मां की लाश के साथ लिखता रहा 77 पेजों का सुसाइड नोट!

Shams Ki Zubani: शम्स की जुबानी में आज बात उस किस्से की, जिस घटना ने दिल्ली में झकझोर कर रख दिया। बात करते है उस लड़के की जिसने खुदकुश की और उसके बाद छोड़ गया 77 पेजों का सुसाइड नोट।
Shams Ki Zubani:
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Shams Ki Zubani: बात दिल्ली की एक अजीबोगरीब घटना की। दिल्ली के बुध विहार इलाके में एक 25 साल के एक लड़के ने खुदकुशी कर ली, लेकिन खुद को मारने से पहले उसने अपनी मां की हत्या की। पूरे चार दिनों तक अपनी मां के शव के साथ एक ही घर में रहा। उसने 77 पन्नों का सुसाइड नोट लिखा। ये सुसाइड नोट दक्षिण भारतीय भाषा कन्नड़ में लिखा गया था।

क्या था इस सुसाइड नोट में ? बताते है आपको। लड़के का नाम क्षितिज था। उसकी मां का नाम मिथिलेश था। ये वारदात बीते 1 सितंबर की है, लेकिन क्षितिज ने मां की हत्या तीन रोज पहले ही कर दी थी।

मां के फोन पर उनकी सहेली ने जब फोन किया तो राज खुल गया...

दरअसल, घटना वाले दिन मिथिलेश की सहेली ने उन्हें फोन किया। फोन क्षितिज ने उठाया। उन्होंने पूछा कि उसकी मां का फोन क्यों नहीं उठ रहा है। तब क्षितिज ने ये कहकर उनके होश उड़ा दिए थे कि उसने अपनी मां की हत्या कर दी है और अब वो खुद की हत्या करने जा रहा है। ये सुनकर मिथिलेश की सहेली सहम गई। उन्होंने तुरंत पुलिस को फोन किया और सारी बात बताई। रविवार रात आठ बजे पुलिस की टीम जब घर पहुँची तो घर के सभी दरवाजे बंद थे। जैसे तैसे पुलिस घर की बालकनी से भीतर दाखिल हुई तो उसे मां बेटे की लाशें मिलीं। मां का शव बाथरूम में था जबकि क्षितिज कमरे में मरा पड़ा था। उसका भी गला कटा हुआ था और चारों तरफ खून बिखरा हुआ था।

एक डायरी, डायरी के आखिरी 77 पेजों में दो मौतों की कहानी...

Shams Ki Zubani: क्षितिज की लाश के पास से पुलिस को एक डायरी मिली। इस डायरी के आखिरी 77 पन्नों में दो मौतों की वजहें लिखी हुई थी। 77 पन्नों के सुसाइड नोट में क्षितिज ने लिखा कि वो डिप्रेशन का शिकार है। सुसाइड नोट के मुताबिक, उसने अपनी मां की तार से गला घोंटकर हत्या की थी जबकि बाद में कटर से गला काट दिया था। क्षितिज ने सुसाइड नोट में लिखा कि उसने अपनी बीमार मां को उसकी बीमारी से मुक्ति दे दी। वो दो दिन तक अपनी मां की लाश के साथ ही रहा। उसने अपनी मां के शरीर पर गंगा जल डाला और भगवत कथा भी पढ़ी। घर में शव के खराब होने पर बदबू को दूर करने के लिए उसने लगातार डियो भी छिड़का।

Shams Ki Zubani: क्षितिज ने जो सुसाइ़ड नोट लिखा, उसके मुताबिक, उसका कोई दोस्त नहीं था। पिता की मौत के बाद घर की माली हालात बहुत खराब हो गई थी। साथ ही मां भी अक्सर बीमार रहने लगी थी। बीते कुछ वक्त से उसकी भी तबीयत ठीक नहीं थी। इलाज करवाने के पैसे भी नहीं थे।

वो बताया है कि उसकी परवरिश अच्छी हुई। उसके पापा की सरकारी नौकरी थी। उन्होंने उसे नामचीन स्कूल में पढ़ाया। बाद में वो इग्नोर करने लगे। वह क्लास में सबसे डरपोक, दब्बू बच्चा था। दोस्त के नाम पर उसके दो ही दोस्त थे। जो मजाक उड़ाते थे। उसने कई बार टीचर से शिकायत की, लेकिन कोई नहीं सुनता था। स्कूल बस में चढ़ते उतरते समय उसके अंदर अजीब सा डर, शर्म, घबराहट रहती थी। उसकी मां उसकी उम्मीद थी। पापा के जाने के बाद मां और वो अकेले पड़ गए। उसके पापा उनको ऐसे समय में छोड़कर चले गए, जब उनको सबसे ज्यादा जरूरत थी।

Shams Ki Zubani: क्षितिज बताता है कि उसकी मां कहती थी कुछ छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दे। यह सुनकर वो डर गया था। वो दसवीं में था तो उसके पिता की मौत हो गई। वो 14 साल बाद जन्मा था। क्षितिज इकलौता बेटा था। उसने दिल्ली यूनिवर्सिटी के एसओएल कोर्स में एडमिशन लिया, लेकिन वहां भी फेल हो गया। कुल दो बार विफल हुआ। क्षितिज पांच दिनों से सोया नहीं था। उसे कई बीमारियों ने घेर लिया था।

क्षितिज के मुताबिक, उसके पापा बहुत बहादुर थे। उसकी मां ने एक बार बताया था कि जब वह छोटा था, पापा उसे गोद में लेकर अस्पताल गए। वहां बंदर ने उस पर अटैक कर दिया था, लेकिन उसके पिता ने उसे कस कर पकड़ रखा था और उन बंदरों को भगा दिया।

वो आखिरी चार दिन...

