पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी का खूबसूरत जाल, फौजी के जरिए जासूसी कराने का नया स्टाइल

Shams Ki Zubani: पाकिस्तान (Pakistan) की खुफिया एजेंसी ISI ने मिलिट्री (Military) इंटेलिजेंस के साथ मिलकर एक जाल बुना है जिसके चंगुल में हिन्दुस्तान के सिपाहियों को फंसाने की गहरी साज़िश रची है।
शम्स की जुबानी
शम्स की जुबानी

Shams Ki Zubani: क्राइम के आज के क़िस्से में आज बात होगी जासूसी की। वैसे जासूसी का सिलसिला बहुत पुराना है। जब राजा महाराजाओं का दौर था तब भी अपने दुश्मनों पर नज़र रखने उनकी ताक़त का अंदाज़ा लगाने और उसके मुताबिक अपनी तैयारियों को पुख़्ता करने के साथ साथ दुश्मनों की ताक़त को कमजोर करने का रिवाज सदियों पुराना है।

सत्ता की बड़ी और पुरानी क़िताबों में भी जासूसी का जिक्र है और सिर्फ जिक्र ही नहीं बल्कि उसका सत्ता में रहने और पूरी तरह से उस पर नियंत्रण करने का एक अहम रोल भी रहा है।

यानी दुनिया में जितने भी मुल्क हैं वो सभी अपने अपने दुश्मनों या उन तमाम देशों के खिलाफ जासूसी करते और करवाते रहते हैं जिनसे उन्हें किसी भी तरह का ख़तरा महसूस होता है। और इसके लिए हरेक देश के पास खुफिया एजेंसियां हैं या उनके खुफिया एजेंट्स हैं जिन्हें इस काम में अलग अलग तरीके से लगाया जाता है।

लेकिन बदलते वक़्त के साथ जासूसी के तौर तरीकें भी बदलते रहते हैं। ऐसे में आज की कहानी उस नई जासूसी की है जो नए ट्रेंड के मुताबिक इन दिनों अलग अलग एजेंसियां कर रही हैं।

आज की कहानी की शुरुआत होती है 2021 की। हिन्दुस्तान के राजस्थान में जोधपुर ज़िला है जहां भारतीय सेना का एक बहुत ही अहम महकमे का बेस है। वहीं एक भारतीय सेना का एक जवान पोस्टेड था। 24 साल का उस जवान के मोबाइल पर एक रोज एक अनजान नंबर से कॉल आती है। कॉल करने वाली लड़की थी, और वो किसी दूसरे जवान का नाम लेकर कहती है कि क्या आप फलां बोल रहे हैं।

रॉन्ग नंबर पर कॉल और खेल शुरू

Shams Ki Zubani: इस पर ये जवान उसे गलत नंबर होने यानी रॉन्ग नंबर की जानकारी देता है। मगर लड़की इस जानकारी को मज़ाक की बात कहती है और उस पर ज़ोर डालती है कि वो अपना वॉट्सऐप नंबर दे ताकि वो वीडियो कॉल के जरिए इस बात की तसल्ली कर सके कि जो बोल रहा वो कौन है और जवान को भी इस बात की तसल्ली दिलाना चाहती थी कि वो भी वाकई किसी को तलाश रही है जिस चक्कर में उसके पास उस जवान का नंबर पहुँचा है।

लड़की-- कौन संदीप बोल रहा है क्या ?

जवान -- नहीं आप कौन?

लड़की-- क्यों मजाक कर रहा है.. तू संदीप ही है...

जवान -- सच में मैं संदीप नहीं हूं.. आप कौन हो?

लड़की-- मैं संदीप की दोस्त बोल रही हूं.. आप संदीप नहीं हो तो मुझे अपना वॉट्सएप नम्बर बताओ.. मैं अभी उस पर वीडियो कॉल करती हूं..

