बूचा को बूचड़खाना बनाने वाले रूसी कमांडर को कसाई बताकर कोस रही है पूरी दुनिया

Russia-Ukraine War: बूचा का हाल किसी बूचड़खाने जैसा है, जिधर भी नज़र दौड़ाए तो बस लाश और मांस के लोथड़े ही दिखाई दे रहे हैं। इस शहर में सरेआम इंसानियत को बेमौत मरते हुए पूरी दुनिया देख रही है। आसमानी निगाहों से जब शहर में झांका गया तो जो नज़र आया उसे देखकर संसार रो पड़ा।
बूचा को बूचड़खाना बनाने वाले रूसी कमांडर को कसाई बताकर कोस रही है पूरी दुनिया
यूक्रेन का बूचा शहर जहां सिर्फ बर्बादी बसती है

बूचा में हुआ 400 लोगों का नरसंहार

Russia-Ukraine War: जंग के 42 दिनों के बाद इस वक़्त यूक्रेन के बूचा के बारे में सारी दुनिया में बात हो रही है। वहां पर 400 लोगों के नरसंहार की खबरें सुर्खियों में हैं। सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए बूचा नरसंहार को समझा जा रहा है। लेकिन बूचा शहर के अंदर की तस्वीर अभी तक की नज़रों के सामने नहीं आ सकी हैं। इस नरसंहार के इतने दिन बाद भी बूचा में सन्नाटा है, गम है और खामोशी को तोड़ती एंबुलेंस की चीखें हैं।

पोप फ्रांसिस को आया ग़ुस्सा

बूचा, यूक्रेन का वो शहर जिसके नरसंहार ने सारी दुनिया की आंखों में आंसुओं को भी रोने को मजबूर कर दिया। पोप फ्रांसिस भी जब बूचा से लाए गए एक खस्ताहाल यूक्रेनी ध्वज को चूमा तो वो भी अपना आपा संभाल नहीं सके और गुस्से से तिलमिला उठे।

बूचा का हाल सुनकर पोप को भी आया ग़ुस्सा
बूचा का हाल सुनकर पोप को भी आया ग़ुस्सा

घर घर दवा पहुँचाने की कोशिश

Russia-Ukraine War: सचमुच यूक्रेन के बूचा में हालात बहुत ख़राब हैं। रूस के दिए जख्म चारों तरफ फैले हैं जिन्हें समेटने की कोशिश की जा रह है। आजतक के संवाददाता गौरव सांवत जिस वक़्त बूचा में अपनी ग्राउंड रिपोर्ट तैयार कर रहे थे तब उन्होंने एक घर के बाहर एक एंबुलेंस खड़ी दिखाई दी।

पता लगाने से पता चला कि बूचा में बचे हुए लोगों को घर-घर जाकर दवा और जरूरी मदद मुहैय्या करवाई जा रही है।जो मेडिकल टीम हैं, वो घर घर जाकर लोगों को दवाइयां या मदद मुहैया करवाने की कोशिश कर रही हैं। बूचा के केंद्र में जेलेंस्की ने फॉरेंसिक टीम जांच के लिए बुलाई है ताकि रूस के कथित युद्ध अपराध की जांच की जा सके। सारे सबूत और सुराग इकट्ठा किए जा सकें।

रूसी कमांडर अजात्बेक ओमुरबेकोव
रूसी कमांडर अजात्बेक ओमुरबेकोव

बूचा को कब्रगाह बनाने वाला रूसी कमांडर

Russia-Ukraine War: ये सारी कोशिश 400 यूक्रेनियों की कब्रगाह बन चुके बूचा शहर के गुनहगार को सजा दिलाने की कवायद भर है। दुनियाभर के अखबार उस रूसी कमांडर को बूचा का कसाई बता रहे हैं जिसने पार्क में लाशो का अंबार लगा दिया। उसका नाम है अजात्बेक ओमुरबेकोव। अजात्बेक ओमुरबेकोव सेपरेट मोटराइज्ड राइफल ब्रिगेड का कमांडर है।

रूसी मेडल से सम्मानित और भगवान पर भरोसा करने वाले अजात्बेक ने अपने सिपाहियों को बूचा के भीतर हर तरह की खुली छूट दे रखी है। यहां तक कि सामूहिक बलात्कार और नरसंहार। अपने सिपाहियों का हौसला बढ़ाने के लिए इस कमांडर ने हुक्म दिया था कि 50 साल से कम उम्र वाले सभी मर्दों को मार डालो। ब्रिटिश अखबार डेली मेल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इसी रूसी कमांडर ने बेगुनाह लोगों पर गोली चलवाने के बाद परिजनों को शव दफनाने के लिए सिर्फ 20 मिनट दिए थे ।

बूचा के कसाई के ख़िलाफ़ सबूतों की पैरवी

Russia-Ukraine War: शायद इसी वजह से सबूत जुटाने के लिए जेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को यूक्रेन बुलाया है ताकि बूचा के कसाई के खिलाफ केस मजबूत किया जा सके।

19 मार्च की इस सैटेलाइट तस्वीर में यूक्रेनी सैनिकों को नागरिकों की लाशें देखने को मिलीं । इस दौरान बूचा शहर रूसी सेना के कब्जे में था। 40 साल के ओमुरबेकोव को 2014 में रूस के डिप्टी डिफेंस मिनिस्टर दिमित्री बुल्गाकोव ने मिलिट्री मेडल से सम्मानित किया था। लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत रूस का ये आर्मी कमांडर अपने सैनिकों के किए गए युद्ध अपराध के लिए जिम्मेदार है । जिसके मददगारों को यूक्रेन की सेना खोज-खोज कर निकाल रही है

क्लस्टर बम की बरसात

Russia-Ukraine War: रूस पर इल्जाम है कि उसने यूक्रेन के बूचा पर 2 दर्जन से ज्यादा 'क्लस्टर बम' बरसाए और रिहायशी इलाकों को तबाह करने का पाप किया। आजतक की संवाददाता टीम को ऐसी भी रिहायशी इमारतें मिलीं जिन्हें क्लस्टर बम से बर्बाद कर दिया गया था।

सिर्फ 6 मिनट में रूस ने एक पूरी बिल्डिंग तबाह कर डाला। आरोप है कि रूस ने यहां क्लस्टर बम का भी इस्तेमाल किया। इसीलिए क्लस्टर बम का ये मुद्दा UN में भी पहुंचा। जिनेवा क्नवेंशन की तरफ से क्लस्टर बमों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा हुआ है

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