चीन का 'काल' बनेगा क्वाड! , अब परेशान हुआ चीन, तालिबान और पाकिस्तान
Quad, the anti-China bloc, and what it hopes to achieve
ADVERTISEMENT
आतंक के आकाओं आतंक के जन्मदाताओं की उल्टी गिनती शुरु हो चुकी है. अमेरिका में लिखी जाएगी इनके ख़ात्मे की इबारत. इस शुभ काम की शुरुआत बस होने वाली है. भारत दक्षिण-पूर्व एशिया में फैले आतंक को कुचलने का ब्लू प्रिंट दुनिया के सामने रखने वाला है.
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन की मेजबानी होगी. जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री भी होंगे. इसी बैठक में दहशतगर्दी और चीन की दादागीरी पर प्रहार के प्लान को दुनिया के सामने रखेगा भारत. क्वाड देशों की इस बैठक पर चीन से लेकर पाकिस्तान, पाकिस्तान से लेकर तालिबान के हर नेता की नजर रहेगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा पर बीजिंग सरकार टकटकी लगाये बैठी है. क्योंकि शंघाई 17 सितंबर को दुशांबे में हुई शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में ही प्रधानमंत्री मोदी ने अपना एजेंडा साफ कर दिया था.
ADVERTISEMENT
जाहिर है शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में हिंदुस्तान ने जिस अंदाज में आतंकवाद और कट्टरवाद के गठजोड़ से आगाह किया था. उससे चीन भी तिलमिला उठा था. क्योंकि हाल के घटनाक्रम में चीन ने तालिबान से हाथ मिलाया है और पाकिस्तान पर हाथ रखा है. उससे चीन के मंसूबों से दुनिया सतर्क हो चुकी है.
क्वाड देशों की इस बैठक का एजेंडा क्या होगा. उससे पहले आपका ये जानना भी जरूरी है कि आखिर क्वाड देशों के समूह में कौन कौन से देश हैं.
ADVERTISEMENT
क्या है QUAD?
ADVERTISEMENT
क्वाड का पूरा नाम क्वाड्रिलेट्रेल सिक्योरिटी डायलॉग है.
ये भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान का एक संगठन है.
क्वाड का गठन 2007 में हुआ था
ऐसा माना जाता है कि अमेरिका और चीन के बीच चल रहे कारोबारी संघर्ष की वजह से तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में चार देशों का ये संगठन दोबारा सक्रिय हुआ ताकि चीन पर लगाम लगाई जा सके. बहरहाल अमेरिका में होने वाली बैठक का एजेंडा क्या हो सकता है इस पर भी गौर करना जरूरी है. क्योंकि दक्षिण पूर्व एशिया में अस्थिरता पैदा करने के लिए चीन ने पाकिस्तान और तालिबान से गठजोड़ किया है. लिहाजा चीन ही इस बैठक का मुख्य विषय हो सकता है.
माना जा रहा है कि क्वाड संगठन की बैठक के बाद संयुक्त घोषणापत्र जारी हो सकता है. घोषणापत्र में हिंद प्रशांत महासागर में चीन के आक्रामक रवैये पर सीधा जबाव दिया जा सकता है.
ADVERTISEMENT
