ये है गजब का फिंगरप्रिंट गैंग : 25 हजार में ऐसे बना देते थे नई उंगली, फिर करते थे बड़ा कांड

Telangana Crime News: तेलंगाना में हुआ फिंगरप्रिंट गैंग का खुलासा, उंगली पर चीरा लगाकर टिश्यू बदल देता है ये गिरोह
आरोपी गजलकोंड्डगरी रेड्डी और सागबाला वेंकट
आरोपी गजलकोंड्डगरी रेड्डी और सागबाला वेंकटSocial Media

Telangana Crime News : तेलंगाना के हैदराबाद में एक ऐसा शातिर गिरोह पकड़ा गया है जो इंसानों के फिंगरप्रिंट को ही बदल देता था. फिंगरप्रिंट को बदलने के लिए वो इंसानों की उंगलियों के टिश्यू यानी उपरी स्किन को ही बदल देते थे. ये सबकुछ इतना शातिर तरीके से किया जाता था कि उसका आसानी से पता नहीं लगाया जा सकता था.

फिंगरप्रिंट बदलकर ये गिरोह नया आधार कार्ड बनवा देता था. जिसके बाद नए आधार कार्ड के साथ लोग अरब देशों में जाकर नई नौकरी आसानी से ले लेते थे. इसका दूसरा मकसद एक और होता था कि अगर किसी शख्स के खिलाफ कोई क्राइम रिकॉर्ड है तो वो भी आधार कार्ड बदल जाने के बाद हमेशा के लिए पुलिस रिकॉर्ड से गायब हो जाता था. ये गैंग एक शख्स का फिंगरप्रिंट बदलने के लिए पूरी सर्जरी कराने से लेकर सबकुछ तैयार करने के लिए 25 हजार रुपये ले लेते थे.

ऐसे तैयार कर देते थे नई उंगली

पुलिस की जांच में पता चला है कि गैंग पैसे लेने के बाद उस शख्स की सर्जरी कराता था. सर्जरी में उस शख्स की उंगली की ऊपरी परत को काट देते हैं. यानी उंगली की ऊपरी स्किन को हटा देते थे. पुराना टिश्यू (Tissue) हटाकर उसे सिल देते थे. एक महीने के अंदर उंगली हील हो जाती है और फिर सर्जरी करवा चुके लोग आधार कार्ड में अपनी उंगलियों के निशान अपडेट करवाते हैं. उसके बाद अपने घर का पता बदल कर वीजा भी अपडेट करवा लेते हैं. और ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि आरोपी फिर से कहीं जाकर काम कर पाएं और किसी भी क्राइम रिकॉर्ड से उनके नाम का मिलान ना हो पाए.

सर्जरी की गई उंगली|Social Media
सर्जरी की गई उंगली|Social Media

ये हैं मुख्य आरोपी

इस पूरी साजिश के मुख्य आरोपी गजलकोंड्डगरी रेड्डी और सागबाला वेंकट हैं. ये एक्स-रे टेक्नीशियन और एनेस्थीसिया टेक्नीशियन हैं. ये दोनों मिलकर गिरोह चला रहे थे. हैदराबाद की पुलिस ने एक स्पेशल ऑपरेशन चला कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया. ये लोग हैदराबाद के एक होटल में ठहरे थे और कुछ लोगों की सर्जरी भी करने वाले थे. इससे पहले साइबराबाद पुलिस ने एक गिरोह का भंडाफोड़ किया था. वह गिरोह पैसे निकालने के लिए पॉलिमर का इस्तेमाल करके उंगलियों के निशान की क्लोनिंग करता था.

NOTE : ये खबर क्राइम तक के साथ इंटर्नशिप कर रही दीपिका शर्मा ने लिखी है.

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