इंसानियत का दुश्मन निकला सीरियाई पुलिस अफ़सर, जर्मनी की कोर्ट ने दी उम्रक़ैद की सज़ा

जर्मनी की एक अदालत ने सीरियाई सीक्रेट सर्विस के एक पूर्व अधिकारी को उम्र भर के लिए सलाखों के पीछे धकेलने का अनोखा फैसला सुनाया है। ज़ुल्म करना जुर्म है, लेकिन ज़ुल्म सहना उससे भी बड़ा जुर्म, मगर ज़ुल्म को देखकर भी नज़र अंदाज़ कर देना इंसानियत के नाते सबसे बड़ा जुर्म है।
इंसानियत का दुश्मन निकला सीरियाई पुलिस अफ़सर, जर्मनी की कोर्ट ने  दी उम्रक़ैद की सज़ा

सीरियाई सीक्रेट सर्विस के पूर्व अफ़सर अनवर रुसलान

जर्मनी की अदालत का अनोखा फैसला

WORLD CRIME IN HINDI: जर्मनी में एक ऐसे शख्स को उम्र भर के लिए सलाखों के पीछे धकेले जाने की सज़ा सुनाई गई है, जिसने कोई जुर्म अपने हाथों से नहीं किया बल्कि उसने जुर्म को होते हुए अपनी आंखों से देखा था।

चौंकाने वाला पहलू ये है कि उम्र क़ैद की सज़ा पाने वाला ये क़ैदी न तो जर्मन नागरिक है और न ही इसने जर्मनी की हदों के भीतर ये गुनाह किया। क़िस्सा जितना चौंकाने वाला है उससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है।

सीरिया के पूर्व पुलिस अफसर को सज़ा

CRIMINAL OF SYRIA IN HINDI: सीरियाई पुलिस की सीक्रेट सर्विस के एक पूर्व अफ़सर अनवर रुसलान को जर्मनी की एक अदालत ने गुरुवार को ग़ैरइंसानी रुख अख्तियार करने का कसूरवार ठहराते हुए उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है। जर्मनी के कोबलेंज स्टेट कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा क़रीब एक दशक पहले अनवर रुसलान उस वक़्त सीरिया के दमिश्क के पास अल ख़ातिब के नाम से मशहूर दाउमा शहर की एक जेल में तैनात थे।

इस जेल में उन प्रदर्शनकारियों को रखा जाता था जो सीरिया की बशर अल असद की सरकार का विरोध करते थे। और उस जेल में उन प्रदर्शनकारियों के साथ जेल के अधिकारी और सिपाही अमानवीय बर्ताव करते थे। जबकि अनवर रुसलान तमाशबीन बनकर देखा करते थे।

<div class="paragraphs"><p>सीरिया की जेल में क़ैदियों से ज़ुल्मों सितम की तस्वीरों की नुमाइश</p></div>

सीरिया की जेल में क़ैदियों से ज़ुल्मों सितम की तस्वीरों की नुमाइश

सीरिया के पुलिस अफ़सर का गुनाह

LATEST CRIME NEWS IN HINDI:कोर्ट में पेश किए गए सबूतों के मुताबिक अल ख़ातिब जेल में क़ैदियों के साथ जानवरों से भी बदतर सलूक किया जाता था। जेल में क़ैदियों पर कोड़े बरसाए जाते थे, उन्हें बिजली के झटके दिए जाते थे, सिगरेट से दागा जाता था और कलाई के सहारे लटकाकर क़ैदियों के गुप्तागों पर प्रहार किया जाता था। इस दर्दनाक जुल्म में कई क़ैदियों की मौत तक हो जाती थी।

इस पर कोर्ट का कहना था कि अनवर रुसलान जिस हैसियत में जेल में थे वो अपने सामने होने वाली इन घटनाओं को अपने अधिकार से रोक भी सकते थे। मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया। लिहाजा कोर्ट उन्हें उनके इस गुनाह के लिए उन्हें इस प्रताड़ना में बराबर का हिस्सेदार मानते हुए उम्र क़ैद की सज़ा सुनाती है।

तमाशबीन बनने की मिली सज़ा

WORLD COURT NEWS IN HINDI: कोर्ट में जिरह करते हुए रुसलान के वकील ने गुहार लगाई कि उनके मुवक्किल को रिहा कर दिया जाए क्योंकि उन्होंने कभी किसी को प्रताड़ित नहीं किया, और इसी ज़ुल्म-ओ-सितम की वजह से वो अपना देश छोड़कर वहां से भाग आए, और जर्मनी में आकर शरण ली है।

जर्मन कोर्ट में सरकारी वकील ने दलील दी कि अप्रैल 2011 से लेकर सितंबर 2012 तक के दौरान रुसलान ऐसी दर्दनाक प्रताड़ना के न सिर्फ चश्मदीद हैं बल्कि क़रीब 4000 क़ैदियों के कुसूरवार भी हैं जो ऐसी प्रताड़ना के बावजूद ज़िंदा बच गए।

जूनियर अफ़सर को भी जर्मनी में सज़ा

GERMANY CRIME NEWS IN HINDI: जर्मनी की इसी अदालत ने पिछली साल रुसलान के एक जूनियर अफ़सर इयाद अल ग़रीब को इस ग़ैर इंसानी रवैया अख्तियार करने के जुर्म में चार साल की सज़ा सुनाई थी। सीरिया के ये दोनों पुलिस अफसर 2019 में भागकर जर्मनी आ गए थे। और दोनों ने राजनैतिक शरण की मांग की थी। लेकिन यहां पुलिस ने दोनों को पकड़ लिया था।

अनवर रुसलान ने सीरियाई सीक्रेट सर्विस में 18 साल काम किया। और तरक्की करते हुए घरेलू खुफिया विभाग के प्रमुख के पद तक जा पहुँचे थे।

पुलिस अफ़सर के ख़िलाफ़ हमवतनों की गवाही

LATEST CRIME STORY IN HINDI :जर्मनी के सरकारी वकील ने अपनी दलील में रुसलान के ख़िलाफ़ ये तथ्य भी रखा कि उन्होंने जेल में क़ैदियों के साथ रेप और शारीरिक प्रताड़ना के अलावा इलेक्ट्रिक शॉक जैसी ज़्यादतियों का भी कोई विरोध नहीं किया, जो किसी भी सभ्य समाज में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

जर्मनी की अदालत में रुसलान के ख़िलाफ़ क़रीब 80 उन लोगों ने गवाही दी जो सीरिया के नागरिक हैं मगर गृहयुद्ध के दौरान बीते कुछ सालों में सीरिया से भागकर यूरोप के अलग अलग हिस्सों में रह रहे हैं।

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