What is Sexual Harassment? यौन उत्पीड़न क्या है? ऐसे केस में कितनी है सजा? जानिए

What is Sexual Harassment? यौन उत्पीड़न क्या है? ऐसे केस में कितनी है सजा? जानिए
प्रतीकात्मक तस्वीरSOCIAL MEDIA

यौन उत्पीड़न क्या है ? (What is sexual harassment?)

किसी भी तरह की यौन गतिविधि जिसमें सहमति न हो, उसको यौन उत्पीड़न कहा जाता है। यह पूर्ण रूप से इच्छा के विरुद्ध की गई यौन गतिविधि होती है। इसमें आपके साथ किसी भी तरह के शारीरिक संपर्क बनाए जाने को शामिल किया जाता है। यह न सिर्फ महिलाओं, बल्कि बच्चों और पुरुषों के साथ भी हो सकता है।

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कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न क्या होता है ? (What is Sexual harassment of women at Workplace?)

सन् 2013 में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न अधिनियम को पारित किया गया था। जिन संस्थाओं में दस से अधिक लोग काम करते हैं, उन पर यह अधिनियम लागू होता है। ये अधिनियम, 9 दिसम्बर, 2013, में प्रभाव में आया था। जैसा कि इसका नाम ही इसके उद्देश्य रोकथाम, निषेध और निवारण को स्पष्ट करता है। उल्लंघन के मामले में पीड़ित को निवारण प्रदान करने के लिये भी ये कार्य करता है।

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कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की समस्या क्यों बढ़ रही है ? (Why are cases of sexual harassment at the workplace increasing?)

ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि कार्यस्थल पर अब महिलाएं और पुरूष दोनों समान रूप से काम कर रहे है। दुर्भाग्यवश, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न कामकाजी महिलाओं के लिए एक आम समस्या है। देश में हर दिन किसी न किसी दफ्तर में कोई न कोई महिला इस समस्या से सामना करती है। एक सर्वे से पता चलता है कि शिकायत न कराने का मुख्य कारण कानूनी प्रक्रिया में विश्वास की कमी, अपने करियर के प्रति चिंता और आरोपियों को कोई सजा नहीं मिल पाना है।

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यौन उत्पीड़न की शिकायत कौन कर सकता है ? (Who can make a complaint of sexual harassment?)

जिस महिला के साथ कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न हुआ है, वह शिकायत कर सकती है।

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यौन उत्पीड़न की शिकायत कहां की जा सकती है ? (Where can women file a complaint of sexual harassment?)

अगर आपके संगठन/संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति है तो उसमें ही शिकायत की जा सकती है। ऐसे सभी संगठन या संस्थान जिनमें 10 से अधिक कर्मचारी हैं, आंतरिक शिकायत समिति गठित करने के लिए बाध्य हैं। अगर संगठन ने आंतरिक शिकायत समिति नहीं गठित की है तो पीड़ित स्थानीय शिकायत समिति में शिकायत दर्ज करा सकती है। दुर्भाग्य से कई राज्य सरकारों ने इन समितियों को पूरी तरह से स्थापित नहीं किया है और किससे संपर्क किया जाए, यह जानकारी ज्यादातर मामलों में सार्वजनिक नहीं हुई है। शिकायत करते समय घटना को घटे तीन महीने से ज्यादा समय नहीं बीता होना चाहिए और यदि एक से अधिक घटनाएं हुई है तो आखिरी घटना की तारीख से तीन महीने तक का समय पीड़ित के पास होता है।

यौन उत्पीड़न के दोषी को कानून में कितनी सजा का प्रावधान है ? (What is the provision of punishment in the law for the guilty of sexual harassment?)

इसमें तीन वर्ष कारावास या आर्थिक दंड या दोनों मिल सकती है। यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

आपको इसका अर्थ यानी कि आईपीसी (Indian Panel Code) की धारा 354 का अर्थ आसान भाषा में बताते हैं। यहां इस सेक्शन में स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर किया गया हमला या आपराधिक बल का प्रयोग करना जैसी वारदातें आती हैं, जिसके तहत आरोपी को 1 साल के लिए कारावास, जो 5 वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माने की सजा का प्रावधान बताया गया है, लेकिन अब इसमें आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2013 (Sexual Harassment Act) द्वारा इसमें धारा 354 की कई उपधाराएं तैयार करके 354 A, 354 B, 354 C, 354 D जोड़ी गयी हैं।

IPC Section 354A ( IPC Section 354A. Sexual harassment and punishment for Sexual Harassment )

भारतीय दंड संहिता की धारा 354 A के अनुसार, जो व्यक्ति

किसी महिला को गलत निगाह रखते हुए छूता है; या

उसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए कहता है; या

उसे उसकी इच्छा के विरुद्ध अश्लील साहित्य/पुस्तकें दिखाता है; या

उस महिला पर अश्लील टिप्पणी/छीटाकशी करता है,

वह यौन उत्पीड़न का दोषी होगा और उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा जिसे तीन वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या आर्थिक दंड, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

किस अपराध में है कितना सजा?

1. यौन उत्पीड़न (अनुच्छेद 1, 2, 3)

सजा - तीन वर्ष कारावास या आर्थिक दंड या दोनों।

यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।​

2. यौन उत्पीड़न (अनुच्छेद 4)

सजा - एक वर्ष कारावास या आर्थिक दंड या दोनों।

यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।

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