गुरुवार का दिन

Shams Ki Zubani: गुरुवार से उसने सुसाइड नोट लिखना शुरू किया और इतवार को उसने खुदकुशी की। गुरुवार को सबसे पहले उसने अपनी मां का कत्ल किया। क्षितिज ने अपने सुसाइड में लिखा था कि वो दो साल से मरना चाहता था, मरने से पहले अपनी मां को दुख से आजाद करना चाहता है। हर इतवार को मां सत्संग में जाती थीं। पिछली बार भी मां जब वहां से आईं, थोड़ी कहासुनी, थोड़ी हंसी भी हुई थी। मां की आंखों में जाला आ गया है, लगता है मोतियाबिंद है। अब तो वह मर जाना चाहता है। गुरुवार है आज। बाइक की केबल का इस्तेमाल उसने मां के गले को घोंटने के लिए किया है। ताकि मां को मरने से दर्द न हो।

Shams Ki Zubani: जैसे ही उसने वायर कसा। मां 4 से 5 सेकंड में निढाल होकर गिर गईं। उसे पता था दिमाग में ऑक्सीजन नहीं पहुंचने पर मौत हो जाती है। मां के गिरते ही उसने उसका सिर अपनी गोद में रख लिया। आठ से दस मिनट तक गला दबा कर रखा। वो मुंह दबाकर रोये जा रहा था। उसे पापा की बहुत याद आ रही है। मरने के बाद भी मां की आंखें खुली थीं। उसने बंद करने की कोशिश की, मगर हो न सकीं।

शुक्रवार

गंगाजल से धोया मां का चेहरा

शुक्रवार है आज। मां की लाश को देखा नहीं जा रहा। उसने अपनी मां के चेहरे को गंगाजल से धोया है। उनके पास बैठकर भगवत गीता का 18वां अध्याय पढ़ा है। वह पूरी भगवत गीता नहीं पढ़ सका। उसने भगवत गीता को मां के सीने पर रख दिया है। अब बारी थी उसके सुसाइड करने की। पहले उसने पिस्टल खरीदने की कोशिश की। फिर इलेक्ट्रिक कटर खरीदने बाजार गया। दो दुकानदारों से इलेक्ट्रिक कटर मांगा। दोनों ने नहीं दिए। पता नहीं क्यों वो उससे अजीब सवाल करने लगे। रात को वो घर लौटा और मां की लाश के पास बैठकर खूब रोया। पापा होते तो क्या होता?

तीसरा दिन शनिवार

मां की मौत को आज 71 घंटे हो चुके हैं। बदबू आने लगी है। मां की गर्दन को कटर से काट दिया है। शुक्रवार की शाम से बदबू आने लगी थी। वह मां की लाश को घसीट कर बाथरूम में ले गया। दरवाजा बंद कर दिया है ताकि बदबू न आए। वो बस सुसाइड नोट पूरा करना चाहता है। बदबू घर में फैल चुकी है। आज शनिवार है। तीन दिन से वो खाली पेट है। कुछ खाया ही नहीं। उसे याद आया रसोई में उसने गरम पानी पीने को रखा है।

सुसाइड नोट (रविवार का दिन)

Shams Ki Zubani: कमरे में बदबू नहीं रुक रही। इससे उसकी भी तबीयत बिगड़ने लगी है। उसने लकड़ी की पेंसिल के बुरादे को जलाया है। धूपबत्ती जलाई है। घर में एक जायफल रखा था, उसे भी जलाया है। सारा डियो भी छिड़क दिया है। वो मास्क लगाकर सुसाइड नोट पूरा करेगा। आज रविवार है। इस समय दोपहर के दो बज रहे हैं। अब तक तीन दिन से प्रॉपर्टी डीलर फ्लोर किराए पर दिखाने के लिए तीन बार किराएदारों के साथ आ चुका है, लेकिन आज हर हालत में वो नोट पूरा कर लेगा।

Shams Ki Zubani: आज इतवार है, मां को सत्संग जाना है। मां की सहेली बार-बार फोन कर रही है। पहले मां के फोन पर, अब मेरे फोन पर घंटी बज रही है। उसने फोन उठाया। मां की सहेली पूछ रही हैं मिथलेश फोन नहीं उठा रही हैं, कहां हैं? उसने कहा कि मां तो मर चुकी हैं, उसने चार दिन पहले ही मार दिया, अब वह मरने की तैयारी कर रहा है। यह सब देखना बहुत डरावना है। पापा के जाने के बाद मां के जीजा ने पिता की तरह उनकी देखभाल की, इसलिए वह कहता है कि उसके मरने के बाद उसकी बाइक उनके नाम होगी। मां का अंतिम संस्कार उसकी मौसी करें।

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