How to register an FIR in case of car theft? गाड़ी चोरी होने पर FIR कैसे दर्ज करवाएं ?

How to register an FIR in case of car theft? गाड़ी चोरी होने पर FIR कैसे दर्ज करवाएं ?

How to register an FIR in case of car theft?

गाड़ी चोरी होना अब आम बात हो चली है, लेकिन क्या आपको पता है कि गाड़ी चोरी होने की स्थिति में कैसे FIR दर्ज होती है और कैसे क्लेम SETTLE होता है ? आइए इस रिपोर्ट के जरिए समझते है।

1. गाड़ी चोरी होने पर FIR कैसे दर्ज करवाएं ? (How to register an FIR in case of car theft?)

अगर आपकी कार या दूसरा वाहन चोरी हो गया है तो FIR दर्ज कराने के लिए दिल्ली में आप आनलाइन और आफलाइन शिकायत दर्ज कर सकते है। आनलाइन के लिए आपको दिल्ली पुलिस की वेबसाइट में जाकर log in कर डिटेल्स भरनी होगी। google में delhi police type करे। automatically https://delhipolice.gov.in/ साइट खुल जाएगी। ये दिल्ली पुलिस की साइट है। साइट में MV THEFT E FIR कालम है। इसमें जाकर आप शिकायत दर्ज करा सकते है। इसमें आपको DETAILS भरनी होगी कि गाड़ी किन हालातों में चोरी हुई, कहां से, कब, कैसे चोरी हुई ? कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में offline यानी थाने में जाकर भी शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है।

2. गाड़ी चोरी होने पर क्या-क्या कागजातों की जरुरत होती है? (What documents are needed in case of car theft?)

गाड़ी के जरूरी कागजात पहले तो समझ लीजिए की होते कौन कौन से है। गाड़ी की RC यानी REGISTRATION CERTIFICATE, POLLUTION CERTIFICATE और गाड़ी का INSURANCE। पहले इन सभी DOCUMENTS की फोटो कापी आपके पास होनी चाहिए ताकि आप पुलिस को तुरंत ये सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध करवा सके। इस कड़ी में कार या गाड़ी चालक का DRIVING LICENSE होना भी बहुत आवश्यक होता है।

3. गाड़ी चोरी होने पर बीमा कंपनी को सूचना देना क्यों अनिवार्य होता है? (Why is it necessary to inform the insurance company in case of theft of a vehicle?)

ऐसा इसलिए जरूरी होता है ताकि आप क्लेम ले सके। ऐसा नहीं होने पर आपको क्लेम नहीं मिलेगा। इसके लिए बाकायदा पुलिस के साथ साथ आपको बीमा कंपनी को भी वाहन चोरी की जानकारी देनी होती है। इसमें उसे FIR की COPY उपलब्ध करानी होती है ताकि वो आपका क्लेम पास कर सके और आपको वाहन के बदले अनुचित रुपए मिल सके। इसके लिए आपको अपना AADHAR CARD, DRIVING LICENSE, CAR RC, INSURANCE कापी आदि दस्तावेज उपलब्ध कराने होते है।

4. गाड़ी चोरी होने पर RTO को जानकारी देना क्यों जरूरी है? (Why is it necessary to inform RTO in case of vehicle theft?)

वैसे मूलत: ये काम पुलिस का होता है। इस सिलसिले में FIR होने के बाद पुलिस ही RTO को जानकारी मुहैया कराती है। RTO का मतलब क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय है, जिसे RTA (क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण) के रूप में भी जाना जाता है। यह हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में मौजूद है। आरटीओ मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के कार्यों और गतिविधियों को पूरा करने के लिए जिम्मेदार है। इसके पास डाटा होता है ताकि ये पता चल सके कि कौन सी गाड़ी चोरी हुई या और कौन सी नहीं।

5. गाड़ी चोरी होने की कंप्लेंट की जानकारी कैसे ले? (How to get information about car theft complaint?)

जब आप आनलाइन या आफ लाइन शिकायत दर्ज करवाते है तो पुलिस की तरफ से आपको acknowledgement मिलती है। यानी आपने शिकायत जैसे भी दर्ज करवाई है, उस स्थिति में आपको स्टैप और पुलिस अधिकारी के साइन वाली कापी मिलती है। इस तरह से आप निश्चिंत हो सकते है कि आपकी शिकायत दर्ज हो गई है। पुलिस आपको समय समय पर केस से संबंधित अपडेट भी SMS या MAIL के जरिए मुहैया करवाती है। आप इस सिलसिले में केस के IO यानी INVESTIGATING OFFICER से भी जानकारी ले सकते है और अपने केस से संबंधित UPDATE ले सकते है।

6. गाड़ी चोरी होने पर Insurance Company की चीटिंग से अपने आपको किस प्रकार बचाए ? (How to protect yourself from insurance company cheating in case of car theft?)

वैसे ऐसी परिस्थिति कम पैदा होती है। लेकिन फिर भी इसके लिए आपके पास बीमा कंपनी से आपको मिली ORIGINAL POLICY होनी चाहिए। साथ साथ घटना की FIR COPY भी होना अति आवश्यक है।

7. गाड़ी चोरी होने पर बीमा सेटलमेंट कैसे होता है? (How is the insurance settlement done in case of car theft?)

इसके लिए आपको सबसे पहले अपनी POLICY के बारे में संबंधित बीमा कंपनी के सूचित करना होता है। उसके बाद कार चोरी की FIR कापी देनी होती है। फिर कंपनी दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद क्लेम फाइनल करती है। वो कार की वेल्यू लगाती है और क्लेम पास करती है।

कानूनी जानकार बताते हैं कि गाड़ी चोरी का मामला संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है और पुलिस को केस दर्ज करना अनिवार्य है। ऐसे मामले में IPC की धारा 379 के तहत केस दर्ज किए जाने का प्रावधान है और यह मामला गैर जमानती और संज्ञेय होता है। CRPC के मुताबिक ऐसे मामले में एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है।

Related Stories

No stories found.