वॉट्सऐप पर जब वो लड़की कॉल करके मुतमईन हो जाती है कि सामने जो जवान है वो कोई और है और जिसकी तलाश वो करती हुई दिख रही है असल में ये वो नहीं है। तब वो जवान ये जानने की कोशिश करता है कि आखिर उस लड़की को उसका नंबर कैसे और कहां से मिला। वो लड़की जो जवाब देती है उससे जवान को थोड़ा अटपटा लगता है लेकिन वो इसे मामूली और रोजमर्रा की घटना की तरह मान लेता है।

लड़की-- यार आप वो नहीं हो.. सॉरी, मैंने आपको डिस्टर्ब किया.. मैंने सोचा आप झूठ बोल रहे हैं.. इसलिए मैंने आपको कॉल किया..

जवान -- चलो, अब तो आपको तसल्ली हो गई कि मैं संदीप नहीं हूं.. अब आप बताओ कि मेरा नम्बर आपको कहां से मिला?

लड़की-- मैं भारतीय सेना में आर्मी मेडिकल कॉर्प्स यानी ए.एम.सी. विभाग मुंबई में लेफ्टिनेंट की पोस्ट पर हूं.. मैं जब मुंबई में टेनिंग कर रही थी, तब मैंने ये नंबर मेरी दोस्त से लिया था.. मेरी मुंबई में ए.एम.सी. की टेनिंग की क्लास लगती थी.. तब मैंने काम में मदद के लिये अपनी फेंड से नंबर मांगे थे तो उसने मुझे आपका नंबर दिया था..
जवान-- ऐसे कैसे मेरा नंबर वहां शेयर हो गया? मैं तो वहां कभी गया ही नहीं?

लड़की-- (इमोशनल होते हुए) यार.. देखो मैंने नौकरी हासिल करने के लिये कितना स्ट्रगल किया है.. मेरे पापा-भाई नहीं हैं.. एक मम्मी हैं और मैं हूं.. मैंने कितनी मुश्किल से यह नौकरी पाई है.. और तुम मुझसे इतने सारे सवाल जवाब कर रहे हो..

इस छोटी सी बातचीत के बाद अभी आर्मी का ये जवान इस उलझन में पड़ा था कि आख़िर ये माजरा? इंडियन आर्मी के एक जवान से एक गुमनाम लड़की की 15 से 20 मिनट की ये पहली बातचीत आनेवाले चंद महीनों में इंडियन आर्मी को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ खुद उस जवान को भी सलाखों के पीछे पहुंचा देगी, तब फ़ोन पर बातें करनेवाले उस जवान ने दूर-दूर तक ये नहीं सोचा था...

खूबसूरती के जाल में फंसा सेना का जवान

Shams Ki Zubani: लेकिन बातचीत का ये सिलसिला आगे बढ़ा और कुछ इतना बढ़ा कि जाने-अनजाने इंडियन आर्मी से जुड़ा जवान अपनी आर्मी यूनिट से जुड़ी कई ख़ुफ़िया और संदवेदनशील जानकारियों को अपनी इस नई-नवेली और चुलबुली दोस्त से साझा करता चला गया।

असल में इन जवान से फोन पर बात कर रही ये लड़की ने उसे जोर का झटका धीरे से देने की जमीन पहले ही तैयार कर ली थी। और इसकी शुरुआत उसने खुद को इंडियन आर्मी की एएमसी यूनिट से जुड़ा बताकर कर रही थी। उसने जवान से कहा कि वो अभी बेंगलुरू की एयरफोर्स यूनिट में एएमसी लेफ्टीनेंट के तौर पर तैनात है और अपना काम सीख रही है।

लेकिन ना तो ये लड़की इंडियन आर्मी से जुड़ी थी और ना ही कोई काम सीख रही थी... बल्कि वो पाकिस्तान खुफ़िया एजेंसी और वहां की फौज की ओर से प्लांट की गई, हनीटैप की एक ऐसी शातिर खिलाड़ी थी, जिसका काम ही इंडियन आर्मी के जवानों को फांस कर उनसे खुफ़िया और संवेदनशील जानकारियां इकट्ठा करना था... और अपने इस काम के पहले चरण में वो काफी हद तक कामयाब हो चुकी थी, क्योंकि वो आर्मी में गनर प्रदीप को अपनी झूठी बातों पर यकीन दिलाने के लिए काफी हद तक कामयाब हो चुकी थी...

