मरे हुए कुत्ते को न्याय! रोड एक्‍सीडेंट के 8 साल बाद मुआवजे का आदेश, देश का पहला केस

चंद्रपुर शहर के तुकुम में रहने वाले उमेश भटकर 10 जनवरी 2013 की सुबह साढ़े छह बजे अपने 11 साल के लाड़ले कुत्ते को लेकर अयप्पा मंदिर के पास टहल रहे थे. तभी भरी हुई एक स्कूल बस ने गोपाल दूध डेयरी के पास जॉन को टक्कर मार दी
मरे हुए कुत्ते को न्याय! रोड एक्‍सीडेंट के 8 साल बाद मुआवजे का आदेश, देश का पहला केस

सांकेतिक तस्वीर

मुंबई. महाराष्‍ट्र (Maharashtra) में सालों से कानूनी लड़ाई के बाद कुत्‍ते की मौत (Dog Death) के एक मामले में मालिक को लाखों का मुआवजा (Compensation) दिया गया है. चंद्रपुर मोटर एक्‍सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह कुत्ते के मालिक को एक लाख 62 हजार रुपये और ब्‍याज की राशि अदा करे. ये देश का पहला ऐसा मामला है, जिसमें रोड एक्‍सीडेंट से किसी कुत्‍ते की मौत के मामले में मुआवजा दिया गया है. बता दें कि चंद्रपुर में साल 2013 में एक सड़क हादसे में कुत्‍ते की मौत हो गई थी. कुत्‍ते की मौत के 8 साल के बाद अब बीमा कंपनी को ब्‍याज सहित 3 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश जारी किया गया है.

कुत्‍ते के मालिक की ओर से कोर्ट में पेश वकील जयप्रकाश पांडे ने कहा, इस मामले को कोर्ट में ले जाने का मकसद पैसा नहीं था बल्कि एक सीख देना था कि सड़क पर चाहे इंसान चले या फिर जानवर उसकी सुरक्षा का ख्‍याल रखना गाड़ी चलाने वाले का काम है. कोर्ट ने हमारी बात को को तवज्‍जों देते हुए फैसला सुनाया है. उन्‍होंने कहा कि कोर्ट में पिछले 8 साल से ये मामला चल रहा था. ये लड़ाई काफी कठिन थी. बता दें कि जॉन नामके कुत्‍ते की मौत के मामले में उसके मालिक उमेश भटकर ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल में याचिका दायर कर 5 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी.

कुत्‍ते के मालिक उमेश ने बताया, यह घटना 10 जनवरी 2016 को हुई थी. उन्‍होंने बताया कि उस दिन वह सुबह के समय अपनी डॉगी को घुमा रहे थे, इसी दौरान एक स्कूल बस, जो रहीम ट्रेवल्स कंपनी चला रही, उसने कुत्‍ते को टक्‍कर मार दी. इस संबंध में दुर्गापुर पुलिस थाने में FIR भी दर्ज कराई गई थी. पंचनामा और पोस्टमॉर्टम भी करवाया था.

कुत्‍ते के मालिक ने इस मामले में बस मालिक, चालक और बीमा कंपनी को पार्टी बनाया. कुत्‍ते के मालिक ने बताया कि उनका कुत्‍ता एक कंपनी की सुरक्षा में लगा हुआ था और इससे उसे 8 हजार रुपये प्रति महीने की आमदनी होती थी. पूरा मामला जानने के बाद कोर्ट ने बीमा कंपनी को की मौत के संबंध में मुआवजा देने का फैसला सुनाया.

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