CBI ने पकड़ा दिल्ली पुलिस का घूसखोर एडिश्नल SHO, केस खत्म करने के लिये मांग रहा था मोटी रकम

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दिल्ली पुलिस का घूसखोर एडिश्नल SHO बेनकाब

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एडिश्नल SHO का नाम प्रवीण कुमार

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ATO के पद पर था तैनात

Delhi: दिल्ली पुलिस के एक एडिश्नल एसएचओ को देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) ने रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया है। ये इंस्पेक्टर साहब करीब 5 लाख रुपए रिश्वत मांग रहा था। इसकी मोटी डिमांड से परेशान होकर पीड़ित शख्स सीबीआई के पास पहुंच गया। फिर क्या था, आरोपी एडिश्नल एसएचओ प्रवीण कुमार (Additional SHO Praveen Kumar) को उस वक्त पकड़ लिया गया, जब वो मोटी रकम ले रहा था। इस घटना से दिल्ली पुलिस (Delhi Police) में हड़कंप मच गया है। 

CBI ने दबोच लिया दिल्ली पुलिस का अफसर

ये वाकया मंगलवार देर रात का है। नार्थ ईस्ट जिले (North East District) में ज्योति नगर थाना (Jyoti Nagar Police Station) है। वहां एडिश्नल एसएचओ के पद पर प्रवीण कुमार तैनात था। यहां एक शख्स के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत साल 2022 में एक मुकदमा दर्ज हुआ था। इस केस को रफादफा करने में इंस्पेक्टर साहब ने खास दिलचस्पी दिखाई। उन्होंने सोचा कि क्यों न आरोपी को बुला लिया जाए और धमकाया जाए, हो सकता है वो अरदब में आकर कुछ पैसे ढीले कर दे। आखिरकार एडिश्नल एसएचओ प्रवीण कुमार ने ऐसा ही किया। 

ऐसे ट्रैप किया एक शख्स ने दिल्ली के एडिश्नल SHO को!

आखिर ये शख्स कौन था, जिससे एडिश्नल एसएचओ ने पैसों की डिमांड की। आइये आपको पूरी कहानी बताते हैं। दरअसल इस शख्स की दिल्ली के गोकुलपुरी में एक प्लॉट है। ये प्लॉट उसने 2021 में खरीदा था। इसे लेकर उसका कुछ लोगों से विवाद भी चल रहा था। मामला कोर्ट तक पहुंचा। लंबे इंतजार के बाद कोर्ट ने शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि 2022 में उसके खिलाफ ज्योति नगर थाने में झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया गया। एडिश्नल एसएचओ प्रवीण कुमार इसी मुकदमे को रफा-दफा कराने के लिये रिश्वत मांग रहा था। (Delhi Police Corrupt ATO Inspector Arrested Praveen Kumar Jyoti Nagar Police Station CBI Raided Latest News )

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पहले फोन पर धमकाया, फिर थाने बुला कर ले ली रिश्वत

बहरहाल, जब एडिश्नल एसएचओ प्रवीण कुमार का फोन शिकायतकर्ता के पास पहुंचा तो वो घबरा गया। आरोप है कि एडिश्नल एसएचओ ने शिकायतकर्ता को धमकाया। शिकायकर्ता थाने में एडिश्नल एसएचओ प्रवीण कुमार से 7 जुलाई को मिला। तब एडिश्नल एसएचओ ने कहा कि छोटी रकम से कुछ नहीं होगा, मोटी रकम देनी होगी, केस तभी खत्म हो पाएगा। पहले जमीन को लेकर विवाद और फिर SC/ST एक्ट के तहत मुकदमा। पहले से परेशान शिकायकर्ता एडिश्नल एसएचओ की नई डिमांड से और भी हताश हो गया था। तभी उसे कहीं से पता चला कि भ्रष्ट इंस्पेक्टर की शिकायत सीबीआई से की जा सकती है। 

आखिरकार हिम्मत जुटा कर शिकायतकर्ता ने सीबीआई के एसपी साहब को लिखित में शिकायत दी। 

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शिकायतकर्ता द्वारा 8 जुलाई को दी गई शिकायत-

मैंने 2021 में एक प्लॉट गोकलपुरी में खरीदा था। इसको लेकर मेरा अन्य लोगों से विवाद चल रहा है। कोर्ट ने मेरे पक्ष में फैसला सुनाया। 2022 में मेरे खिलाफ SC/ST Act का मुकदमा दर्ज किया गया था। ये मुकदमा ज्योति नगर थाने में दर्ज किया गया था। बीती 6 जुलाई को मेरे पास ज्योति नगर थाने से प्रवीण कुमार का फोन आया। उन्होंने कहा कि तुम्हारे और सफल के खिलाफ SC/ST Act का मुकद‌मा दर्ज हो गया है। थाने में आकर मिलो। 7 जुलाई को सफल थाने गया और प्रवीण कुमार से मिला। उन्होंने कहा कि ये मुकद‌मा एक-दो लाख में खत्म नहीं होगा, इसके लिए मोटी रकम (रिश्वत) लगेगी और मैं केस खत्म कर दूँगा, कल आकर मिलो। 

शिकायत के बाद सीबीआई की टीम फौरन एक्टिव हो गई। शिकायतकर्ता ने एडिश्नल एसएचओ को फोन किया। AD. SHO ने उसे कड़कड़डूमा कोर्ट के पास बुलाया। सीबीआई की टीम भी शिकायतकर्ता के साथ कड़कड़डूमा पहुंच गई। जब एडिश्नल एसएचओ प्रवीण कुमार रिश्वत ले रहा था, उसी वक्त उसे रंगे हाथों सीबीआई की टीम ने गिरफ्तार कर लिया। अचानक हुई इस कार्रवाई से वो हक्का-बक्का रह गया। सीबीआई ने मौके से सभी सबूत इकट्ठा कर लिए। फोरेंसिक टीम को बुलाया गया। गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इसके बाद सीबीआई की टीम प्रवीण कुमार को अपने साथ ले गई। बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से रिश्वत की पूरी रकम बरामद हो गई है। सीबीआई के पास इसके अलावा कुछ Audio Evidence भी हैं। 

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मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। क्योंकि पुलिस अधिकारी के खिलाफ सीबीआई ने कार्रवाई तो कर दी मगर जाहिर है उसने पुलिस से सीधी दुश्मनी मोल ली है लिहाजा शिकायतकर्ता भी अभी डरा हुआ है। ऐसे में देखना होगा कि इस केस की जांच सीनियर अधिकारी कैसे आगे बढ़ाते हैं। मगर सीबीआई की कार्रवाई के बावजूद इस केस से जुड़े कई सवालों का जवाब अब भी मिलना बाकी है, मसलन -

क्या शिकायतकर्ता के खिलाफ SC/ST एक्ट का केस फर्जी था?

क्या अब पुलिस शिकायतकर्ता से बदला लेगी?

किसकी शिकायत पर SC/ST का केस दर्ज हुआ था?

किस अधिकारी ने दर्ज किया था मुकदमा?

क्या दूसरा पक्ष पुलिस से मिला हुआ है?

 

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