कश्मीर घाटी में आतंक की फंडिंग का नया पैटर्न, दहशत की दुकान चलाने का निकाला ये नया जुगाड़

Kashmir Terror Funding New Pattern: कश्मीर घाटी (Kashmir Valley) में आतंकवाद (Terrorism) को जिंदा (Alive) रखने के लिए अब आतंकवादियों ने नया पैंतरा (New Pattern) अख्तियार किया है।
कश्मीर घाटी में फंडिंग का नया पैटर्न
कश्मीर घाटी में फंडिंग का नया पैटर्न

Kashmir Terror: जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) में धारा 370 हटने के बाद और भारतीय सुरक्षा बल (Security Forces) की तरफ से चलाए जा रहे ऑपरेशन ऑलआउट (Operation All out) की वजह से घाटी में आतंकवाद (Terrorism) की कमर करीब करीब टूट चुकी है। और पाकिस्तान (Pakistan) की माली हालत खराब होने की वजह से भी सीमा पर से होने वाली घुसपैठ में भी खासी कमी आई है।

यानी आतंकवाद की दुकान का शटर क़रीब क़रीब गिर ही गया है। जिसे गाहे बगाहे कोई कोई आतंकी संगठन अपनी पूरी ताक़त लगाकर फिर से उठाकर दहशतगर्द की दुकान सजाने की कोशिश करता है, लेकिन भारतीय सुरक्षा बल के ऑपरेशन उनके बचे बचाए मंसूबों को भी मटियामेट कर देते हैं।

बीते कुछ अरसे के दौरान एक बार फिर घाटी में कोमा में जा चुके आतंकवाद में फिर से फंड की ऑक्सीज़न देने की कोशिश और उसके नए पैटर्न का बेहद ही हैरतअंगेज किस्सा सामने आया है। जिसने फिर से सुरक्षा बल के सामने आतंकियों की पोलपट्टी और उनकी औकात खोलकर रख दी।

खुलासा ये सामने आया है कि आतंक की ज़हरीली जड़ों को सींचने के लिए अब LoC के उस पार घात लगाए बैठे आतंकियों ने एक और कोशिश करनी शुरू कर दी है। कश्मीर के हिन्दुस्तान वाले हिस्से से भागकर पाकिस्तान वाले हिस्से वाले कश्मीर में छुपे बैठे आतंकवादियों ने आतंकी संगठनों को फंडिंग करने का नया तरीका निकाला है।

आतंक की फसल सींचने वाले आतंकियों के आका अब पूरी तरह से कंगाल हो चुके हैं। ऐसे में खबर ये सामने आई है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में छुपे बैठे आतंकियों के सरगना अपनी पुश्तैनी ज़मीनों और जायदाद को बेच रहे हैं। और उससे जो क़ीमत उन्हें मिल रही है उस रकम से वो आतंक के अजगर के लिए उसकी घुटती सांसों को आक्सीज़न देने की कोशिश कर रहे हैं।

घाटी में जायदाद बेचने की आ गई नौबत

Kashmir Terror: कश्मीर घाटी के सूत्रों के मुताबिक कुछ अरसा पहले हजारों कश्मीरी नौजवान आतंक की ट्रेनिंग लेने की गरज से पाकिस्तान या फिर POK जाते थे। और फिर वहां से कुछ लौट भी आते थे। ऐसे ज़्यादातर नौजवानों की जो ज़मीन घाटी में है...उन्हें अब वो लोग बेच रहे हैं या बिकवा रहे हैं। और ये सब कुछ जम्मू कश्मीर के राजस्व अधिकारियों के साथ सांठगांठ से करवाया जा रहा है।

खुलासा है कि ये ज़्यादातर संपत्तियां ये लोग अपने ही रिश्तेदारों को बेच देते हैं ताकि इस पूरे मामले में कहीं कोई बाहरी शामिल न होने पाए। ज़रूरत और मजबूरी का बहाना बनाकर संपत्तियों को औने पौने दामों में बेचा जा रहा है। और उनसे जो पैसा हासिल होता है...उसका ज़्यादातर बड़ा हिस्सा उन संगठनों को दान में दिया जा रहा है जो संगठन आतंक की पाठशाला या दहशतगर्दी के मदररसे चला रहे हैं।

कश्मीर पर नज़र रखने वाली एजेंसियों के सूत्रों से पता चला है कि सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों ने ऐसी कई संपत्तियों की पहचान भी की है जिन्हें आतंक की फंडिंग के इसी पैटर्न की खातिर बेच दिया गया। फिलहाल सरकार और सुरक्षा एजेंसियां ऐसे लोगों की पहचान करके उनके ख़िलाफ ऐसी कार्रवाई करने की कोशिश में है ताकि ये सिलसिला रुक सके।

कुपवाड़ा और बारामूला इलाक़े में फंडिंग का नया पैटर्न

Kashmir Terror: सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा, बारामूला, श्रीनगर और दक्षिण कश्मीर के कई हिस्सों में ऐसी संपत्तियों की पहचान भी की जा चुकी है।

इस बीच ये भी पता चला है कि पाकिस्तान में आई कंगाली और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के कतरे गए पर की वजह से भी कश्मीर घाटी के आतंकियों के पास कोई भी फंडिंग नहीं आ पा रही है। इसकी वजह से भी कश्मीर घाटी के नौजवान अब आतंकी संगठनों के आकाओं से दूर भागने लगे हैं। इधर पाकिस्तान की तरफ से हवाला का पैसा भी नहीं आ पा रहा क्योंकि अब पैसों के इस कारोबार पर भी सुरक्षा बलों ने नकेल डाल दी है। ऐसे में आतंकी संगठनों ने आतंक के अजगर को ज़िंदा रखने के लिए उसके फंड के लिए ये नया तरीका इजाद किया है।

एक और चौंकानें वाला खुलासा सामने आया है। पता चला है कि POK में मेडिकल कॉलेज की सीटों को भी आतंकी बेचते हैं, और उसके ज़रिए जो पैसा मिलता है उसे भी ये लोग आतंकी संगठनों को दे रहे हैं। ताकि मरता हुआ आतंकवाद फिर से सांस ले सके।

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