Shams Ki Zubani: क़िस्सा एक ऐसी क़ातिल हसीना का जिसने पैसों की ख़्वाहिश में शादी को पेशा बना लिया

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Shams Ki Zubani: ये कहानी एक खूबसूरत कश्मीरी महिला की है जो बेहद भोली भाली और दिखने में मासूम थी, जो अपनी खूबसूरती के जाल में सेना के जवानों को फंसाती थी, उनके साथ शादी करती थी और फिर पैसों की ख़ातिर उनकी हत्या कर देती थी। ये क़िस्सा बॉलीवुड की किसी मसाला फिल्म की तरह ही है। जहां इश्क़ और धोखे के साथ साथ हत्या जैसा सिलसिलेवार संगीन जुर्म भी है।

ये कहानी मुहीना बेगम की है जो असल जीवन में हीरोइन की बजाए खलनायिका बनकर ज़माने के सामने आई। कहा जाता है कि उसने सरकार से मुआवजे की रकम लेने और पति की संपत्ति को विरासत में लेने के लिए ही दो दो पतियों को मौत के घाट उतार दिया।

कहानी की शुरूआत होती है कश्मीर के सोपोर इलाके से। जहां मुहीना का परिवार रहा करता था। अच्छा खासा खाता पिता परिवार। भोली भाली मुहीना एक पढ़ी लिखी लड़की थी। स्कूल के बाद कॉलेज में भी उसने अपनी पढ़ाई लिखाई को बढ़े ही ढंग से मुकम्मल किया।

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1999 में सयानी हो चुकी मुहीना की उसके घरवाले शादी कर देते हैं। ये शादी होती है एक फौजी से। नाम था तारीक अहमद शेख। तारीक जम्मू कश्मीर में भारतीय सेना की लाइट इंफेंट्री यूनिट में तैनात था। मई 1999 में मुहीना की शादी तारीक अहमद शेख के साथ हो जाती है। शादी के अगले तीन साल तक सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था। इस दौरान तारीक अपनी ज़िम्मेदारियों को बखूबी निभा रहा था और मुहीना भी परिवार की देखभाल में उसका पूरा साथ दे रही थी।

Shams Ki Zubani: अचानक 18 दिसंबर 2002 की रात को सोपोर में कुछ आतंकवादियों के हमले में तारीक अहमद शेख की मौत हो जाती है। तारीक अहमद शेख पर AK-47 से गोलियां चलाई गई थीं। तारीक की मौत के बाद उसकी यूनिट के साथ साथ घर परिवार और मुहीना भी सदमे में डूब जाते हैं। वक़्त बीतता है और जम्मू कश्मीर की सरकार के कायदे के मुताबिक शहीद हुए तारीक अहमद शेख की विधवा को सरकारी मुआवजा दिया जाता है। ये करीब 13 लाख रुपये की रकम थी जो सरकार की तरफ से मुहीना के नाम पर चेक जारी करके दिया जाता है। क्योंकि वही तारीक अहमद शेख की मौत के बाद उस मुआवजे की हक़दार थी।

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सरकार से मुआवजे के तौर पर 13 लाख रुपये मिलने के बाद मुहीना एक बार फिर अपनी ज़िंदगी में खो जाती है।

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थोड़ा वक़्त बीतने के बाद जब मुहीना तारीक की मौत के सदमे से उभरी तो घरवालों ने उसकी दूसरी शादी का इरादा किया। अपनी पूरी ज़िंदगी यादों के सहारे काटने के बजाए मुहीना ने सच का सामना किया और दूसरी शादी के लिए रज़ामंदी जाहिर कर दी।

इस बार मुहीना बेगम की शादी तस्वीर अहमद मलिक से तय हुई। इत्तेफाक से तस्वीर अहमद मलिक भी भारतीय सेना से था और 22 वीं राष्ट्रीय राइफल में तैनात था। तस्वीर राष्ट्रीय राइफल के इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट में काम करता था।

शादी के बाद दोनों तस्वीर मलिक और मुहीना दोनों ही अपनी नई ज़िंदगी में रम जाते हैं। जिंदगी भी ढर्रे पर लौट जाती है। शादी को कुछ वक़्त बीता। क़रीब तीन साल के बाद अचानक एक रोज एक आतंकवादी हमले में तस्वीर मलिक शहीद हो जाते हैं। इत्तेफाक ये कि इस बार भी गोली AK47 से ही चलाई गई थीं और निशाना बने थे तस्वीर मलिक।

Shams Ki Zubani: ये अजीब इत्तेफाक था, कि मुहीना की शादी के तीन साल बाद ही दूसरे शौहर को भी आतंकवादियों ने गोलियों से छलनी कर दिया। जाहिर है कि ज़माने भर की हमदर्दी मुहीना बेगम के साथ होती है। मुहीना दोबारा विधवा हुई। मुहीना की तस्वीर के साथ शादी को तीन साल पूरे हो चुके थे। इस बीच सरकार ने शहीद की विधवा को दिए जाने वाले मुआवजें की रकम बढ़ा दी थी।

