गुजरात में है पॉर्न फिल्मों का एपी सेंटर!

पॉर्न फिल्में हमारे समाज का एक ऐसा सच है, जिसे मिटाया नहीं जा सकता। वो लोग भी जो समाज में खुद को इज़्ज़तदार बताते हैं, वो भी अकेले में इससे अछूते नहीं हैं। कई व्हाइट कॉलर लोगों का तो इस इंडस्ट्री में पैसा लगा हुआ है।
गुजरात में है पॉर्न फिल्मों का एपी सेंटर!

फिल्म हो, सीरियल हो या फिर ओटीटी की सीरीज़ हो, ज़्यादातर ये तमाम फिल्में, सीरियल या वेब सीरीज़ मुंबई में ही शूट होती हैं। पहले पहल पॉर्न फिल्में भी मुंबई में ही शूट हुआ करती थीं। लेकिन पुलिस प्रशासन की सख्ती की वजह से ये इंडस्ट्री धीरे धीरे मुंबई से दूर शिफ्ट हो रही हैं।

मुंबई क्राइम ब्रांच की गिरफ्त में आए एक शख्स ने ये चौंकाने वाला खुलासा किया था, इस आरोपी ने बताया कि पॉर्न फिल्मों की इंडस्ट्री धीरे धीरे दूसरे राज्यों और शहरों में शिफ्ट हो रही है और ऐसा ही एक शहर है सूरत, जो पॉर्न फिल्मों का नया केंद्र बनता जा रहा है। ये खुफिया खुलासा इस इंडस्ट्री से जुड़े कई जानकार कर चुके हैं। गुजरात का सूरत शहर पॉर्न फिल्मों का नया केंद्र बन गया है। मुंबई क्राइम ब्रांच को ये चौंकाने वाला खुलासा एक आरोपी ने किया।

इस इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक पॉर्न फिल्मों की शूटिंग बंगलों में ही ज्यादा होती है। मुंबई में बंगले ज्यादातर मड आइलैंड में हैं। जहां कई बार मुंबई क्राइम ब्रांच रेड डालकर पॉर्न फिल्म की शूटिंग रुकवा चुकी है और आपोरियों को गिरफ्तार भी कर चुकी है।

मड आइलैंड जैसी कुछ जगह छोड़कर बाकी पूरे शहर में फ्लैट ही फ्लैट ज्यादा हैं। मड आइलैंड के बंगलों का किराया बहुत ज्यादा है। पॉर्न फिल्मों के रैकेट से जुड़े कई लोगों को ये किराया उनके बजट में फिट नहीं बैठता है, इसलिए अब ये लोग सूरत शहर और उससे बाहर के कुछ बंगलों को मुंबई की बनिस्बत में सस्ते रेंट पर लेकर पॉर्न फिल्में शूट कर रहे हैं। हालांकि इन फिल्मों में मुंबई से मॉडल्स को बुलाकर शूट किया जाता है।

ज़्यादातर मामलों में ये फिल्में OTT प्लेटफॉर्म के लिए बनाई जा रही हैं। जिसके देखने वालों की तादाद करोड़ों में पहुंच चुकी है। इस डिमांड को देखते हुए अब कई OTT प्लेटफॉर्म पर पॉर्न फिल्मों की डिमांड बढ़ गई है। सैकड़ों की तादाद में ऐसी फिल्मों के लॉन्च करने के लिए ऐप बनाए जा रहे हैं। जिनमें सिर्फ पॉर्न फिल्में ही दिखाई जाती थीं।

एक पॉर्न फिल्म बनाने में करीब दो लाख रुपये का खर्च आता था। फिल्म की शूटिंग एक दिन में पूरी हो जाती, लेकिन उसकी एडिटिंग वगैरह में तीन -चार दिन लग जाता था। इसके बाद उन्हें अलग-अलग OTT प्लेटफॉर्म पर दोगुने दाम में बेच दिया जाता है। जिनको ये फिल्में बेची जातीं, उन्हें OTT सब्सक्रिप्शन से मोटी कमाई होती थी।

पॉर्न इंडस्ट्री में ज़्यादातर पेमेंट कैश से नहीं, ऑनलाइन होता था। जिस OTT के मालिक के लिए पॉर्न फिल्म बनाई जाती है, वो पहले 50 फीसदी रकम अडवांस में ट्रांसफर करता था। बाकी का पेमेंट भी फिल्म के विडियो के ट्रांसफर होते ही ऑनलाइन अकाउंट में आ जाता है।

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