ईरान में औरतें हुई बाग़ी, हिजाब उतारकर सरकार को दे दी चुनौती, बग़ावत की ये है वजह

Iran Revolt: ईरान की राजधानी Tehran में हुकूमत (Govt) के ख़िलाफ आवाज़ तेज़ होने लगी है। ये आवाज़ उठाई है ईरान की आधी आबादी यानी महिलाओं (Women) ने और वो भी वहां के सबसे कट्टर कानून हिजाब के ख़िलाफ।
ईरान में महिलाओं ने हिजाब उतारकर आवाज़ बुलंद की, बाल भी काट कर फेंक दिए
ईरान में महिलाओं ने हिजाब उतारकर आवाज़ बुलंद की, बाल भी काट कर फेंक दिए

Iran Revolt: ईरान की राजधानी तेहरान की उन तस्वीरों ने दुनियाभर में तहलका मचा दिया है जिनमें महिलाएं हिजाब निकालकर हुकूमत के खिलाफ आवाज़ बुलंद कर रही हैं। ईरान में हिजाब पर एक ज़ोरदार जंग छिड़ी हुई है। एक तरफ हिजाब के विरोधी हैं, दूसरी तरफ हिजाब के समर्थक हैं। हम आपको बता दें कि तेहरान में हिजाब पहनना अनिवार्य है जबकि महिलाओं का एक धड़ा हिजाब के खिलाफ़ विद्रोह कर रहा है।
अब हिजाब विरोधी और हिजाब समर्थकों में जिस तरह से जंग छिड़ी हुई हैं। बिना हिजाब के महिलाएं सड़क पर उतरीं तो हिजाब ब्रिगेड ने उन्हें खदेड़ना शुरु कर दिया। सिर्फ हिजाब पर महिला बनाम महिला ही नहीं, बल्कि तेहरान की पुलिस भी बिना हिजाब वाली महिलाओं और लड़कियों पर जुल्म की अति कर रही है।
हिजाब के खिलाफ़ विद्रोह छेड़ने वाली महिलाओं को जबरन कारों में ठूस ठूकर ले जाया जा रहा
है। एक महिला तो कार में ठूसते वक्त बुरी तरह से गिर जाती है। अब ये विद्रोह, हिजाब के खिलाफ़, ईरान में महिलाओं की ये बगावत, कैसे और क्यों शुरु हुई है, ये भी समझ लीजिए 22 साल की महसा अमीनी, शुक्रवार यानी 16 सितंबर आमीनी की मौत हो जाती है। असल में आमीनी को 13 सितंबर को ईरान की धार्मिक मामलों की पुलिस वे गिरफ्तार किया था। आमिनी पर आरोप था कि उन्होंने ईरान के सिर ढकने यानी हिजाब पहनने के सख्त ड्रेस कोड का पालन नहीं किया था।

पुलिस की पिटाई से हुई थी आमिनी 

Iran Revolt: चश्मदीदों की मानें तो तेहरान में आमिनी को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस वैन में बेहिसाब पीटा गया जिसके बाद वो कोमा में चली गईं। ईरान की पुलिस ने इन आरोपों का खंडन किया है और उसका कहना है कि अमीनी का 'तुरंत हार्ट फेल हुआ था।
ईरान के कट्टरपंथी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने गृह मंत्रालय से कहा है कि वो मौत के मामले में जांच करवाएं। लेकिन महसा आमिनी की मौत के बाद तो महिलाओं ने हिजाब के खिलाफ़ एक बड़ी जंग छेड़ दी आमीनी के अंतिम संस्कार के वक्त कथित तौर पर कुछ महिलाओं ने विरोध दिखाते हुए हिजाब नहीं पहना।

जबकि ईरान में हिजाब पहनना अनिवार्य है। अब ईरान में एक तरफ तो महसा आमीनी की मौत का विरोध हो रहा है दूसरा महिलाएं, हिजाब के विरोध में सड़कों पर उतर आयी हैं। और हिजाब से आज़ादी मांग रही हैं।
इतना ही नहीं, कई महिलाओं ने अपने बाल काटने और हिजाब में आग लगाने के वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किये हैं।
ईरान में तहरान से लेकर कई जगह पर महसा आमिनी के समर्थन और हिजाब के खिलाफ़ तगड़ा विरोध प्रदर्शन हो रहा है। हालात ये हो गए हैं कि पुलिस ने ईरान के साघेज शहर में प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चला दीं। ईरानी पत्रकार मसीह अलीनेजाद बताती हैं कि
अगर लड़कियां 7 साल की उम्र के बाद अपना सिर कवर नहीं करती हैं, तो उन्हें स्कूल जाने नहीं दिया जाता है और न ही उन्हें कहीं नौकरी मिलती है। हम महिलाएं इस भेदभाव, अन्याय और अत्याचार से परेशान हो चुके हैं।

महिलाओं ने दी हिजाब और सरकार को चुनौती

Iran Revolt: ईरान की सड़कों पर महिलाओं सीधे सरकार और हिजाब के कानून को चुनौती दे रही हैं, और कह रही हैं। डरना मत, हम सब एक साथ हैं। हम आपको बता दें कि 28 साल की एक्ट्रेस सेपदेह रोशनो ने भी हिजाब पहनने से इनकार कर दिया था। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया, बेहद टॉर्चर किया।...बाद में नेशनल टीवी पर आकर माफी मांगने को कहा गया, ताकि हिजाब पहनने के तालिबानी फरमान को न मानने वाली महिलाओं के मन में दहशत पैदा की जा सके। सरकार और रोश्नो का ताजा टकराव 12 जुलाई को शुरू हुआ था।

इस दिन तेहरान में हिजाब और सिर ढकने के आदेश के खिलाफ रोश्नो के साथ सैकड़ों महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किया था।
1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति के बाद ये क़ानून बना दिया गया था कि महिलाओं इस्लामी तरीके से कपड़े पहनने होंगे।
इसके बाद ज़रूरी हो गया कि महिलाएं चादर ओढ़ें जो उनके शरीर को ढके रहे, साथ ही हेड स्कार्फ या हिजाब या बुर्का पहनें।
हालिया सालों में ईरान में हिजाब की अनिवार्यता को लेकर कई अभियान चलाए गए हैं और ईरान की धार्मिक मामलों की पुलिस ने ड्रेस कोड का पालन न करने के आरोपों में कई बार बड़ी कार्रवाई की है। लेकिन अब महसा आमीनी की मौत के बाद ईरान में हिजाब...और ड्रेस कोड के खिलाफ़ विद्रोह की चिंगारी धधक उठी है।

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