Uttarkashi Tunnel Collapse: 35 इंच चौड़े पाइप से बाहर निकाले जाएंगे 40 मजदूर, बढ़ते इंतजार से तेज होती धड़कन

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सिलक्यारा से डंडालगांव के बीच निर्माणाधीन सुरंग में राहत और बचाव कार्य हुआ तेज
सिलक्यारा से डंडालगांव के बीच निर्माणाधीन सुरंग में राहत और बचाव कार्य हुआ तेज
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Uttarkashi Tunnel Collapse: अब खबरदार करते हैं आपको उस खबर से जहां एक नहीं बल्कि कई राज्यों के कई परिवारों की सांसें थमी हुई हैं...धड़कन तेज है। खबर उत्तराखंड के उत्तरकाशी की है। जहां 12 नवंबर की सुबह 4 बजे एक निर्माणाधीन टनल धंस गई थी। 60 घंटे अब तक बीत चुके हैं। 40 मजदूर अंदर फंसे हुए हैं। 

टनल के भीतर फंसे मजदूरों का बाहर निकालने का मिशन

35 इंच चौड़ी स्टील पाइप भेजने की तैयारी

लगातार पाइप के जरिये ऑक्सीजन और खाना मजदूरों तक पहुंचाया जा रहा है।वॉकी टॉकी के जरिये सुरंग में फंसे मजदूरों से संपर्क किया गया। परिजनों से उनकी बातचीत कराने की कोशिश चल रही है मजदूरों तक खाना और ऑक्सीजन टनल में पानी के लिये बिछी पाइप लाइन के जरिये भेजा जा रहा है। अब 900 mm यानी करीब 35 इंच चौड़ी स्टील पाइप भेजने की तैयारी है ताकि सभी को बाहर निकाला जा सके। 

एसडीआरएफ और फिर NDRF कीटीमें लगीं 

सुरंग के हिस्से का ढहने के बाद इमरजेंसी राहत और बचाव का मिशन जारी है। ये हादसा दरअसल ब्रह्मखाल और यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिलक्यारा से डंडालगांव के बीच निर्माणाधीन सुरंग में हुआ। हादसे के बाद से ही एसडीआरएफ और फिर NDRF कीटीमें फंसे हुए मजदूरों को बचाने के काम में जुटी हुई हैं। लेकिन ये काम इतना आसान है भी नहीं क्योंकि हादसे वाली जगह पर मलबा हटाना और सुरंग का मुंह दोबारा खोलना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। सुरंग में फंसे लोगों को बचाने के लिए एक तय प्रक्रिया है...

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करीब 200 मीटर का फासला

उत्तरकाशी के पुलिस अफसर एसपी अर्पण यदुवंशी के मुताबिक कर्मचारी मलबा हटाने और सुरंग का मुंह खोलने के काम को तेजी से कर रहे हैं। असल में सुरंग के मुंह से वहां तक का हिस्सा जहां सुरंग ढही है वो फासला करीब 200 मीटर है। कहने को ये महज 200 मीटर है, मगर पहाड़ के भीतर सुरंग में उस 200 मीटर के हिस्से में पड़ा मलबा कई हजार टन है जिसे समेटकर हटाना किसी भी सूरत में आसान नहीं है। लिहाजा अंदर फंसे मजदूरों को सांस लेने के लिए हवा मिलती रहे इसके लिए एक ऑक्सीजन पाइप लाइन पहुँचाई गई है। ताकि सांस लेने में दिक्कत न हो। इतना ही नहीं पानी के पाइप के जरिए कंप्रेसर के सहारे पानी और फूड आइटम भी मजदूरों तक पहुँचाए जा रहे हैं। 

इस वक्त बचाव करने वाली टीम की जो प्राथमिकता है उसे सिलसिलेवाल तरीके से समझने की जरूरत है। 

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1)-सुरंग में हादसे की असली जगह का पता लगाना

2)- सुरंग में फंसे मजदूरों की सही सही पोजिशन का पता लगाना

3)- सुरंग में फंसे मजदूरों से वॉकी टॉकी के जरिए संपर्क बनाए रखना और दूसरे उपकरणों की मदद करना। 

4)- अंदर फंसे हुए मजदूरों तक ऑक्सीजन के साथ साथ पानी की सप्लाई को बनाए रखना

5)- अंदर मजदूरों तक मेडिकल हेल्प के साथ साथ खाने पीने की चीजों को भी पहुंचाना सुनिश्चित करना

6)- सुरंग के मुहाने पर इकट्ठा हुए मलबे को हटाना ताकि भीतर फंसे मजदूरों तक पहुँचा जा सके

7)- ड्रिलिंग मशीन और ड्रेजिंग मशीनों के जरिए मलबे को हटाने की कोशिश करना और खुदाई करने वाली मशीनों को सही पोजिशन में रखकर उस सुरंग के मुंह को खोलना

8)- ये भी सुनिश्चित करना है कि इस बचाव कार्य में किसी भी तरह की कोई बाधा उत्पन्न न हो

9)- मौसम से निपटने की पूरी तैयारी करना ताकि राहत और बचाव कार्य में किसी तरह की कोई रुकावट वैदा न हो

10)- सुरंग में फंसे लोगों तक पहुँचने के लिए एक समानांतर रास्ते को तैयार करना

एक्सपर्ट मानते हैं कि ये राहत और बचाव कार्य अगले दो दिनों तक यूं ही चल सकता है, क्योंकि सुरंग का मलबा हटाने में काफी समय लग रहा है। 

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दरअसल इस सुरंग में एक दो नहीं बल्कि 40 मजदूर फंसे हैं जो कई राज्यों से हैं। टनल में जिन राज्यों के मजदूर फंसे हैं उनमें बिहार के चार, उत्तराखंड के दो, बंगाल के तीन, यूपी के आठ, उड़ीसा के पांच झारखंड के 15 असम के दो और हिमाचल प्रदेश का एक मजदूर शामिल है। 

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