पंजाब के इस बदनाम गांव का रहने वाला है जगरुप, पक्का निशाना था इसलिए मन्नू लेकर आया गैंग में

sidhu Moose wala Murder: सिंगर मर्डर (Singer Murder) में पंजाब (Punjab) के जिस मॉड्यूल (Module) ने सबसे पहले गोली चलाई थी उसी मॉड्यूल का एक शूटर (Shooter) है जगरुप उर्फ रुपा जो एनकाउंटर में मारा गया
जगरुप सिंह उर्फ रुपा
जगरुप सिंह उर्फ रुपा

Moose wala Murder: पंजाबी सिंगर (Punjabi Singer) सिद्धू मूसेवाला मर्डर के मामले में बुधवार को पंजाब पुलिस (Punjab Police) ने उस वक़्त बड़ी कामयाबी हाथ लगी, जब उसने इस बहु चर्चित हत्याकांड के मोस्टवान्टेड शूटर (Most Wanted) जगरूप सिंह उर्फ रूपा और सिद्धू मूसेवाला को पहली गोली मारने वाले मनप्रीत सिंह उर्फ मन्नू को एक एनकाउंटर (Encounter) में मार गिराया।

29 मई को मानसा जिले में जवाहरके गांव के पास सिद्धू मूसेवाला को शाम को पांच बजे के बाद एक शूटआउट में मौत के घाट उतार दिया गया था। उस शूटआउट के लिए गैंग्स्टर लॉरेंस बिश्नोई ने सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी ली थी। और उसी के बाद से जिस एक नाम पर पंजाब से लेकर दिल्ली तक सभी की जुबान पर कयासों के किस्से मौजूद हैं उसमें से एक नाम जगरुप रूपा का है।

सिद्धू मूसेवाला का मर्डर दो मॉड्यूल ने मिलकर किया था। एक हरियाणा मॉड्यूल था जिसका सरगना प्रियव्रत फौजी था। जबकि दूसरा मॉड्यूल पंजाब का था। जिसकी कमान जगरुप रुपा को सौंपी गई थी। खास बात ये है कि हरियाणा मॉड्यूल बोलेरो गाड़ी में सिद्धू मूसेवाला का पीछा कर रहा था जबकि पंजाब मॉड्यूल को दो शूटर जगरुप रूपा और मनप्रीत मन्नू टोयटा की कोरोला गाड़ी में सवार थे।

पांच साल पहले ही जुर्म की दुनिया में कदम रखा था रूपा ने

Moose wala Murder: पंजाब मॉड्यूल का शूटर जगरुप सिंह उर्फ रूपा हल्का पट्टी विधानसभा के इलाक़े के गांव जौड़ा का रहने वाला था। रुपा के ख़िलाफ पुलिस में आठ से ज़्यादा मुकदमें दर्ज हैं। पता यही चला है कि रुपा पांच साल पहले ही गुनाह के दलदल में धंसा था जब उसके खिलाफ चोरी का पहला मुकदमा दर्ज हुआ था।

जगरुप सिंह रुपा का एक छोटा भाई भी है जो भारतीय सेना का सिपाही है। जगरुप सिंह रूपा के गांववालों की बातों पर यकीन किया जाए तो जगरुप के पिता बलविंदर सिंह काफी बुजुर्ग हैं लेकिन दो साल पहले दिल्ली में हुए किसान आंदोलन में उन्होंने हिस्सा लिया था और साल भर तक वो किसान आंदोलन में शामिल रहे।

जगरुप सिंह रुपा के खिलाफ थाना हरिकेपत्तन में 2017 में पहला मुकदमा दर्ज हुआ था। उसके बाद रुपा के खिलाफ अमृतसर के तरसिक्का में गोलियां चलाने और अवैध हथियार रखने के जुर्म में मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद 2018 में एक बार फिर थाना जंड़ियालागुरू में चोरी के मुकदमें में रुपा का नाम सामने आया।

पक्के निशाने की वजह से मन्नू लेकर आया था गैंग में

Moose wala Murder: 29 मई को सिद्धू मूसावाला मर्डर के मामले में रुपा का नाम सामने आने के बाद से ही वो पंजाब पुलिस के रडार पर था। हालांकि 2018 में एक मुकदमें की सुनवाई के बाद जमानत में बाहर आने के बाद से ही जगरुप रूपा फरार चल रहा था।

बताया जाता है कि अपनी फरारी के दौरान ही जगरुप उर्फ रूपा की मुलाकात मनप्रीत उर्फ मन्नू से हुई, जो उस वक़्त गैंग में वफादार शूटरों की तलाश में था। कहा जाता है कि जगरुप उर्फ रूपा का निशाना काफी पक्का था और इसी बात से खुश होकर मनप्रीत ने उसे गैंग में शामिल करवाया था।

जगरुप उर्फ रूपा जिस जौड़ा गांव से ताल्लुक रखता है उसका नाम पहले से ही पुलिस के रिकॉर्ड में बदनाम है। पंजाब में आतंकवाद के दिनों में भी इस गांव का नाम अक्सर आतंकवादियों के सिलसिले में सामने आता था। बताया जाता है कि बब्बर खासला इंटरनेशनल का एरिया कमांडर रह चुका गुरनाम सिंह जौड़ा भी उसी गांव का रहने वाला था। और तो और इसी गांव के रहने वाले पंजाब पुलिस के एक कॉन्स्टेबल को भी आतंकवादी गतिविधियों की वजह से गिरफ्तार किया गया था।

करीब पांच हज़ार की आबादी वाला जौड़ा गांव पंजाब के गुरदासपुर ज़िले में आता है। ये इलाका पाकिस्तान की सीमा से सटा हुआ होने की वजह से यहां पहले भी घुसपैठ की घटनाएं होती रहती थी। आमतौर जौड़ा गांव के बारे में ये कहावत मशहूर हो गई थी कि इसी गांव के नज़दीक बसा सखीरा गांव असल में आतंकवादियों की राजधानी बन चुका था। बताया जाता है कि जौड़ा गांव असल में आतंकियों के छुपने की सबसे पसंदीदा जगह हुआ करती थी।

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