महिलाओं और मवेशियों का शिकारी आदमखोर 'टाइगर' जिंदा है, फंसा जाल में

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नैनीताल के पास एक आदमखोर टाइगर को पकड़ा जो महिलाओं का शिकारी बन गया था
नैनीताल के पास एक आदमखोर टाइगर को पकड़ा जो महिलाओं का शिकारी बन गया था
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Maneater Tiger Caught:  इंसानों की दहशत, और जात से जानवर, फितरत से शिकारी मगर नई पहचान आदमखोर। ये तार्रुफ है उस आदमखोर टाइगर का जो जब तक आजाद रहा, सारे नैनीताल में दहशत का साया बनकर घूमता रहा। खासतौर पर महिलाओं के मन में दहशत का वायस बना हुआ था क्योंकि वो तीन महिलाओं को अपना शिकार बनाने के बाद आदमखोर बन गया गया। 

दस दिन में तीन महिलाओं का शिकार

नैनीताल जिले में केवल 10 दिनों के भीतर उसने तीन महिलाओं का शिकार किया। मगर 25 दिसंबर को वन विभाग ने इस जिले की तमाम महिलाओं को मैरी क्रिसमस कहा और आदमखोर टाइगर को जिंदा पकड़ने के बाद जिले की तमाम आबादी को क्रिसमस का तोहफ दिया। 

वन विभाग ने जिंदा पकड़ा

महिलाओं और मवेशियों का शिकार करने वाले आदमखोर टाइगर को नौकुचियाताल के ऊपर जंगल से वन विभाग की टीम ने जिंदा पकड़ लिया। हालांकि जिस वक्त इस जंगल के राजा को दबोचा गया वो ट्रैंकुलाइजर के असल में बेसुध हो चुका था। 

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दहशत के पैरों के निशान 

उत्तराखंड के नैनीताल और भीमताल इलाके में इस टाइगर की दहशत थी। अक्सर यहां टाइगर के पैरों के निशान दिखाई पड़ने लगे थे और उसी गिनती में मवेशी भी गायब होने लगे थे। यानी जब भी टाइगर इंसानी बस्ती में दाखिल होता था तो किसी न किसी मवेशी को अपना शिकार बनाकर चलता बनता था। हालात पिछले 10 दिनों में सबसे ज़्यादा बिगड़े जब इस टाइगर ने इंसानी खून चख लिया। दस दिन के भीतर इस टाइगर ने तीन महिलाओं को अपना शिकार बनाया और उन्हें मारकर खुद आदमखोर बन गया। 

आदमखोर टाइगर को बेहोश करने वाली वन विभाग की टीम

मवेशियों का शिकारी टाइगर

वन विभाग भी उस टाइगर के पीछे तभी से लगा हुआ था। मगर टाइगर आगे आगे और जंगल का महकमा जाल लिए पीछे पीछे घूमता रहा। इसी बीच खबर मिली की नौकुचया ताल के ऊपर जंगलिया गांव के पास एक टाइगर दिखा है। साथ ही ये भी खबर मिली कि उस टाइगर ने एक गाय को अपना शिकार बना लिया है। बस फिर क्या था वन विभाग की टीम जाल लेकर उसके कदमों के निशानों का तेजी से पीछा करते हुए वहां पहुँच गई जहां उसके पैरों के सबसे ताजा निशान थे। वन विभाग को टाइगर की फितरत  का पता था कि वो अपने शिकार की जगह एक बार जरूर पलटकर आता है। लिहाजा जिस गाय को टाइगर ने मारा था उसे ऐसी जगह पर रख दिया जहां टाइगर के आने पर आसानी से उसे देखकर ट्रैंकुलाइजर दिया जा सके। 

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खतरनाक प्लान

हालांकि वन विभाग को इस बात का अंदाजा जरूर था कि सर्दियों की रातों में टाइगर को इस तरह घेरकर पकड़ना खतरनाक भी हो सकता है। जंगल में टाइगर को ढूंढ़ना उतना ही कठिन है जैसे भूसे के ढेर से सुई को तलाश करके निकालना। 

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टैंकुलाइजर किया गया टाइगर

वन विभाग ने 10 लोगों की टीम बनाई, और प्लान ए और प्लान बी दोनों तैयार किया। पूरे प्लान का एग्जिट प्लान तैयार करने के फौरन बाद हाका डलवा दिया। इंसानी शोर को सुनकर बचने की गरज से टाइगर  अचानक उस जगह जा पहुँचा जहां वन विभाग की एक टीम ताक में बैठी थी। टाइगर को फौरन टैंकुलाइज किया गया। टीम सांस रोके टाइगर के मूवमेंट को देखते रहे...और कुछ अरसे के बाद टीम को इत्तेला मिली कि टाइगर 3 किमी पहाड़ी से नीचे बेहोश पड़ा है। 

एक मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन

भारी भरकम टाइगर को खतरनाक जंगली हिस्से से निकालकर सड़क तक पहुँचाने में करीब ढाई घंटे का वक्त लग गया। इस दौरान टाइगर को बेहोशी के बूस्टर भी दिएजाते रहे क्योंकि डर इस बात का था कि कहीं टाइगर जाग न जाए। बहरहाल टाइगर को पकड़ने के बाद उसे पिंजरे में डाला गया और एक बड़े ट्रक के जरिए रानीबाग रेस्क्यू सेंटर लाया गया है। इसके बाद उसका ब्लड और स्वाब और बालों का नमूना लेकर उसे लैब में भेजा गया है, जिसका मिलान मारी गई महिलाओं के ब्लड सैंपल से करवाया जाएगा। ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि ये टाइगर वही आदमखोर है। या फिर कोई और...?

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