यूक्रेन पर कब्ज़े का रूसी सीक्रेट प्लान लीक! इस तरह से यूक्रेन पर रूस करेगा कब्ज़ा

दुनिया में कौन क्या कह रहा है, कौन कौन से प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में क्या हो रहा है, इन तमाम बातों से रुस पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। वो एक तरफ अपने प्लान के मुताबिक कार्रवाई करता जा रहा है। लेकिन रूस का प्लान है क्या? इसे जानना ज़रुरी है।
यूक्रेन पर कब्ज़े का रूसी सीक्रेट प्लान लीक! इस तरह से यूक्रेन पर रूस करेगा कब्ज़ा

जंग के 9वें दिन भी रूसी हमला जारी है, आज दिनभर तो रूस ने एक के बाद एक यूक्रेन पर ताबड़तोड़ डेढ दर्जन से ज़्यादा हमले कर डाले हैं। जब जब ऐसा लगता है कि रूस ढीला पड़ रहा है तब तब वो कोई ना कोई कार्रवाई कर सबको हैरत और परेशानी में डाल देता है। रुस अब तक यूक्रेन के 20 फीसदी इलाके को अपने कब्जे में ले चुका है, यूक्रेन का करीब एक लाख वर्ग किलोमीटर से ऊपर का इलाता रूस के नियंत्रण में है।

रूसी सैनिकों ने अब तक जो यूक्रेन पर परिस्थितियां पैदा की हैं, उससे व्लादिमीर पुतिन की रणनीति समझी जा सकती है। कई इंटरनेशनल जानकारों का मानना है कि रूस का असली मकसद यूक्रेन पर कब्जा जमाना है। और इसके लिए व्लादिमीर पुतिन ने जो सीक्रेट प्लान बनाया है, वो काफी हद तक चेचन जंग की तरह हो सकता है। मगर सवाल ये है कि आखिर ये सब होगा कैसे?

इस समझने के लिए आपको पहले चेचन युद्ध को समझना होगा, 1991 में जब सोवियत संघ टूटा तो चेचन अलग देश बन गया। इस छोटे से देश पर रूस की नजर हमेशा रही, क्योंकि चेचन रूस से घिरा हुआ है और इसका कुछ हिस्सा सर्बिया से भी मिलता है। रूस ने 1994 में चेचन पर हमला कर दिया, हालांकि ये कोशिश कामयाब नहीं हुई। इसके बाद 1999 में चेचन में रूस के शीर्ष राजदूत गेनादी श्पिगुन की हत्या कर दी गई, यहीं से चेचन के खिलाफ दूसरे युद्ध की शुरुआत हुई। चेचेन को चारों तरफ से घेरते हुए रूस ने 2000 में उस पर पूरी तरह से हमला कर दिया।

पुतिन जिस रणनीति से आगे बढ़ रहे हैं, उसे देखकर लगता है कि वो यूक्रेन को उन संसाधनों से वंचित कर देना चाहते हैं, जो यूक्रेनी सैनिकों के युद्ध लड़ने के लिए ज़रूरी हैं। शायद यही वजह है कि, रूसी सैनिक यूक्रेन के ऐसे शहरों पर हमले तेज कर रहे हैं, जो प्रमुख ऊर्जा उत्पादक हैं। रूसी सेना उत्तरी व दक्षिणी यूक्रेन में भी धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है, उसकी रणनीति काला सागर से यूक्रेन के संपर्क को पूरी तरह तोड़ देने की है।

ओडेसा के बाद रूसी सेना ने मारियोपोल को भी अपने नियंत्रण में लेना शुरू कर दिया है, यहां के बंदरगाह शहरों पर लड़ाई तेज है। इन दोनों शहरों में यूक्रेन का एक चौथाई बिजली उत्पादन होता है, इससे पहले खुद रूसी सेना की तरफ से पुष्टि की गई थी कि खेरसॉन शहर का सरकारी मुख्यालय अब उसके नियंत्रण में है। रूस ने यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खारकीव को भी नियंत्रण में ले लिया है।

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