Navjot Singh Sidhu News : नवजोत सिद्धू की 34 साल पुरानी रोड रेज की फ़ाइल फिर खुल गई

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34 साल पुराना जिन्न जागा

Navjot Singh Sidhu Latest News : 34 साल पुराना रोड रेज के केस का जिन्न फिर जागा है। और एक बार फिर पंजाब के फायर ब्रांड ताबड़तोड़ शायरबाज़ नेता और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू फिर क़ानून के दायरे में घिरते दिखाई दे रहे हैं। क्योंकि गुरू के ख़िलाफ सुनवाई शुरू होने वाली है, और वो भी देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट। और इस केस के शुरू होते ही पंजाब में चुनाव से ऐन पहले एक जबरदस्त ट्विस्ट आ गया है।

असल में 34 पुरानी ग़ैर इरादतन हत्या के मामले की फाइल पर नाम तो गुरू यानी नवजोत सिंह सिद्धू का ही दर्ज है। और इस केस की सुनवाई भी जस्टिस ए एम ख़ानविलकर और जस्टिस संजय किशन कौल की स्पेशल बेंच करेगी।

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सुनवाई गुरुवार को शुरू होगी। दरअसल पीड़ित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी जिस पर देश की सबसे बड़ी अदालत ने सुनवाई करने का फैसला किया है। हालांकि 15 मई 2018 को सुप्रीम कोर्ट में ही सिद्धू को इसी रोड रेज के मामले में महज़ 1000 रुपये जुर्माने की सज़ा देकर छोड़ दिया गया था।

सिद्धू के ख़िलाफ़ ये था मामला

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UPDATE COURT NEWS: 27 दिसंबर 1988 को नवजोत सिंह सिद्धू और उनका दोस्त रुपिंदर सिंह संधू की पटियाला में कार पार्किंग को लेकर गुरुनाम सिंह नाम के एक बुजुर्ग के साथ कहासुनी हो गई थी। उस झगड़े के बाद गुरुनाम सिंह की मौत हो गई थी। जिसकी वजह से नवजोत सिंह सिद्धू और उसके दोस्त रुपिंदर सिंह संधू के ख़िलाफ़ ग़ैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया था। उस वक़्त ये मुकदमा पंजाब सरकार और पीड़ित परिवार की तरफ से दर्ज करवाया गया था।

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साल 1999 में यानी घटना के 11 साल बाद सेशल कोर्ट ने नवजोत सिंह सिद्धू को राहत दे दी थी और उनके ख़िलाफ़ दर्ज केस को ख़ारिज कर दिया था। कोर्ट ने उस वक़्त कहा थता कि आरोपी के ख़िलाफ़ पक्के सबूत नहीं हैं ऐसे में सिर्फ शक के आधार पर केस को आगे नहीं चलाया जा सकता।

मगर साल 2002 में पंजाब सरकार ने नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में अपील की थी और 1 दिसंबर 2006 को हाईकोर्ट की बेंच ने सिद्धू और उनके दोस्त को दोषी भी मान लिया था।

हाईकोर्ट ने दी थी तीन साल की सज़ा

SIDDHU ROAD RAGE CASE NEWS: हाईकोर्ट ने 6 दिसंबर को सुनाए अपने फैसले में सिद्धू और संधू को 3-3 साल की सज़ा सुनाई थी एक एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। इसके अलावा आरोपियों को 10 जनवरी 2007 तक सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का समय भी दिया था।

दोनों आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की और 11 जनवरी को चंडीगढ़ की अदालत में सरेंडर भी कर दिया था। लेकिन 12 जनवरी को सिद्धू और उनके दोस्त को सुप्रीम कोर्ट से जमानत भी मिल गई थी और उनकी सज़ा पर रोक भी लगा दी गई थी।

इसके बाद ही पीड़ित पक्ष अपनी गुहार लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुँचा और नवजोत सिंह सिद्धू और उनके दोस्त संधू को दोषी करार दिए जाने की मांग लेकर याचिका दाखिल की।

पीड़ित पक्ष ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा

SUPREME COURT UPDATE: शिकायतकर्ता की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार और सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि इस रोडरेज के मामले में सिद्धू के खिलाफ़ हत्या का मामला बनता है। क्योंकि सिद्धू को उस वक़्त पता था कि वो क्या कर रहे हैं, और उन्होंने जो कुछ भी किया वो जानबूझकर किया, इसलिए उनके ख़िलाफ हत्या का मुकदमा चलना चाहिए।

शिकायतकर्ता ने कोर्ट को बताया कि असल में उस रोज हुआ क्या था। क्योंकि अगर ये साधारण रोड रेज का मामला होता तो शायद सिद्धू कार में टक्कर मारकर वहां से चले भी जाते। लेकिन सिद्धू ने पहले तो गुरुनाम सिंह को कार से निकाला और फिर उनके सीने में जोरदार मुक्का मारा। यहां तक की सिद्धू ने गुरुनाम की कार की चाबी भी निकाल ली थी।

इल्ज़ाम के ख़िलाफ़ सिद्धू की दलील

NAVJOT SINGH SIDDHU NEWS IN HINDI: इस मामले में सिद्धू का पक्ष रखने के लिए अदालत में पेश हुए वरिष्ठ वकील आर एस चीमा ने दलील दी कि सिद्धू निर्दोष हैं और उन्हें जबरन फंसाने की कोशिश की गई है। क्योंकि इस मामले में कोई भी गवाह सामने नहीं आया बल्कि पुलिस ने खुद गवाहों के बयान लिए हैं। इस घटना के पीछे सिद्धू का कोई उद्देश्य नहीं था।

वो नहीं जानते थे कि गुरुनाम सिंह को दिल की बीमारी है। वकील ने अपनी दलील में कहा था कि मेडिकल रिपोर्ट में ये साफ हो चुका है कि गुरुनाम को बेहद मामूली चोट थी जबकि दिल पहले से ही कमज़ोर था। ये बात पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से सामने आई ऐसे में हाईकोर्ट का आदेश सही नहीं है, हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश पर ठीक से विश्लेषण नहीं किया और नतीजा निकाला जो सही नहीं है।

लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट शिकायतकर्ता की पुनर्विचार याचिका पर विचार करने को तैयार हो गया है और सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि वो तय करेगा कि सिद्धू को जेल की सज़ा दी जाए या नहीं।

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