन को रस्सी से जकड़ दिया। दूसरे नाबालिग ने दूसरी तरफ से रस्सी खींची। तीसरे नाबालिग ने एक बड़ा सूजा ड्राइवर की गर्दन में घुसा दिया। करीब 5 मिनट तक छटपटाने के बाद देबू ने दम तोड़ दिया। तीनों देबू को तड़पता हुए देखते रहे। देबू के कत्ल के बाद तीनो नाबालिग ने उसके शव को ड्राइविंग सीट से खींचकर पैलियन सीट पर रख दिया और स्कार्पियो भैरवस्थान की तरफ दौड़ा दी। 

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मरने से पहले इंसान को तड़पता हुआ देखने के लिए मर्डर

यहां तीनों ने नरुआर ब्रिज के नीचे देबू का शव फेंक दिया और फरार हो गए। पुलिस ने तीनों नाबालिगों को हिरासत में ले लिया और अलीचक गांव से स्कॉर्पियो भी बरामद कर ली है। पुलिस ने जांच में खुलासा किया है कि तीनों नाबालिगों ने मरने से पहले इंसान को तड़पता हुआ देखने के लिए मर्डर किया है। पुलिस को ये भी बताया कि जब ड्राइवर की जान निकल रही थी तब तीनों नाबालिग जोर-जोर से हंस रहे थे। तीनों ने बताया कि ड्राइवर से उनकी कोई दुश्मनी नहीं थी। हिरासत में लिए गए नाबालिगों ने पुलिस को बताया कि इंटरनेट पर क्राइम शो देखकर इस घटना को अंजाम देने का प्लान बनाया था। पुलिस ने तीनों को कोर्ट में पेश करने के बाद बाल सुधार गृह भेज दिया है।

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अपने बच्चों पर नज़र रखिए

क्राइम तक की आपसे अपील है कि अपने बच्चों पर नज़र रखिए। बच्चों के दोस्तों को जानिए। जेबखर्च का हिसाब किताब रखिए। स्कूल में अटेंडेंस चेक कीजिए। आपका बच्चा कहां जाता है। किससे मिलता हैं और कितनी देर घर से बाहर रहता हैं। उसकी हर ख़बर रखिए। ये हिदायत नहीं बल्कि एक चेतावनी है और ये चेतावनी हम नहीं बल्कि खुद पुलिस भी देती है। क्राइम के आंकड़े गवाह हैं कि देश के बच्चों के क़दम बड़ी तेजी से जुर्म की काली दुनिया की ओर  बढ़ रहे हैं। जिन हाथों में क़लम होनी चाहिए वो नन्हे हाथ कट्टे, बम और चाकू थामने को बेकरार हो रहे हैं। 

बच्चों के दोस्तों को जानिए

10 से 16 साल तक के मासूम बच्चे लूट, क़त्ल, झपटमारी, चोरी, जेबतराशी और बलात्कार जैसी संगीन वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। आप ये जानकार और भी हैरान रह जाएंगे कि इन बच्चों में लड़कियों की भी एक बड़ी जमात शामिल है जो क्राइम की काली दुनिया में दस्तक दे चुकी हैं। सवाल ये है कि आखिर ये बच्चे तेजी से क्राइम की दुनिया का रुख क्यों कर रहे हैं? क्या इसके लिए मां-बाप जिम्मेदार हैं? स्कूल-कालेज जिम्मेदार हैं? या इस बदलते दौर में हम अपने बच्चों की जरुरतों को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं? जरायम के इस नए ट्रेंड में फिक्र की बात ये भी है कि बच्चों से क्राइम करवाने वाले कई गिरोह बाल कानून का फायदा उठा रहे हैं। 

गैंग भी करते हैं बच्चों का इस्तेमाल

ये गैंग बाकायदा संगठित तौर पर ड्रग्स तस्करी चोरी, जेबतराशी का काम बच्चो से करवाते हैं। ऐसे में अगर कोई बच्चा कहीं पकड़ा भी जाए तो असली मुल्जिम पुलिस की पकड़ में नही आता और बाल कानून के तहत बच्चा थोड़े वक्त बाद रिहा हो जाता है। आज के दौर में मंहगे कपड़े, कीमती गाड़ियों, छोटी उम्र में गर्लफ्रैंड के शौक बच्चों को जरायम की दुनिया में ढकेल रहे हैं। ऐसे में बच्चों के मां-बाप ये जिम्मेदारी है कि वो अपने बच्चो का खास ख्याल रखें और ताकि उनका शौक एक अंधा जुनून में ना बन जाए। इस तेज़ भागती जिंदगी में जरुरत इस बात कि है कि मां बाप अपने बच्चों का हाथ थामें रहें और उनकी जरुरतों को ख्याल रखें। ताकि इन मासूमों को काली दुनिया के इस दलदल से महफूज़ रखा जा सके।

 

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