पहले जो रकम 13 लाख रुपये की थी अब वो 15 लाख रुपये हो गए थे। क़ायदे और क़ानून के मुताबिक मुहीना इस बार भी मुआवज़े की हक़दार बनी। मुहीना को सरकार की तरफ से 15 लाख रुपये का चेक दे दिया गया। और ज़िंदगी आगे बढ़ गई।

लेकिन यहां कहानी में एक जबरदस्त ट्विस्ट पैदा होता है क्योंकि तस्वीर मलिक के पिता अब्दुल अज़ीज़ मलिक अपने बेटे की आतंकवादी हमले में मारे जाने की बात पर शक ज़ाहिर करते हैं और इस मामले की जांच कराने की मांग करते हैं। क्योंकि जिस तरीके से तस्वीर को मौत के घाट उतारा गया था, तस्वीर के पिता अब्दुल अजीज को शक होता है कि हो न हो उनका बेटा किसी साज़िश का शिकार हुआ है।

Shams Ki Zubani: एक फौजी के पिता होने के नाते वो अपने शक के साथ मानवाधिकार आयोग और जम्मू कश्मीर के तत्कालीन मुख्यमंत्री से मुलाकात करते हैं और अपना शक जाहिर करते हैं। अब्दुल अजीज का कहना था कि जो दिख रहा है असल में सच्चाई वो नहीं है, लिहाजा तस्वीर मलिक की मौत का पूरा सच पता लगाया जाना चाहिए।

मानवाधिकार आयोग और जम्मू कश्मीर के चीफ मिनिस्टर की सिफारिश के बाद हंदवाड़ा पुलिस के पुलिस कप्तान इस मामले की तफ्तीश के लिए एक अफसर तैनात करते हैं। मामला सेना के एक अफसर की मौत का था लिहाजा सेना की मदद से पुलिस ने तफ्तीश का सिलसिला तेज़ कर दिया।

क़रीब एक साल तक जांच चलती रही थी लेकिन तफ्तीश किसी मकाम तक पहुँचती दिखाई नहीं दे रही थी क्योंकि पुलिस को न तो कोई सुराग मिल रहा था और न ही कोई ऐसा सबूत जो बता सके कि असल में तस्वीर मलिक की हत्या किसी साज़िश का हिस्सा थी।

उधर पुलिस की जांच चल ही रही थी और मुहीना अब कश्मीर घाटी को छोड़कर जम्मू में शिफ्ट होने का इरादा कर चुकी थी।

Shams Ki Zubani: इस बीच हंदवाड़ा पुलिस को अपनी रुटीन तफ्तीश के दौरान दो लोग हाथ लगते हैं। पकड़े गए दोनों लोगों में से एक का नाम था चरणजीत सिंह जबकि दूसरे का नाम था मुश्ताक। असल में मुश्ताक आतंकवादी रह चुका था और उसने कुछ साल पहले ही पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था। लेकिन किसी मामले की तहकीकात के सिलसिले में पुलिस इन दोनों को पकड़ लेती है। इसके बाद दोनों अपने जुर्मों की कहानी सुनाते हैं। और उन कहानियों में दो ऐसे जुर्म की कहानी सुनाते हैं जिसे सुनकर खुद हंदवाड़ा पुलिस के पसीने छूट जाते हैं।

दोनों ने जो कहानी सुनाई उसमें मुहीना का नाम सामने आया। अपने किस्सों में दोनों आरोपियों ने बताया कि असल में मुहीना को शादियों का शौक है। लेकिन ये शादी किसी आम इंसान से नहीं बल्कि सेना के जवान या अफसर से शादी का शौक था।

अब पुलिस की तफ्तीश की दिशा बदल जाती है। पुलिस समझ जाती है कि मुहीना पढ़ी लिखी है। लिहाजा उसे ये बात अच्छी तरह से पता थी कि अगर सेना या पुलिस का कोई सिपाही फर्ज के रास्ते में कुर्बान हो जाता है तो सरकार उसके लिए मुआवजा देती है। मुहीना ये भी जानती थी कि अगर किसी आतंकवादी हमले में कोई सेना का सिपाही या पुलिस वाला मारा जाता है और वो भी गोली AK 47 से, तो उसकी जांच में कुछ नहीं निकलता बल्कि उसे आतंकी हमले में मारा गया शहीद ही मान लिया जाता है।

Shams Ki Zubani: अब पुलिस अपनी तफ्तीश को और पैना करती है। तब पुलिस को पता चलता है कि मुहीना के इस शौक और साज़िश में उसके पिता भी शामिल थे। इसी साज़िश के तहत सबसे पहला शिकार बना तारिक अहमद शेख। और उसके बाद तस्वीर अहमद मलिक।