लंबी बातों का सिलसिला और क़ातिल अदाओं का जाल

Shams Ki Zubani: लड़की ने अपना नाम रिया बताया था... और अब रिया और प्रदीप की दोस्ती हो चुकी थी... कम से कम प्रदीप को तो यही लग रहा था... अब दोनों में लंबी बातें भी होने लगी... और वीडियो कॉल का सिलसिला भी चल पड़ा... रिया अक्सर आर्मी की वर्दी में किसी दफ्तर में बैठी नज़र आती और घंटों बातें करती... धीरे-धीरे से बातचीत दोस्ती से प्यार मुहब्बत तक बढ़ गई और अब रिया कभी-कभी साज़िश के मुताबिक अपने कपडे तक उतार कर प्रदीप को ज़्यादा से ज़्यादा रिझाने की कोशिश करने लगी... और जवान रिया की खूबसूरती और अदाओं की जाल में बुरी तरह फंस चुका था..

जवान इसी साल 14 और 15 जनवरी को जैसलमेल के लाठी गांव में अपनी यूनिट के साथ सालाना युद्धाभ्यास के लिए पहुंचा था... और वहां से करीब हफ्ते भर बाद वापस लौट आया... लेकिन इस दौरान भी उसकी हर शाम रिया से बातें होती रही... और वो रिया के कहे मुताबिक उसे वहां चल रही ड्रिल की जानकारी देता रहा... और तमाम गतिविधियों की एक-एक तस्वीर भेजता रहा...

असल में रिया ने उससे ये जानकारियां जुटाने के लिए एक कहानी गढी थी... उसने जवान से कहा था कि उसकी अपने यूनिट में काम करनेवाली एक लड़की से लड़ाई हो गई, जिसके बाद सजा के तौर पर उसे वहां क्लर्क का काम सौंप दिया गया है... चूंकि उसे ये काम नहीं आता है, तो उसे मदद की दरकार है और फिर मदद के नाम पर वो जवान से अपनी यूनिट से जुड़ी जानकारी और तस्वीरें मांगने लगी... इधर, उसकी बातों पर यकीन कर प्रदीप उसे अपनी तैनाती वाली जगह की हरेक जानकारी मुहैया करवाने लगा...

जासूस हसीना की फरमाइश और फौज के जवान की जुबान

Shams Ki Zubani: जवान के जोधपुर लौट आने के बाद भी ये सिलसिला जारी रहा और ISI की जासूस रिया ने उससे कहा कि उसकी यूनिट में क्लर्क के पास जो डॉक्यूमेंट्स होते हैं, उसे अपने काम के लिए उन डॉक्यूमेंट्स की तस्वीरें चाहिए। इस पर जवान ने उसे चुपके से दो हिस्सों में कई पन्नों की तस्वीरें खींच कर भेजी। फिर नज़र बचा कर वहां की मिसाइल यूनिट की बैट्री रूम में रखे डॉक्यूमेंट्स की तस्वीरें भी निकाल कर रिया को भेज दी। उसने वहां के कंप्यूटर के कई स्क्रीनशॉट लेकर भी आगे बढ़ा दिए। जिनमें क्षमता, लोकेशन समेत कई खुफ़िया और संवेदनशील जानकारियां थीं।

इस दौरान रिया लगातार जवान को प्यार मुहब्बत की कहानियां सुनाती रही। वो व्हाट्सएप पर मीठी-मीठी बातें करती रहीं। मगर इस कहानी का अभी अंत नहीं हुआ था, बल्कि अपने जाल में फंस चुके आर्मी मैन से अभी पाकिस्तानी जासूस को और कई जानकारियां निकालनी थीं... अब रिया ने एक और चारा फेंका...

उसने मार्च 2022 के आखिरी हफ्ते में जवान से कहा कि अब उसका फोन यूनिट वालों ने जमा कर लिया है, अगर उसके पास कोई फोन है, तो जवान उस नंबर की व्हाट्सएप ओटीपी उसे दे दे तो फिर वो उसी नंबर से जवान से बात किया करेगी...

