वाह ! दिल्ली पुलिस डेढ़ महीने तक मामले को दबाए बैठे रहे अधिकारी, आरोपी कोई और नहीं बल्कि दिल्ली पुलिस का कांस्टेबल निकला, 27 जुलाई को अचानक हत्या का मामला दर्ज कर आरोपी को किया गिरफ्तार

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बड़े बड़े अपराधियों को यूं ही पुलिस पकड़ लेती है. लेकिन यूं कहे किसी को बचाना हो तो सबूत होने के बावजूद भी दिल्ली पुलिस हाथ पर हाथ धर कर बैठी रहती है... यही वजह है कि अब इसको लेकर इलाके के एसएचओ प्रमोद कुमार पर गाज गिर गई है... देर से जागी पुलिस ने अब कार्रवाई की है..न्यू अशोक नगर इलाके में युवक की पीट-पीटकर हत्या करने वाले पुलिस कांस्टेबल समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है .इनके 3 साथी अभी भी फरार है.. आरोपी कांस्टेबल का नाम मोनू सिरोही है. वह पांडव नगर थाने में तैनात था..

क्या है पूरा मामला

दिल्ली के न्यू अशोक नगर इलाके एक सनसनीखेज मामला सामने आया है जहां दिल्ली पुलिस में कार्यरत एक पुलिस कर्मी पर हत्या का संगीन इल्जाम लगा है पुलिस के मुताबिक, मामला 4 जून का है. न्यू अशोक नगर इलाके में एक युवक , जिसका नाम अजित था, घर से बाहर आइसक्रीम खाने निकला लेकिन वापस नही लौटा. पहले घरवालों ने उसे खूब तलाशा लेकिन कुछ पता नहीं चला.. काफी दिन तलाशने के बाद 13 जून को परिजनों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दी लेकिन पुलिस के सिर पर जूं तक नहीं रेंगी. करीब डेढ़ महीना बीत जाने के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नही की.

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पुलिस के पास थी 13 जून से गुमशुदगी रिपोर्ट और वीडियो, लेकिन सोती रही दिल्ली पुलिस

इस बीच एक वीडियो भी सामने आया जिसमें कुछ लोग अजीत की पिटाई करते हुए नजर आ रहे है.. लेकिन पुलिस हाथ पर हाथ धर कर बैठी रही. जांच में ये भी बात सामने आई है कि अजीत के भाई ने 13 जून को न्यू अशोक नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी लेकिन उसके बाद भी दिल्ली पुलिस सोती रही ..

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परिवार वालों ने शुरू में ही जताया था हत्या का शक

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इस बीच परिवार वालों ने हत्या की साजिश बताया लेकिन पुलिस ने फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की.. 15 जून को उसने शक जाहिर किया था कि उसके भाई की हत्या कर दी गई है..

13 जून को शिकायत दी, 15 जून को परिवार ने शक जाहिर किया.. तब भी 1 महीने से ज्यादा समय तक मामला दर्ज नहीं हुआ, लेकिन अचानक 27 जुलाई को मामला दर्ज हुआ।

पुलिस को लीड मिली की कांस्टेबल इस हत्या में शामिल है

पुलिस के मुताबिक, 27 जुलाई को इस बाबत मामला दर्ज किया गया और उसमें हत्या के सेक्शन्स को भी जोड़ दिया गया.. पुलिस को लीड मिली की इसमें कास्टेबल मोनू शामिल है..फिर पूरा मामला खुल गया. कांस्टेबल को गिरफ्तार कर लिया. sho प्रमोद कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है.

परत दर परत ऐसा खुला मामला

पूछताछ हुई तो राज खुल गया.. पुलिस के मुताबिक, 4 जून को जब कांस्टेबल मोनू अपने दोस्तों के साथ कार से जा रहा था. तभी सड़क पर पैदल जा रहे अजीत के साथ उसकी कहासुनी हुई थी. फिर ये कहासुनी मार-पिटाई तक जा पहुंची. वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि कांस्टेबल मोनू सिरोही और उसके साथी अजीत के साथ मार पिटाई कर रहे है. मार-पिटाई के बाद अजीत को मोनू सिरोही और उसके साथी अपनी कार में डालकर ले जाते हैं. तभी उसकी मौत हो जाती है. इसके बाद पुलिस कांस्टेबल और उसके साथी अजीत की लाश को गंग नहर में फेंक देते हैं. वारदात के बाद से अब तक पुलिस को अजीत की लाश नहीं मिली है. मोनू सिरोही के 3 आरोपी साथी अभी फरार है...

क्या कोई इस सिपाही को शुरूआत में बचा रहा था. सिपाही घटना को अंजाम देने के बाद भी निश्चिंत था कि उसका कुछ नहीं होगा.

पूछताछ की तो कांस्टेबल ने सारा राज खोल दिया.. इस घटना से कई सवाल जरूर खड़े हो गए है.. मसलन.. पहले मामला दर्ज न होना, उसके बाद सिपाही का शुरूआत में गिरफ्तारी न हो. और फिर एकाएक सब हो जाना... इसके पीछे क्या सच्चाई है.

SHO प्रमोद कुमार की भूमिका संदिग्ध

पुलिस अधिकारी इस पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है.. इस बाबत इलाके की डीसीपी प्रियंका कश्यप का कहना है कि एसएचओ को सस्पेंड किया गया है.. क्यूं इस केस में कंपलेंट के बाद काफी समय तक कुछ नहीं हुआ , अब इसकी जांच चल रही है... लेकिन साफ है कि पुलिस ने लापरवाही बरती जिसकी वजह से शायद पीड़ित के परिवार को इंसाफ मिलने में देरी हुई

4 जून से 26 जुलाई तक क्यों दिल्ली पुलिस सोती रही

पूरे मामले पर पुलिस पर सवालिया निशान लग गए है शिकायत के बावजूद लगभग डेढ़ महीना बीत जाने के बाद भी पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही नही की गई मामला जब अधिकारियों के संज्ञान में आया तो पूरे पुलिस महकमे में खलबली मच गई तुरंत एस एच ओ को निलंबित कर लाइन भेज दिया गया..

बाद में पुलिस ने अच्छा काम किया.. अब पुलिस के सामने ज्यादा चुनौती

उम्मीद की जानी चाहिेए कि जिस तरह से पुलिस ने बाद में अच्छा काम करते हुए आरोपी को पकड़ा.. अब बाकी आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जाएगा और शव को तलाशा जाएगा क्यूंकि ये एक अहम सबूत होगा.. अदालत में आरोपियों को दोषी साबित करने के लिए..

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