Bilkis Bano Case: बिल्किस के दोषियों को लगा सुप्रीम कोर्ट से झटका, समय सीमा बढ़ाने से कोर्ट का इनकार
Bilkis Bano Case: बिल्किस के दोषियों को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है।
ADVERTISEMENT

संजय शर्मा के साथ चिराग गोठी की रिपोर्ट
Bilkis Bano Case: बिल्किस के दोषियों को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। जस्टिस बीवी नाग रत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां के कोर्ट ने सभी दोषी याचिकाकर्ताओं के लिए आत्मसमर्पण की समय सीमा बढ़ाने से इंकार कर दिया है। यानी सबको 17 महीने की आजादी के बाद फिर से सलाखों के पीछे फिर से जाना होगा। सभी आरोपियों को 21 जनवरी तक सरेंडर करना होगा।
बिलकिस बानो के साथ रेप और उनके परिजनों की हत्या के मामले मे दोषी 11 में से नौ दोषियों ने आत्मसमर्पण करने के लिए और समय दिए जाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
ADVERTISEMENT
अलग-अलग आरोपी, अलग-अलग दलीलें
इनमें गोविंदभाई नाई का कहना है कि उनके 88 वर्षीय पिता और 75 वर्षीय मां हैं और वह उनकी देखभाल करने वाले एकमात्र व्यक्ति हैं। उन्हें इस आधार पर आत्मसमर्पण के लिए और समय दिया जाए। आरोपी रमेश रूपाभाई चंदना का कहना हैं कि उन्हें अपने बेटे की शादी की व्यवस्था करने की ज़रूरत है। मितेश चिमनलाल भट्ट का कहना है कि उनकी शीतकालीन उपज कटाई के लिए तैयार है और वह आत्मसमर्पण करने से पहले इस कार्य को पूरा करना चाहेंगे।
ADVERTISEMENT
प्रदीप रमणलाल मोढिया का कहना है कि अभी उनके फेफड़े की सर्जरी हुई है और उन्हें ठीक होने के लिए समय चाहिए। बिपिनचंद कनियालाल जोशी का कहना है कि हाल ही में पैर की सर्जरी के कारण वह आंशिक रूप से विकलांग हैं।
ADVERTISEMENT
जसवन्तभाई चतुरभाई नाई का कहना है कि उन्हें सर्दियों की फसलों की कटाई पूरी करनी है, इसलिए समय दिया जाए।
राधेश्याम भगवानदास शाह का कहना है कि उनके बूढ़े माता-पिता हैं और एक बेटा है, जो कॉलेज में है, इसलिए उसे आत्मसमर्पण करने से पहले अपने परिवार के लिए वित्तीय व्यवस्था के लिए कुछ और समय की जरूरत होगी।
केशरभाई खीमाभाई वोहनिया ने अपने बुढ़ापे का हवाला देते हुए कहा कि उनके बेटे की शादी तय है, इसलिए उन्हें और समय दिया जाए। शैलेशभाई चिमनलाल भट्ट बुढ़ापे, परिवार में शादी और सर्दियों की फसलों की कटाई का हवाला देते हुए आत्मसमर्पण के लिए और समय दिए जाने की गुहार लगाई थी।
दरअसल गुजरात सरकार द्वारा इन 11 दोषियों को माफी के आधार पर समय से पहले रिहाई करते हुए इनको जेल से रिहा कर दिया था। उसके खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई कर 8 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीवी नगरत्न की अध्यक्षता वाली बेंच ने इन दोषियों को दो हफ्ते में जेल में सरेंडर करने का आदेश दिया था।
ADVERTISEMENT