जब ज़ोर का झटका बहुत ज़ोर से लगा

Shams Ki Zubani: जवान ने उसे अपनी पुराने सिम का नंबर शेयर किया और ओटीपी भी दे दी... लेकिन जवान को तब पहली बार ज़ोर का झटका लगा, जब रिया ने उसे एक रोज़ दिल्ली मिलने के लिए बुलाया... जिस पर वो जवान तो दिल्ली में उसकी बताई जगह पर पहुंच गया, लेकिन रिया नहीं मिली... ऊपर से उसका फ़ोन भी स्विच्ड ऑफ हो चुका था...

असल में वो जवान के लिए ये झटके की शुरुआत भर थी... वो मार्च के महीने से ही राजस्थान पुलिस की सुरक्षा शाखा की रडार पर आ चुका था... पुलिस उसका फोन सर्विलांस पर लगा चुकी थी ... और आखिरकार 21 मई को उसे जयपुर में पूछताछ के लिए बुलाया गया और फिर गिरफ्तार कर लिया गया... लेकिन सच्चाई यही है कि तब तक वो जवान जाने-अनजाने इंडियन आर्मी को भी नुकलान पहुंचा चुका था... उसने सेना के ऑफिशियल फॉर्मेट, उससे जुड़े चिह्न, मिसाइल यूनिट की गोपनीय जानकारी समेत तमाम चीजें पाकिस्तानी जासूस के हवाले कर दी थी।

खूबसूरती का जाल ऐसे बुना जाता है

Shams Ki Zubani: जोधपुर के आर्मी कैंट में तैनात जवान का हनीटैप पाकिस्तान की ओर से जारी हनीटैप के इस खेल की एक बानगी भर है। असल में वहां की खुफ़िया एजेंसी ISI और पाकिस्तान की मिलिटी इंटेलिजेंस बेहद संगठित तरीके से ये सारा खेल, खेल रही है और खूबसूरत लड़कियों को जासूस के तौर पर हायर कर उन्हें भारतीय जवानों और अफ़सरों को फंसाने का काम सौंपती है और इस काम के लिए उन्हें बाकायदा टेनिंग दी जाती है...

ये वो खुलासा हैं, जो भारतीय एजेंसियों की जांच में निकल कर सामने आया हैं। खुफिया सूत्रों की मानें तो पाकिस्तान ने इस काम के लिए बाकायदा सात मॉड्यूल तैयार कर रखे हैं, जिसमें 25 से ज़्यादा लड़कियां अलग-अलग रोल में अलग-अलग टाइम पर हिंदुस्तानी जवानों और अफ़सरों को टार्गेट कर रही हैं... उसे सिलसिलेवार तरीके से समझा जा सकता है।

आईएसआई और पाकिस्तान की मिलिटी इंटेलिजेंस कराची, लाहौर और हैदराबाद जैसे शहरों में खूबसूरत लडकियों और सेक्स वर्कर्स को इस काम के लिए तैयार करती है। इन लड़कियों के सेलेक्शन का सबसे पहला पैमाना उनकी खूबसूरती ही होती है। कई बार इस काम के लिए कॉलेज गर्ल्स को भी अलग-अलग किस्म का लालच देकर तैयार कर लिया जाता है। इन लड़कियों को टेनिंग के बाद इंडियन फोर्सेज़ के जवानों और अफ़सरों से बातचीत करने के लिए तैयार किया जाता है। इस टेनिंग में उन्हें इंडियन फोर्सेज के बारे में जानकारी दी जाती है। अफ़सरों के रैंक, यूनिट के बारे में जानकारी और उनकी लोकेशन के बारे में बताया जाता है। हनीटैप के इस पूरे खेल के दौरान मिलिटी इंटेलिजेंस के अफसर भी उन्हें मोनिटर करते रहते हैं। यानी इन लड़कियों का रोल एक कठपुतली से ज़्यादा कुछ नहीं होता। जिन्हें बाद में या तो हटा दिया जाता है या फिर नया काम सौंपा जाता है।

