दंगों से भागी और जा फंसी ड्रग्स के जाल में मेहजबीन कैसे बनी ड्रग्स की दुनिया की महारानी?

साल 2002 के गुजरात दंगों ने उसकी जिंदगी बदल कर रख दी। बड़ौदा में एक घर संभालने वाली औरत ड्रगलॉर्ड बन जाएगी इसका अंदाजा तो शायद उसे खुद नहीं होगा लेकिन वक़्त और हालात कुछ ऐसे बदले कि मुंबई के शातिर ड्रग तस्करों में अब उसकी गिनती होती है, नाम है मेहजबीन।
दंगों से भागी और जा फंसी ड्रग्स के जाल में
मेहजबीन कैसे बनी ड्रग्स की दुनिया की महारानी?
सांकेतिक तस्वीर

इस साल जनवरी में मुंबई की क्राइम ब्रांच ने 70 करोड़ की MD ड्रग के साथ पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। इन लोगों को क्या पकड़ा कि पुलिस के हाथ में ड्रग तस्करों की एक ऐसी चेन आ गई जिसमें अभी तक 32 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

इसमें कुछ जुर्म की दुनिया के पुराने खिलाड़ी है जो 1993 के मुंबई धमाकों से लेकर गुलशन कुमार हत्याकांड में पहले भी पकड़े जा चुके हैं और सजा भी काट चुके हैं । कुछ नए चेहरे भी पुलिस ने इस रैकेट को पकड़ने के बाद बेनकाब किए लेकिन इनमें सबसे चौंकाने वाला जो नाम सामने आया वो था मेहजबीन का।

मेहजबीन बड़ौदा की रहने वाली थी लेकिन साल 2002 में गुजरात दंगों के बाद वो अपने पति अशरफ अली के साथ मुंबई आ गई । हालांकि मुंबई आने के बाद दोनों की ज्यादा दिन तक नहीं पटी और मेहजबीन ने अपने पति को छोड़कर दूसरे शख्स से निकाह कर लिया।

इस बीच मेहजबीन का आना जाना दिल्ली हो गया और वो यहां पर हजरत निजामुद्दीन की दरगाह पर दर्शन करने के लिए आती थी। घर के हालात भी अच्छे नहीं चल रहे थे पैसे की तंगी थी।

दिल्ली में ही मेहजबीन की मुलाकात देवी किन्नर से हुई । उसने अपने घर के हालातों का जिक्र देवी किन्नर से भी किया। देवी किन्नर तमाम तरह के लोगों से जुड़ी हुई थी। उसने मेहजबीन की मुलाकात कोकीन तस्कर अनवर से करा दी ।

अनवर ने मेहजबीन को ड्रग तस्करी के लिए राजी कर लिया और इंदौर में उसके नेटवर्क के गुर्गे सलीम और जुबेर से मिलवाया। इसके बाद मेहजबीन ने कई बार इंदौर से मुंबई ड्रग्स की सप्लाई की।

2020 से शुरु हुए लॉकडाउन में तो इन्होंने बड़ी मात्रा में ड्रग्स की सप्लाई मुंबई में की थी। इन्होंने आने जाने के लिए एक पास का इंतजाम किया और फिर करीब 20 किलो MD ड्रग मुंबई तक ले जाने में कामयाब हो गए।

मेहजबीन और उसका गैंग इंदौर से 1 हज़ार रुपये प्रति ग्राम के हिसाब से ड्रग खरीदते और उसे मुंबई में 3 हज़ार रुपये प्रति ग्राम के दाम पर ड्रग पैडलरों के बेचा करते थे । ड्रग का इस्तेमाल करने वालों तक पहुंचते-पहुंचते इसकी कीमत 6-8 हज़ार रुपये प्रति ग्राम हो जाती।

ड्रग्स की डीलिंग के दौरान ही मेहजबीन की मुलाकात कफील खान नाम के एक बदमाश से हुई और मेहजबीन अपने दूसरे पति को तलाक देने के बाद इसके साथ ही रह रही थी । फिलहाल कफील खान किसी मामले में जयपुर जेल में बंद है।

पुलिस को गच्चा देने के लिए मेहजबीन बांग्लादेशी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रही थी। साथ ही वो कॉलिंग के लिए एप्प का इस्तेमाल करती थी । एक बार फोन का इस्तेमाल करने के बाद वो फोन को फेंक दिया करती थी । जिसकी वजह से वो पुलिस की रडार पर नहीं आ पा रही थी

ड्रग तस्करी के इस नेटवर्क को बेपर्दा करने के बाद क्राइम ब्रांच अब तक 32 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है । पुलिस को लगता है कि इस नेटवर्क के तार देश के दूसरे हिस्सों में भी फैले हुए हैं ।

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