सुप्रीम कोर्ट ने दी नोएडा की CEO ऋतु महेश्वरी को राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक

नोएडा प्राधिकरण के CEO ऋतु महेश्वरी को 10 मई को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। ऋतु महेश्वरी के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट के गैर ज़मानती वारंट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने दी नोएडा की CEO ऋतु महेश्वरी को राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक
सुप्रीम कोर्ट

Latest News: ऋतु महेश्वरी के लिए कई दिनों बाद सुकून वाला दिन आया जब देश की सर्वोच्च अदालत ने ऋतु के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट के दिए गैर ज़मानती वारंट के फैसले पर रोक लगा दी। कोर्ट की अवमानना पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया था। इसी फैसले के खिलाफ ऋतु महेश्वरी ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल के लिए तो हाइ कोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है।

बता दे कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने ऋतु महेश्वरी को कड़ी फटकार लगाते हुए तल्ख टिप्पणी की थी। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में ऋतु महेश्वरी के वकील ने मामले की जल्द सुनवाई की मांग करते हुए अंतरिम राहत की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने तब कहा था कि आप IAS अधिकारी हैं लिहाजा ये माना जा सकता है कि आपको नियमों के बारे में दूसरों के मुकाबसे सबसे ज़्यादा

नोएडा प्राधिकरण की CEO ऋतु महेश्वरी
नोएडा प्राधिकरण की CEO ऋतु महेश्वरी

ऋतु महेश्वरी को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार

Noida Court News: बता दे कि 9 मई को सुप्रीम कोर्ट ने ऋतु महेश्वरी को कड़ी फटकार लगाते हुए तल्ख टिप्पणी की थी। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में ऋतु महेश्वरी के वकील ने मामले की जल्द सुनवाई की मांग करते हुए अंतरिम राहत की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने तब कहा था कि आप IAS अधिकारी हैं ऐसे में ये माना जा सकता है कि आपको नियमों के बारे में दूसरों से ज़्यादा पता है। CJI एनवी रमना ने कहा था कि हर दूसरे दिन कुछ अधिकारी गंभीर मामलों में भी निर्देश के लिए कोर्ट आ जाते हैं, सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि हर रोज इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन होता है यह दिनचर्या हो गया है एक अधिकारी कोर्ट जाता है यह क्या है? अदालत के आदेशों का सम्मान नहीं करते।

दरअसल पूरा मामला इस प्रकार है कि नोएडा के सेक्टर 82 में प्राधिकरण ने 1989 को और 1990 में अर्जेंसी क्लॉज के तहत भूमि का अधिग्रहण किया था, जिसके खिलाफ जमीन के खिलाफ जमीन के मालकिन मनोरमा कुच्छल ने चुनौती दी थी, जिसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2016 में मनोरमा के पक्ष में फैसला सुनाया, हाईकोर्ट ने अर्जेंसी क्लॉज के तहत प्राधिकरण के द्वारा लिए गए जमीन अधिग्रहण को रद्द कर दिया, और प्राधिकरण को आदेश दिया केई याचिकाकर्ता को सर्किल रेट से दुगने दरों में मुआवजा दिया जाए।

10 बजे कोर्ट में हाजिर होना था, CEO ने पकड़ी 10.30 बजे की फ़्लाइट!

Latest Court News in Hindi: इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले के ख़िलाफ़ नोएडा प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट में दरख़्वास्त लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी फैसला याचिकाकर्ता के पक्ष में सुनाया और इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों का पालन करने का आदेश प्राधिकरण को कहा प्राधिकरण को दिया, आदेश के बावजूद याचिकाकर्ता को मुआवजा नहीं दिया गया तो याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अवमानना का याचिका प्राधिकरण के खिलाफ दायर की।

जिसकी सुनवाई में कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण की CEO ऋतु महेश्वरी को दो बार कोर्ट में बुलाया लेकिन वह नहीं पहुंच पाई। शुक्रवार को नोएडा प्राधिकरण की CEO महेश्वरी के वकील रविंद्र श्रीवास्तव ने न्यायालय को बताया ऋतु फ्लाइट से 10:30 बजे दिल्ली से उड़ान भरेंगी।

अदालत ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें 10:00 बजे कोर्ट में हाजिर होना था लेकिन जानबूझकर 10:30 बजे दिल्ली से फ्लाइट ले रही है। यह अदालत के अवमानना के दायरे में आता है। इसके बाद हाईकोर्ट ने ऋतु महेश्वरी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करते हुए पुलिस कस्टडी में अदालत के अंदर पेश होने का आदेश दिया था। लिहाजा अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ऋतु महेश्वरी को बड़ी राहत मिली है।

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