यूपी का डॉक्टर डेथ, दिल की धड़कनें चुराने वाला डॉक्टर, ये है 600 लोगों को जानलेवा ‘पेस मेकर’ लगाने वाले डॉ डेथ की पूरी कहानी

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जांच में जुटी पुलिस
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इटावा से अमित तिवारी के साथ सुप्रतिम बनर्जी की रिपोर्ट

UP Doctor Death Special: पेशे के तमाम ऊसूलों को ताक पर रख कर करीब छह सौ से ज़्यादा मरीजों के साथ जानलेवा धोखाधड़ी करने की ये कहानी उत्तर प्रदेश के इटावा ज़िले की है। उसी इटावा ज़िले की जो समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो रहे मुलायम सिंह यादव का गृहक्षेत्र है और इत्तेफ़ाक देखिए कि ये सबकुछ उसी इटावा के सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में हुआ है, जिसकी नींव कभी मुलायम सिंह यादव ने रखी थी। करीब छह साल तक चली जांच के बाद पुलिस ने अब जब इस मामले के आरोपी डॉक्टर समीर सर्राफ़ को गिरफ़्तार किया है। तो मरीजों के सीने में नकली पेसपेकर लगाने की ऐसी-ऐसी कहानियों का खुलासा हो रहा है कि जांच करने वाली पुलिस भी हैरान हैं।

छह सौ से ज़्यादा मरीजों के साथ जानलेवा धोखाधड़ी 

इंसान के दिल की धड़कनों को नियंत्रित करने वाला ये पेसमेकर आखिर काम कैसे करता है? असली और नकली पेसमेकर में क्या फ़र्क है? पेसमेकर लगाने के दौरान किन-किन बातों का ख़्याल रखना पड़ता है? इसमें कितना ख़र्च आता है? ऐसे तमाम सवालों के जवाब आज हम आपको वारदात में बताएंगे, लेकिन पहले ये जान लीजिए कि नकली पेसमेकर से मासूम मरीज़ों को धोखे की मौत देने वाले इस डॉक्टर की मॉडस ऑपरेंडी क्या थी और आख़िर एक जल्लाद डॉक्टर के इस ख़तरनाक खेल का ख़ुलासा कैसे हुआ?

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जल्लाद डॉक्टर के इस ख़तरनाक खेल का ख़ुलासा

असल में सैफई के कॉर्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में तैनात डॉक्टर समीर सर्राफ़ के पेसमेकर लगाए गए मरीजों के रह-रह कर बीमार होने, तरह-तरह की परेशानियों से घिरने और मारे जाने की शिकायतें साल 2017 से ही आ रही थीं। तब इटावा के नज़दीकी ज़िले मैनपुरी के कई मरीजों और उनके घरवालों ने इस सिलसिले में सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी से शिकायत भी की थी। कहते हैं कि तब इस मामले की जांच के लिए यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों की ही एक कमेटी भी बनाई गई थी, लेकिन इसके बाद बात आई गई हो गई दूसरे शब्दों में कहें तो तब ये बात दबा दी गई। लेकिन इसके अगले ही साल इस मामले में तब एक बड़ा ट्विस्ट आ गया, जब सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी के सीएमएस यानी चीफ मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉक्टर आदेश कुमार ने बाक़ायदा डॉक्टर सर्राफ़ के ख़िलाफ़ इलाज के साथ-साथ मेडिकल इक्विपमेंट की ख़रीद के मामले में भी भ्रष्टाचार का इल्ज़ाम लगाते हुए पुलिस ने नामज़द रिपोर्ट लिखवा दी। 