हनीट्रैप की गहरी साज़िश और उसके टार्गेट

Shams Ki Zubani: पाकिस्तानी हनीटैप की इस साज़िश के टार्गेट पर इंडियन आर्मी के साथ-साथ एयरफोर्स, नेवी, डीआरडीओ, रेलवे और बीएसएफ से जुडे जवान और अफ़सर शामिल होते हैं। और इस पूरे मिशन में इस बात का पूरा ख्याल रखा जाता है कि लड़कियों को अपने टार्गेट के सामने ऐसे पेश किया जाए, जिससे टार्गेट को दूर-दूर तक उन पर शक ना हो और उनकी असलियत पता ना चले। इसके लिए टेनिंग के बाद लड़की आर्मी कैंट या वहां के किसी कॉलेज में एक कमरा दे दिया जाता है। जिसे वो लडकी अपने कमरे के तौर पर टार्गेट को दिखाती है।

कमरे की दीवारों पर भगवान की तस्वीरें, पूजा पाठ की सामग्री रखी होती है। यहां तक कि इस दौरान लड़कियों को सिर्फ़ और सिर्फ़ इंडियन डेस पहनने की ही इजाजत होती है। और वीडियो कॉल में ये चीजें देख कर इंडियन आर्मी से जुडे जवानों और अफसरों को इन लड़कियों के हिंदू होने का पूरा यकीन हो जाता है।

असल में ऐसा करने के पीछे फ़ोकस पाकिस्तान से हिंदुस्तान शिफ्ट करने का होता है, ताकि किसी भी कीमत पर लड़कियों की पोल ना खुलने पाए।
बात अगर मॉडस ऑपरेंडी यानी अफ़सरों और जवानों को फंसाने के तौर तरीके की। तो इसकी शुरुआत होती है दोस्ती से। पाकिस्तानी हनीटैप रैकेट में शामिल ये लड़कियां पहले सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी बना कर जवानों और अफसरों की तलाश करती हैं और फिर उन्हें फेंड रिक्वेस्ट भेजती हैं... प्लानिंग के मुताबिक रिक्वेस्ट एक्सेप्ट होते ही बातचीत, दोस्ती, प्यार मुहब्बत का सिलसिला शुरू हो जाता है... यहां तक कि इस दौरान जवानों और अफ़सरों से शादी का वादा तक किया जाता है... भरोसा जमाने और उसे बनाए रखने के लिए ऐसी लड़कियां जरूरत के मुताबिक बगैर कमरों के भी वीडियो चैट शुरू कर देती हैं... और इस तरह के न्यूड टॉक के दौरान तमाम तरह की कहानियों के साथ जाल में फंस चुके जवान या अफ़सर से गोपनीय जानकारियां जुटा ली जाती हैं.. अगर कहीं शिकार जानकारी या तस्वीरें देने से इनकार कर दें, तो फिर ये जासूस उन्हें ब्लैकमेल करने लगती हैं..

हनीट्रैप की साज़िश के सात मॉड्यूल

Shams Ki Zubani: इसके लिए ये लड़कियां पहले अपने टार्गेट से व्हाट्सएप की ओटीपी हासिल कर लेती हैं और फिर उसी नंबर से चैट करती हैं, ताकि किसी को भी नंबर भारत के एसटीडी कोड +91 से शुरू हो और चैट करनेवाली लड़की भी भारत की ही लगे। पाकिस्तान में इस काम के लिए जो सात मॉड्यूल एक्टिव हैं, उनमें

पाकिस्तान की इंटेलिजेंस एजेंसी

आईएसआई आर्मी इंटेलिजेंस लाहौर

पाकिस्तान मिलिट्री इंटेलिजेंस यूनिट 412

आईएसआई कराची

मालिर कैंट यूनिट

पाकिसतान एयरफोर्स 552 मॉड्यूल

चकलाला कैंट रावलपिंडी

शामिल हैं...

सेना के जवान के पकड़े जाने के बाद ही ये पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी की चाल का पर्दाफाश हो सका फिलहाल हनीटैप के इस लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए अब इंडियन आर्मी समेत हमारे देश की तमाम संवेदनशील इकाइयों ने इसके लिए जवानों और अफ़सरों को अलग से जागरूक करना शुरू कर दिया है।

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