वर्ल्ड कप के मैच में हुई सनसनीखेज 'हत्या', हजारों दर्शकों के सामने बांग्लादेश के कप्तान ने किया जुर्म

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श्रीलंका और बांग्लादेश के मैच के बीच क्रिकेट के इतिहास का पहला टाइम आउट
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World Cup Cricket : कल यानी सोमवार को दिल्ली के अरुण जेटली क्रिकेट स्टेडियम में हजारों क्रिकेट प्रेमियों की आंखों के सामने एक ऐसा जुर्म हुआ जो क्रिकेट के इतिहास में इससे पहले कभी नहीं हुआ। और मजे की बात ये है कि इस जुर्म को बाकायदा ICC के नियमों का सरंक्षण भी हासिल था। जी हां कल वर्ल्ड कप क्रिकेट के मैच के दौरान खेल भावना की सरेआम हत्या की गई है। क्योंकि कायदे और कानून की आड़ लेकर श्रीलंका के खिलाड़ी एंजेलो मैथ्यूज को TIME OUT करार देकर बिना खेले पेवेलियन लौटने को मजबूर होना पड़ा। 

खेल भावना की हत्या

इस खेल भावना की हत्या करने का इल्जाम लगा बांग्लादेश के कप्तान शाकिब उल हसन पर। क्योंकि उन्होंने खिलाड़ी की देरी की शिकायत अंपायर से करके उनके आउट की अपील की। और नियमों में बंधे अंपायर को मैथ्यूज के खिलाफ फैसला लेना पड़ा। और अंपायर को मैथ्यूज को वापस पेवेलियन भेजना पड़ा। 

श्रीलंका के बल्लेबाज एंजेलो मैथ्यूज

डकआउट का इशारा 

दरअसल हुआ ये कि एंजेलो मैथ्यूज जब क्रीज पर पहुँचकर गार्ड लिया तो उन्हें अहसास हुआ कि उनका हेलमेट ठीक नहीं है। उन्होंने हेलमेट को लेकर ड्रेसिंग रूम की तरफ इशारा किया ताकि दूसरा हेलमेट आ सके। जब तक टीम का 12वां खिलाड़ी मैथ्यूज के पास हेलमेट लेकर पहुँचता तब तक काफी देर हो गई और इस बात को लेकर बांग्ला देश के खिलाड़ियों और कप्तान ने डकआउट का इशारा कर दिया। बांग्लादेश के कप्तान के टाइम आउट की अपील को अंपायर ने मान भी लिया और मैथ्यूज को आउट करार दे दिया। 

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क्रिकेट के जानकारों के बीच बहस

इस फैसले के बाद इंटरनेशनल क्रिकेट और क्रिकेट के जानकारों के बीच एक अजीब बहस छेड़ दी। अंपायर के इस फैसले के खिलाफ श्रीलंका की टीम भी काफी गुस्से में दिखाई दी। यहां तक कि मैथ्यूज ने पेवेलियन की तरफ बढ़ते हुए अपने हेलमेट की टूटी हुई स्ट्रेप भी लोगों को दिखाई और फिर उसे वहीं ग्राउंड पर पटक कर अपना गुस्सा भी जाहिर किया। मैथ्यूज के साथ साथ श्रीलंका की टीम भी इस फैसले से पूरी तरह से हैरान थी।उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि इंटरनेशनल क्रिकेट के भीतर इस नियम की आड़ लेकर भी खेल भावना की हत्या हो सकती है। 

खलनायक बन गए शाकिब उल हसन

मैथ्यूज ने बांग्ला देश के कप्तान शाकिब उल हसन को समझाने की कोशिश की लेकिन शाकिब ने आउट की अपील कर दी थी। आईसीसी का नियम ये कहता है कि विकेट गिरने या बल्लेबाज के रिटायर्ड हर्ड होने के बाद अगले बल्लेबाज को तीन मिनट के भीतर क्रीज पर आकर अगली गेंद का सामना कर लेना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है तो दूसरी टीम बल्लेबाज के आउट होने की अपील कर सकती है। और अंपायर नए बल्लेबाज को आउट करार दे सकता है। 

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नियम की आड़ में खेल भावना की हत्या

नियम तो सही है लेकिन ये खेल भावना सही नहीं है। शाकिब उल हसन के इस अपील और इस फैसले को लेकर क्रिकेट जगत के कई दिग्गज इसके खिलाफ दिखाई दिए। उनका मानना है कि जो चीज इतने सालों में कभी नहीं हुई, उसे अब क्यों होने दिया गया जबकि इसे टाला भी जा सकता था। बल्कि बेहद सुंदर तरीका ये होता कि खुद शाकिब उल हसन अपील के बाद बल्लेबाज को खेलने के लिए इजाजत दे देता। मगर शाकिब उल हसन ने खेल भावना के विपरीत जाकर खुद का नाम क्रिकेट के खलनायकों की लिस्ट में दर्ज करवा लिया। 

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