समीर सर्राफ़ के पेसमेकर वाले मरीजों की आफत

हद तो ये रही कि इसके बाद डॉक्टर समीर सर्राफ़ को दो साल के लिए सस्पेंड भी कर दिया गया, लेकिन उनके ख़िलाफ़ कोई भी असरदार कार्रवाई नहीं हुई। इस बीच वो प्राइवेट क्लिनिक में डॉक्टर समीर जैन के नाम से प्रैक्टिस भी करते रहे लेकिन फिर इस मामले की जांच सीओ यानी डीएसपी लेवल के एक ऑफिसर ने की। आख़िरकार 7 नवंबर को डॉक्टर समीर सर्राफ़ को मरीजों को धोखे से नकली पेसमेकर लगाने, जिससे उनकी मौत होने समेत तमाम संगीन गुनाहों के जुर्म में गिरफ़्तार कर लिया गया। पुलिस की अब तक की जांच में डॉक्टर सर्राफ़ को लेकर कई तरह की शिकायतें सामने आई हैं। पता चला है कि डॉक्टर सर्राफ़ अपने पास इलाज के लिए आनेवाले मरीज़ों को अलग-अलग तरीक़ों से डराया और लूटा करते थे जिन्हें ज़रा भी दिल से जुड़ी शिकायत होती थी उन्हें डॉक्टर सर्राफ़ बीमारी और मौत का डर दिखा कर फौरन पेस मेकर लगाने की जरूरत बताते थे।  

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डॉक्टर डेथ संगीन गुनाहों के जुर्म में गिरफ़्तार 

सरकारी अस्पतालों में आम तौर पर पेसमेकर लगाने में 75 हज़ार रुपये से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक का खर्च आता है। डॉक्टर सर्राफ़ अक्सर इन मरीजों को अच्छी क्वालिटी का पेसमेकर लेने और इसके लिए अलग से रुपये खर्च करने की सलाह देते थे। इस तरह एक मरीज से 4 से पांच लाख रुपये तक चार्ज किया जाता लेकिन इतने रुपये लेने के बावजूद मरीजों को डॉक्टर सर्राफ़ असली की जगह अनब्रांडेड और नकली पेसमेकर लगा कर छोड़ देते। कई मामले तो ऐसे भी सामने आए, जिनमें मरीजों को पैकेट और स्टिकर किसी ब्रांडेड पेसमेकर का दिखाया गया और लगाया कोई और नकली पेसमेकर था। कुछ मरीज़ों ने पेसमेकर लगाने के बावजूद तबीयत बिगड़ने के बाद जब दिल्ली, कानपुर समेत दूसरे शहरों में अपना चेकअप करवाया, तब जाकर इस बात का ख़ुलासा हुआ कि उन्हें भरोसा तो असली पेसमेकर का दिया गया था, लेकिन लगाया नकली पेसमेकर था। ताजा मामलों में जो केस सामने आए हैं उनमें:

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केस नंबर-1


उत्तर प्रदेश के इटावा की रहने वाली 46 साल की नूरबानो को अचानक दिल का दौरा पड़ा। घरवाले फ़ौरन उन्हें पास के सरकारी अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें पेसमेकर लगाने की सलाह दी लेकिन हद तो ये रही कि ऑपरेशन के बाद सर्जन ने पेसमेकर सीने के अंदर नहीं बल्कि बाहर ही चिपकाकर छोड़ दिया। इसके बाद नूरबानो के साथ-साथ उनके घरवाले भी करीब ढाई महीने तक इस पेसमेकर से जूझते रहे और आखिरकार नूरबानों की मौत हो गई।

केस नंबर-2


इटावा की ही रहनेवाली 40 साल की नजीमा को भी दिल की बीमारी थी। उन्हें घरवालों ने सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी हॉस्पीटल में भर्ती करवाया। उनके इलाज में करीब 4 लाख रुपये खर्च किए उन्हें भी पेसमेकर लगाया गया लेकिन आखिरकार नजीमा की भी जान चली गई।

केस नंबर-3


46 साल की रेशमा को भी हार्ट में प्रॉब्लम था। रेशमा को भी उसी अस्पताल में पेसमेकर लगाया गया, जिस अस्पताल में नूरबानो और नज़ीमा को पेसमेकर लगा था लेकिन इत्तेफाक देखिए कि लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद रेशमा की भी जिंदगी नहीं बची।


