Yasin Malik : रुबिया सईद अपहरण केस में गवाहों से खुद जिरह करने की यासीन ने मांगी अनुमति
Jammu Kashmir News : रुबिया सईद (rubaiya sayeed) अपहरण मामले में यासीन मलिक (Yasin Malik) ने गवाहों से खुद जिरह करने की अनुमति मांगी. कहा अगर अनुमित नहीं मिली तो करेगा भूख हड़ताल.
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Jammu Kashmir News : प्रतिबंधित जेकेएलएफ (JKLF) के सरगना यासीन मलिक (Yasin Malik) ने एक सनसनीखेज केस में खुद गवाहों से जिरह करने की मांग की है। असल में ये मामला जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबिया सईद (Rubaiya Sayeed) के अपहरण से जुड़ा है।
13 जुलाई को जम्मू-कश्मीर की एक विशेष अदालत से टेरर फंडिंग केस में गिरफ्तार यासीन मलिक ने पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबिया सईद के अपहरण से जुड़े मामले में प्रत्यक्ष रूप से पेश होने तथा गवाहों से खुद जिरह करने की अनुमति मांगी। उसने कहा कि इसकी अनुमति नहीं मिलने पर वह अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करेगा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि आतंकी फंडिंग (Terror Funding) के एक मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा यासीन मलिक वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये अदालत के समक्ष पेश हुआ। मलिक ने कहा कि उसने अदालत में प्रत्यक्ष रूप से पेश होने की अनुमति के लिए सरकार को पत्र लिखा है।
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अधिकारियों ने बताया कि मलिक ने अदालत को सूचित किया कि उसने गवाहों से खुद जिरह करने का भी अनुरोध किया है और यदि सरकार ने अनुरोध स्वीकार नहीं किया तो वह भूख हड़ताल पर बैठेगा।

8 दिसंबर 1989 को रुबिया सईद का हुआ था अपहरण
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मामला आठ दिसंबर, 1989 को रुबिया सईद के अपहरण से संबंधित है। केंद्र की भाजपा-समर्थित तत्कालीन वी. पी. सिंह सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जकेएलएफ) के पांच आतंकवादियों को रिहा किए जाने के बाद 13 दिसंबर को अपहर्ताओं ने रुबिया को मुक्त कर दिया था।
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यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया था और आतंकी वित्तपोषण (Terror Funding) के आरोप में यासीन मलिक को 2019 में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) द्वारा पकड़े जाने के बाद यह मामला फिर से जिंदा हो गया था।
पिछले साल जनवरी 2021 में सीबीआई ने विशेष सरकारी वकील मोनिका कोहली और एस. के. भट की मदद से मलिक सहित 10 लोगों के खिलाफ रुबिया अपहरण मामले में आरोप तय किए थे, जो कश्मीर घाटी के अस्थिर इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। जेकेएलएफ के पांच सदस्यों की रिहाई के बाद आतंकी समूहों ने सिर उठाना शुरू कर दिया था।
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