बड़े देशों ने अपने नागरिकों को यूक्रेन में फंसा छोड़ा, भारत का ‘ऑपरेशन गंगा’ सबसे आगे..

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण ने लगभग 150,000 लोगों को पड़ोसी देशों में पलायन करने के लिए मजबूर कर दिया.
बड़े देशों ने अपने नागरिकों को यूक्रेन में फंसा छोड़ा, भारत का ‘ऑपरेशन गंगा’ सबसे आगे..

यूक्रेन पर रूस के अटैक ने पूरी दुनिया को थर्रा दिया है। यूक्रेन में रह रहे भारत, अमेरिका, अफ़्रीका, यूरोप और कई देशों के लोग वहां से अपनी जान बचाकर भाग रहे हैं। सभी नागरिक अपने-अपने देश से मदद की गुहार भी लगा रहे हैं। इस मामले में सबसे आगे भारत आया है,जबकि दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश कहे जाने वाले अमेरिका और चाइना ने फ़िलहाल अपना पल्ला झाड़ दिया है.

भारत का ऑपरेशन गंगा सबसे बेहतर

इस संकट की घड़ी में Operation Ganga चलाकर भारत अपने सभी नागरिकों को जल्द से जल्द देश वापस लाने की कोशिश में जुटा हुआ है वहीं इन बड़े-बड़े देशों ने किसी इस मुश्किल घड़ी में अपने नागरिकों को यूक्रेन में जूझने क लिए छोड़ दिया है।

“अपने बलबूते पर करें बंदोबस्त”

अमेरीका ने अपने यूक्रेनी दूतावास के वेबसाइट पर एक ट्रैवल एडवाइज़री जारी की है, जिसके तहत उसने अपने नागरिकों को कहा है कि अगर आपके लिए सुरक्षित और संभव हो तो ही यूक्रेन छोड़कर निकलें. वहां से निकलने का बंदोबस्त वो खुद अपने बलबूते पर करें. वो कमर्शियल या प्राइवेट, कोई भी का साधन चुन सकते हैं. अमेरीका ने कहा है कि वहां फंसे नागरिक वहां के सरकार की निजी सूचनाओं से जुड़े रहें, मीडिया अपडेट को भी जानते रहें और अपने लिए खुद ही सुरक्षित जगह तलाशें. साथ ही ये भी कहा कि जिन लोगों ने भी यूक्रेन में ही रुकने का फैसला लिया है, उनके लिए एक फॉर्म उपलब्ध कराया गया है, जिसको अप्लाई करने के बाद उन्हें सरकार की तरफ़ से प्रतिक्रिया मिल जाएगी।

चीन कैसे कर रहा है रेस्क्यू?

यूक्रेन में चीन के राजदूत ने कहा कि नागरिकों को निकालने के लिए वहां के मौजूदा हालात बहुत असुरक्षित थे. वो रूसी आक्रमण के बाद लोगों को छोड़ने में मदद करने की योजना तैयार करेंगे. दूतावास के आधिकारिक वीचैट अकाउंट पर एक लंबे वीडियो संदेश में चीनी राजदूत फैन जियानरोंग ने अफवाहों को दूर करने की मांग की और युद्धग्रस्त इलाके में फंसे चीनी नागरिकों को उनकी मदद का भरोसा दिलाया. चीनी राजदूत ने कहा कि हमें पहले सुरक्षित होने तक इंतज़ार करना चाहिए. जब तक सुरक्षा शर्तों को पूरा किया जाता है, तब ही सभी की सुरक्षा की गारंटी दी जाती है. हम उसी को ध्यान में रखकर उचित व्यवस्था करेंगे

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण ने लगभग 150,000 लोगों को पड़ोसी देशों में पलायन करने के लिए मजबूर कर दिया. वहीं हफ्तों पहले यूएस, यूके और जापान सहित कई देशों ने अपने राजनयिकों को निकाल लिया था और नागरिकों से भी यूक्रेन छोड़ने के लिए कहा था. चीन ने यह घोषणा करने से पहले गुरुवार तक इंतज़ार किया कि वह अपने नागरिकों को निकालने के लिए चार्टर उड़ानें तैयार करेगा। यूक्रेन में लगभग 6,000 चीनी नागरिक थे। इसके अलावा चाइनीज़ दूतावास ने कीव छोड़ने वाले अपने नागरिकों को अपने वाहनों पर चीनी झंडा लगाने को कहा था।

जर्मन दूतावास भी हुआ बंद

ब्रिटने ने ये साफ किया है कि वो यूक्रेन में फंसे अपने नागरिकों को अधिक सहायता नहीं दे पाएगा. जबकि भारत युद्ध स्तर पर अपना हाथ आगे बढ़ा रहा है. सूत्र के मुताबिक ‘ ब्रिटिश दूतावास स्थानांतरित हो गया है जबकि कीव में भारतीय दूतावास अब भी काम कर रहा है’. वहीं ब्रिटने ने अपने नागरिकों को कोई सहायता ना देते हुए यूक्रेनी अधिकारियों की सलाह का पालन करने को कहा है.

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