कोटा में खुदकुशी का मामला, विशेषज्ञों ने कोचिंग संस्थान से बैच को विभाजित ना करने को कहा

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Rajasthan Crime Suicide: राजस्थान के कोटा में विद्यार्थियों की खुदकुशी की बढ़ती घटनाओं के बीच विशेषज्ञों ने कोचिंग संस्थानों को चेताया है कि वे ‘स्टार’ ‘लीडर’, ‘ड्रॉपर’, ‘अचीवर’, ‘रिपीटर’ या ‘एन्थूज़ीऐस्ट’ बैच को अलग अलग करने के चलन को खत्म करें। तथाकथित 'कोटा फैक्ट्री' छात्रों में तनाव पैदा करने वाले विभिन्न कारकों को लेकर बहस का केंद्र बन गई है। विद्यार्थी तनाव के कारण अपनी जान देने जैसे कदम उठा रहे हैं। जिला प्रशासन और मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञों के मुताबिक, विद्यार्थियों के बैच को विभाजित करने का चलन अन्य विद्यार्थियों का मनोबल तोड़ता है और अक्सर उन्हें असफल होने का एहसास कराता है।

बैच को अलग अलग करने के चलन को खत्म करें

जिला कलेक्टर ओपी बुनकर ने पीटीआई-भाषा को बताया कि कोचिंग संस्थानों को 'बैच पृथककरण ' के खिलाफ सलाह दी जा रही है। उन्होंने कहा, “ विद्यार्थी कोई वस्तु नहीं हैं जो उन्हें अलग अलग किया जाए। हर छात्र की अलग जरूरत होती है और उन्हें अलग करने का मतलब उनपर लेबल लगाने जैसा है और यह उन्हें एक दूसरे से फायदा उठाने की बहुत कम गुंजाइश देता है।” सभी कोचिंग संस्थानों में ‘स्टार बैच’ को सर्वश्रेष्ठ बैच माना जाता है जिनमें अच्छा प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थी शामिल होते हैं। इस बैच के लिए खासकर सर्वश्रेष्ठ शिक्षक और प्रेरक कक्षाओं की व्यवस्था करने के साथ-साथ बैच पर खास ध्यान दिया जाता है और जब परीक्षाओं के परिणाम आते हैं तो कुछ विद्यार्थी कामयाब होते हैं और उनका पूरे देश में नाम होता है। कोचिंग संस्थानों के लिए ‘स्टार बैच’ उनके आगे के व्यवसाय की कुंजी भी होता है।

विद्यार्थी कोई वस्तु नहीं हैं 

‘रिपीटर’ और ‘ड्रॉपर’ बैच में वे छात्र शामिल होते हैं जिन्होंने पहले परीक्षाएं दी होती हैं और किन्हीं वजहों से वह पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं। “अचीवर’ बैच में उन छात्रों को शामिल किया जाता है जिनमें अच्छा करने की क्षमताएं तो होती हैं लेकिन वे फिलहाल अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे होते हैं। वहीं ‘एन्थूज़ीऐस्ट’ बैच में वे छात्र होते हैं जिनमें अच्छा करने की इच्छा होती है लेकिन उपलब्धि हासिल करने के लिए उन्हें बहुत सुधार करना पड़ता है। इंजीनियरिंग के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) और मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सालाना ढाई लाख से अधिक विद्यार्थी कोटा आते हैं।

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सालाना ढाई लाख से अधिक विद्यार्थी कोटा आते हैं

साल 2023 में सबसे ज्यादा संख्या में विद्यार्थियों ने खुदकुशी की है। अबतक 22 विद्यार्थी अपनी जान दे चुके हैं और उनमें से दो ने 27 अगस्त को कुछ घंटे के अंदर ही आत्महत्या कर ली थी। पिछले साल आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 27 थी। विद्यार्थी व्यस्त कार्यक्रम, जबर्दस्त प्रतिस्पर्धा, अच्छा करने का दबाव, माता-पिता की अपेक्षाओं का बोझ और लंबे वक्त तक घर से दूर रहने के कारण उदासी समेत अन्य कारकों से जूझते हैं। कोचिंग संस्थानों का तर्क है कि बैच का विभाजन करने से उन्हें विभिन्न प्रकार के शिक्षक उपलब्ध कराने और समूह की आवश्यकताओं के अनुसार रणनीतियों को अपनाने में मदद मिलती है, जबकि मनोवैज्ञानिकों का इस पर एक अलग दृष्टिकोण है और वे कहते हैं कि कम अंक हासिल करने वालों और शीर्ष अंक हासिल करने वालों का वर्गीकरण विद्यार्थियों के लिए चीज़ों को मुश्किल बनाता है।

अबतक 22 विद्यार्थी अपनी जान दे चुके हैं

‘हेल्थ माइंड क्लिनिक’ में मनोचिकित्सक नीना विजयवर्गीय ने कहा, “ जिस वक्त आप किसी विद्यार्थी को उसके खराब होते प्रदर्शन की वजह से दूसरे बैच में भेजते हैं, तो आप उसे यह बता देते हैं कि वह लड़ाई हार चुका है। विद्यार्थी का आत्म विश्वास प्रभावित होता है और वह इससे उबर नहीं पाता है।” उन्होंने कहा कि इसके बाद विद्यार्थी सारा ध्यान मुख्य परीक्षा पर न लगाकर ‘प्रतिष्ठित’ बैच में जाने के लिए लगाता है। विजयवर्गीय ने कहा कि कभी-कभी जब माता-पिता को विद्यार्थी के खराब प्रदर्शन के बारे में पता चलता है तो वे छात्र पर दबाव डालते हैं।

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(PTI)

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