तफ्तीश में पता चला कि मुहीना और मुश्ताक में गहरी दोस्ती थी बल्कि दोनों के बीच एक रिश्ता भी कायम हो गया था। लिहाजा शादी के बाद मुहीना ने मुश्ताक को दोस्ती का हवाला दिया और तारिक अहमद के बारे में उल्टी सीधी कहानी सुनाकर उसको रास्ते से हटाने के लिए कहा। क्योंकि खुद वो क़त्ल कर नहीं सकती थी लिहाजा उसने इस काम में मुश्ताक की मदद ली। तब मुश्ताक ने मुहीना को चरणजीत से मिलवाया और दोनों के बीच भी रिश्ते कायम हो गए।

यानी अपनी मोहब्बत के जाल में फंसा कर मुहीना ने चरणजीत और मुश्ताक को अपने शौहर का क़त्ल करने के लिए राजी कर लिया। साथ में ये भी शर्त रखी कि कत्ल AK47 से ही होना चाहिए। और इस काम के लिए उसने दोनों को कुछ पैसे भी दिए।

Shams Ki Zubani: तब तय हो जाने के बाद 18 दिसंबर को चरणजीत और मुश्ताक ने तारीक अहमद को उस वक़्त गोलियों से भून दिया जब वो घर लौटा था। उसके बाद मुहीना ने पुलिस में रिपोर्ट लिखाई जिसमें दर्ज करवाया कि उसके पति को आतंकवादियों ने मारा है। वो पुलिस को ये भी बताती है कि आतंकवादियों की तरफ से उसके पति को जान से मारने की धमकी पहले से ही मिलती आ रही हैं।

चूंकि कश्मीर के हालात भी इस बात की गवाही देते रहते हैं कि सेना से ताल्लुक रखने वाले लोगों को अक्सर ऐसी धमकियां आतंकवादियों से मिलती रहती है लिहाजा पुलिस के लिए शक करने की कोई गुंजाइश ही नहीं रह जाती थी।

ऐसे में पुलिस ये मान लेती है कि वाकई आतंकवादियों ने सेना के जवान को मारा होगा। इसलिए एफआईआर दर्ज करने के बाद पुलिस भी बिना तफ्तीश के अपनी क्लोजर रिपोर्ट भी लगा देती है और मुहीना मुआवज़े की हक़दार हो जाती है।

पहली बार विधवा बनने के कुछ वक़्त बीतने के बाद ही मुहीना दूसरे शिकार की तलाश करती है और अब तस्वीर मलिक का नाम सामने आता है। तस्वीर मलिक के साथ मुहीना ने खुद दोस्ती की और फिर एक रोज शादी की बात कह देती है।

Shams Ki Zubani: तस्वीर मलिक से शादी के बाद वक़्त बीतने का इंतजार करने के बाद अब मुहीना एक बार फिर उसी तरह से मर्डर का प्लॉट तैयार करती है और जून 2006 को मुश्ताक और चरणजीत को एक तरह से तस्वीर मलिक की सुपारी दे देती है। मुहीना के इश्क में गिरफ्तार चरणजीत और मुश्ताक दोनों ही जून 2006 को तस्वीर मलिका को भी एके 47 से भून देते हैं। फिर उसी तरह मुहीना पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाती है और फिर पुलिस की वैसी ही क्लोजर रिपोर्ट तैयार होती है।

तस्वीर मलिक की मौत के बात वक़्त बीतने लगता है और मुहीना को अब तीसरे शिकार की तलाश होने लगती है। इस बार उसने जम्मू कश्मीर पुलिस के किसी सिपाही से शादी करने को रजामंद थी। ऐसा इसलिए ताकि लोगों को उस पर शक न हो।

जिस वक़्त मुहीना बेगम अपने तीसरे शिकार की तलाश कर रही थी तभी तस्वीर मलिक के पिता ने अपने बेटे की मौत पर शक जाहिर करके तफ्तीश शुरू करवा दी थी।

अपनी शिकायत में अब्दुल अजीज ने अपनी बहू यानी मुहीना पर भी शक ज़ाहिर किया था क्योंकि अब्दुल अज़ीज के साथ मुहीना की पटती नहीं थी और दोनों के बीच काफी झगड़ा होता था।

उसी जांच के दौरान इत्तेफाक से पुलिस के हत्थे चरणजीत और मुश्ताक लग गए और फिर सारे राज़ खुलते चले गए। और पुलिस ने मुहीना और उसके पिता दोनों को गिरफ्तार कर लिया। मुहीना और उसके पिता से पुलिस ने सरकारी मुआवजे के पैसे भी रिकवर किए। और फिर दोनों को जेल भेज दिया गया।

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