Trainee IAS पूजा खेडकर ने दिखाया कानून को ठेंगा, निजी Audi कार पर बत्ती लगा दिखाई ठसक, सीनियर का ही छीना चैंबर! हो गया Transfer

ADVERTISEMENT

CrimeTak
social share
google news

न्यूज़ हाइलाइट्स

point

ट्रेनी IAS ने लगाई निजी Audi कार पर लाल बत्ती

point

IAS पूजा पर सीनियर का चैंबर छीनने का आरोप

point

डिपार्टमेंट में बवाल के बाद शासन ने किया ट्रांस्फर

Pune, Maharashtra: पुणे इन दिनों खबरों में है और सुर्खियों में हैं पुणे की ही एक ट्रेनी IAS अफसर डॉक्टर पूजा खेडकर (IAS Pooja Khedkar)। अक्सर यही देखा जाता है कि देश की सबसे बड़ी नौकरी यानी IAS बनने के बाद कई लोगों के मिजाज सातवें आसमान पर होते हैं। लेकिन वो तब होते हैं जब ट्रेनिंग पूरी होने के बाद कोई IAS अफसर किसी बड़ी हैसियत की कुर्सी पर बैठता है। लेकिन पूजा खेडकर ने तो ट्रेनी के तौर पर ही गुल खिलाने शुरू कर दिए हैं। पूजा अपने रवैये को लेकर इन दिनों खासी चर्चा में हैं। उनके रंग-ढंग तो जरा हटकर हैं ही, लेकिन उनका एटीट्यूड भी ऐसा है जिसकी वजह से उनके कारनामों की चर्चा संतरी से लेकर मंत्री तक करने लगे हैं। 

Trainee IAS के कारनामे

एक कहावत है कि पूत के पांव पालने में ही नज़र आ जाते हैं। पूजा का किस्सा भी कुछ-कुछ ऐसा ही है। कहा जा रहा है कि ट्रेनी IAS होते ही पूजा ने कायदे और कानून को ही सबसे पहले ठेंगा दिखाना शुरू कर दिया है। उन्होंने अपनी निजी ऑडी कार पर लाल और नीली रंग की बत्ती लगाकर तमाम इलाके में अपना रुआब गांठना शुरू किया। इसके अलावा ये भी कहा जा रहा है कि पूजा ने अपने ही सीनियर का चैंबर तक छीन लिया। उस चैंबर के बाहर अपने नाम की तख्ती भी ठुकवा दी थी। ये सब होने की खबर जब आला अफसरों तक पहुँची तो पूजा के खिलाफ एक्शन हुआ और सबसे पहले उनका तबादला ही कर दिया गया। 

पूजा का कर दिया गया ट्रांसफर

मजे की बात ये है कि पुणे में तैनात ट्रेनी IAS अधिकारी पूजा खेडकर ने ट्रेनिंग पूरी होने से पहले ही अलग केबिन और स्टाफ जैसी मांगों को लेकर अच्छा खासा बवाल खड़ा कर दिया। पीटीआई के मुताबिक, पूजा खेड़कर का ट्रांसफर करने वाली सरकारी चिट्ठी में कहा गया है कि 2023 बैच की IAS अधिकारी पूजा खेडकर को उनके प्रशिक्षण की बची हुई मियाद पूरी करने के लिए वाशिम ट्रांसफर किया गया है। और वह 30 जुलाई, 2025 तक वहां सुपर न्यूमेरी सहायक कलेक्टर के तौर पर काम करेंगी, यानी पूजा अब एक वैकल्पिक अधिकारी के तौर पर अपनी ट्रेनिंग पूरी करेंगी। 

ADVERTISEMENT

केबिन, कार और चपरासी की डिमांड

पुणे के कलेक्टर सुहास दीवसे की तरफ से General Administration Department को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक, 3 जून को ड्यूटी पर आने से पहले ही खेडकर ने नियमों को ठेंगा दिखाते हुए बार-बार मांग की थी कि उन्हें एक अलग केबिन, कार, आवासीय क्वार्टर के साथ-साथ एक चपरासी भी दिया जाए। जबकि उन्हें ये बात पहले ही बताई जा चुकी थी कि प्रोबेशन पीरियड (Probation Period) के दौरान वो ऐसी किसी भी सुविधा की हकदार नहीं होंगी। जिला कलेक्टर ने GAD को भेजी अपनी रिपोर्ट में साफ कर दिया है कि मौजूदा हालात और पूजा खेडकर के हाव-भाव को देखते हुए उन्हें पुणे में अपनी ट्रेनिंग जारी रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती। 

सीनियर अफसर का छीना चैंबर

हद तो तब हो गई थी जब पुणे कलेक्टर कार्यालय में एक वरिष्ठ अधिकारी की नेमप्लेट हटाकर पूजा ने अपनी नेम प्लेट लगवा दी। पूजा पर इल्जाम ये भी है कि 8 से 20 जून 2024 के बीच पूजा खेडकर ने अपर कलेक्टर की इजाजत के बिना कुर्सियां, सोफा, टेबल समेत उनके दफ्तर का तमाम फर्नीचर और सभी सामान बाहर निकाल दिया. इसके बाद राजस्व सहायक को बुलाकर उनके नाम का लेटर हेड, विजिटिंग कार्ड, पेपरवेट, राष्ट्रीय ध्वज, नेमप्लेट, शाही मुहर, इंटरकॉम आदी उपलब्ध कराने का निर्देश दे दिया। ऐसा तब हुआ जब उस अधिकारी ने पूजा को अपने दफ्तर के तौर पर अपना चैंबर इस्तेमाल करने की इजाजत दी थी। पूजा पर ये भी इल्जाम है कि पुणे आने से पहले पूजा वीआईपी नंबर प्लेट वाली ऑडी कार पर लाल और नीली बत्ती लगाकर घूमती रहीं। इसके लिये उन्होंने अपनी निजी ऑडी कार का इस्तेमाल किया। उस कार पर लाल रंग से महाराष्ट्र शासन भी लिखवा लिया। जबकि किसी भी सरकारी अफसर को हूटर, बत्ती या फिर ऐसी नंबर प्लेट सिर्फ सरकारी गाड़ी पर ही लगाने की इजाजत होती है।

ADVERTISEMENT

ट्रेनी को नहीं मिलती है कोई सुविधा

पूजा की इस हरकत से समूचे प्रशासन में हड़कंप मच गया। क्योंकि IAS अफसरों को लेकर भी नियम ये कहता है कि कोई भी ट्रेनी ऐसी किसी सुविधा का हकदार नहीं है। और ये सब उसे तब तक हासिल नहीं हो सकता जब तक वो राजपत्रित अधिकारी के रुप में पूरी तरह से नियुक्त नहीं हो जाता। 

ADVERTISEMENT

Who is Pooja?

सवाल उठता है कि आखिर ये डॉक्टर पूजा खेडकर हैं कौन और क्यों इनके नाम की इतनी चर्चा है। दरअसल ट्रेनी IAS पूजा खेडकर ने साल 2021 में UPSC की परीक्षा पास की थी। इस इम्तेहान में उनकी ऑल इंडिया रैंक 821 आई थी। उन्होंने खुद को दिव्यांग बताते हुए कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय में याचिका भी दायर की थी। इसके पीछे पूजा खेडकर की दलील थी कि दिव्यांग उम्मीदवारों को एससी/एसटी उम्मीदवारों की तुलना में अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। लिहाजा उन्हें भी समान लाभ दिए जाने चाहिएं। 

    यह भी पढ़ें...

    follow on google news
    follow on whatsapp

    ADVERTISEMENT