ये तीनों के तीनों के तीनों केस स्टडीज सिर्फ़ कोई दर्दनाक इत्तेफ़ाक नहीं बल्कि इन मौत के पीछे लालच, धोखे और हैवानियत की एक ऐसी कहानी छुपी है, जिस पर यकीन करना भी मुश्किल है। क्या आप मान सकते हैं कि इन तीनों के तीनों मरीजों का इलाज एक ही डॉक्टर ने किया था और उस डॉक्टर ने सिर्फ चंद रुपयों की लालच में धोखे से इन मरीजों के सीने में असली पेसमेकर की जगह नकली पेसमेकर डाल दिया? जिसका नतीजा ये हुआ कि कुछ दिनों तक सस्ते और घटिया पेसमेकर से जूझने के बाद इन सभी के सभी मरीजों की जान चली गई। लोग डॉक्टर को भगवान का दूसरा रूप मानते हैं। आम तौर पर मरीज़ डॉक्टर पर आंख मूंद कर भरोसा करते हैं लेकिन जब कोई डॉक्टर चंद रुपयों की ख़ातिर अपने पेशे से ही गद्दारी करने लगे, लोगों की ज़िंदगी दांव पर लगा दे, तो कोई क्या ही कर सकता है? 

असली पेसमेकर की जगह नकली पेसमेकर डाल दिया

पुलिस को अब तक की जांच में पता चला है कि डॉक्टर सर्राफ़ ने कुछ मामलों में तो मरीजों को यूज़्ड यानी इस्तेमाल किया गया पेसमेकर ही धोखे से लगा दिया यानी किसी मरीज की मौत हुई, तो धोखे से उसका पेसमेकर निकाल लिया और उसी पेसमेकर को किसी दूसरे मरीज के सीने में प्लांट कर दिया, जबकि उस दूसरे मरीज से डॉक्टर सर्राफ़ ने नए और ब्रांडेड पेसमेकर के पैसे वसूल रखे थे। पुलिस ऐसी अजीब और दहलानेवाली शिकायतों को भी वैरीफाई करने में जुटी है। वैसे जांच में डॉक्टर सर्राफ़ के ख़िलाफ़ मरीजों से सिर्फ़ जानलेवा धोखाधड़ी करने के मामले ही सामने नहीं आए हैं, बल्कि भ्रष्टाचार के भी कई इल्ज़ाम सही पाए गए हैं। पुलिस सूत्रों की मानें तो डॉक्टर सर्राफ़ ने सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में सरकारी पैसे से ऐसे कई ग़ैरज़रूरी और महंगे उपकरण भी ख़रीद लिए, जिसकी ज़रूरत नहीं थी। ठीक इसी तरह तरह हाल के कुछ सालों में उन्होंने हॉन्गकॉन्ग, जापान, थाईलैंड, यूके समेत 7 से 8 अलग-अलग देशों की सपरिवार यात्राएं भी कीं। 

 7 से 8 अलग-अलग देशों की सपरिवार यात्राएं 

पुलिस को शक है कि इन यात्राओं के पीछे भी नकली पेसमेकर बनानेवाली कंपनियों से कमीशनख़ोरी की कहानी छुपी है। समझा जाता है कि ऐसी कंपनियों ने डॉक्टर को अपने पेसमेकर के इस्तेमाल के बदले विदेश यात्राएं कराईं। फिलहाल, पुलिस को अब तक की जांच में इस रैकेट में चार से पांच और लोगों के शामिल होने का पता चला है। पुलिस उनकी भूमिका भी जांच कर रही है। बहुत मुमकिन है कि जल्द ही क़ानून के हाथ उनके गिरेबान तक भी होंगे। अब तक करीब छह सौ लोगों को नकली पेसमेकर लगाए जाने की बात सामने आई है। पेसमेकर वाले करीब दो सौ मरीजों की जान जा चुकी है। ऐसे में पुलिस फिलहाल ये पता करने की कोशिश कर रही है कि आखि़र मारे गए मरीजों में कितने नकली पेसमेकर का शिकार बने। इसी बीच पुलिस ने डॉक्टर सर्राफ़ का पासपोर्ट जब्त करने की कोशिश शुरू कर दी है ताकि अगर कल को वो जमानत पर बाहर भी निकल आए, तो उसके लिए विदेश भागना संभव ना हो। फिलहाल, डॉक्टर समीर सर्राफ़ जेल में है लेकिन जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई और चौंकाने वाले ख़ुलासों की उम्मीद है।

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