NOIDA TWIN TOWER के असली 30 गुनाहगारों की ये है पूरी FIR, 1-1 नाम ध्यान से देखें ताकि सजा दिला सकें

Noida Twin Tower FIR copy : आधी रात में Noida Twin Towers के आरोपियों के खिलाफ लखनऊ विजिलेंस में हुई थी FIR, पर 10 महीने बाद भी एक पर भी नहीं हुई कार्रवाई. पढ़िए खास रिपोर्ट.
Noida Twin Tower
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Noida Twin Towers FIR : भ्रष्टाचार की आंच में दफ्न हो चुके मुर्दा ट्विन टावर (Twin Tower) की नींव जिंदा रिश्वतखोर अधिकारियों ने डाली थी. भ्रष्टाचार की इस नींव में कितना काला धन डाला गया. नियमों पर घूस की कितनी काली स्याही पोती गई. इस बारे में तो खुद सुप्रीम कोर्ट कह चुका है. 31 अगस्त 2021 को कोर्ट ने कहा था कि ट्विन टावर को बनाने में नोएडा अथॉरिटी अफसरों की आंख, नाक और कान से भ्रष्टाचार टपक रहा था.

इस आदेश के बाद पूरे प्रदेश में खलबली मची. आनन-फानन में प्रदेश सरकार की तरफ से 3 सितंबर 2021 को 4 सदस्यों की एक समिति का गठन किया गया. इस समिति ने एक महीने में अपनी रिपोर्ट पेश कर दी. इस रिपोर्ट में ही तुरंत नोएडा प्राधिकरण के दोषी अफसरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई करने के लिए कहा गया. अब उस समय मामला गर्म था.

इसलिए समिति की रिपोर्ट मिलते ही नोएडा प्राधिकरण के सीईओ के आदेश पर वरिष्ठ प्रबंधक नियोजन वैभव गुप्ता ने 4 अक्टूबर 2021 को लखनऊ विजिलेंस विभाग के थाने में शिकायत की. उस समय मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि ट्विन टावर में भ्रष्टाचार की एफआईआर आधी रात में लिखी गई. ये रिपोर्ट रात करीब 11:43 बजे दर्ज हुई. लेकिन उस तारीख से लेकर ट्विन टावर के ढहाए जाने की तारीख 28 अगस्त 2022 तक करीब 10 महीने 24 दिन का समय निकल गया. लेकिन भ्रष्टाचार की जड़ को सबसे लंबी इमारत का रूप देने वाले आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. यहां तक की ये दावा किया जा रहा है कि विजिलेंस टीम ने इन आरोपियों से पूछताछ भी नहीं की.

कौन-कौन आरोपी बनाए गए करप्शन के ट्विन टावर में

Twin Tower Case Vigilance : लखनऊ विजिलेंस विभाग में दर्ज एफआईआर में ये देखा जा सकता है कि आखिर किन-किन अफसरों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ. सबसे बड़े दो नाम हैं. जिनके जिम्मे नोएडा अथॉरिटी में एक पत्ता भी नहीं हिल सकता था. वो नाम है नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन सीईओ मोहिंदर सिंह. दूसरा बड़ा नाम तत्कालीन रिटायर्ड सीईओ एसके द्विवेदी. ये दोनों अपने-अपने कार्यकाल के नोएडा अथॉरिटी के सीईओ पद पर थे. इन दोनों के अलावा तीसरा बड़ा नाम उस समय के अडिशनल सीईओ आरपी अरोड़ा का है.

जानें एफआईआर में किन 24 सरकारी अफसरों के नाम हैं

1-मोहिंदर सिंह (पूर्व सीईओ नोएडा प्राधिकरण)

2-एसके द्विवेदी (पूर्व सीईओ नोएडा प्राधिकरण)

3-आरपी अरोड़ा (पूरव अपर सीईओ, नोएडा प्राधिकरण)

4- यशपाल सिंह (रिटायर्ड OSD, नोएडा प्राधिकरण)

5-ऋतुराज व्यास, संयुक्त नगर नियोजक, नोएडा प्राधिकरण

6-ए.के. मिश्रा, नगर नियोजक, नोएडा प्राधिकरण

7- राजपाल कौशिक (रिटायर्ड सीनियर टाउन प्लानर, नोएडा प्राधिकरण)

8- त्रिभुवन सिंह (रिटायर्ड मुख्य वास्तुविधि नियोजक, नोएडा प्राधिकरण)

9-शैलेंद्र कैरे (रिटायर्ड डिप्टी जीएम ग्रुप हाउसिंग, नोएडा प्राधिकरण)

10- बाबूराम (रिटायर्ड प्रोजेक्ट इंजीनियर, नोएडा प्राधिकरण)

11- टीएन पटेल (रिटायर्ड प्लानिंग असिस्टेंट, नोएडा प्राधिकरण)

12- वीए देवपुजारी (रिटायर्ड मुख्य वास्तुविधि नियोजक, नोएडा प्राधिकरण)

13-अनीता (प्लानिंग असिस्टेंट, नोएडा प्राधिकरण)

14-एनके कपूर (रिटायर्ड, एसोसिएट आर्किटेक्ट, नोएडा प्राधिकरण)

15- मुकेश गोयल (नियोजन सहायक, नोएडा प्राधिकरण)

16- प्रवीण श्रीवास्तव (रिटायर्ड सहायक वास्तुविद, नोएडा प्राधिकरण)

17-ज्ञानचंद (रिटायर्ड विधि अधिकारी, नोएडा प्राधिकरण)

18- राजेश कुमार (रिटायर्ड विधि सलाहकार, नोएडा प्राधिकरण)

19- विमला सिंह (संयुक्त नगर नियोजक, नोएडा प्राधिकरण)

20. विपिन गौड़ (रिटायर्ड महाप्रबंधक, नोएडा प्राधिकरण)

21. एमसी त्यागी (रिटायर्ड प्रोजेक्ट इंजीनियर, नोएडा प्राधिकरण)

22. केके पांडेय (चीफ प्रोजेक्ट इंजीनियर, नोएडा प्राधिकरण)

23 . पीएन बाथम (रिटायर्ड अपर सीईओ, नोएडा प्राधिकरण)

24 ए.सी. सिंह (रिटायर्ड वित्त नियंत्रक, नोएडा प्राधिकरण)

आरोपी बिल्डर

25. आरके अरोड़ा (सुपरटेक डायरेक्टर)

26.संगीता अरोड़ा (सुपरटेक डायरेक्टर)

27. अनिल शर्मा (सुपरटेक डायरेक्टर)

28. विकास कंसल (सुपरटेक डायरेक्टर)

29. दीपक महेता (वास्तुविद)

30. नवदीप (वास्तुविद)

इन सभी आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा-166, 120B और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी. यहां IPC की धारा-166 का मतलब वो सरकारी कर्मचारी जो दूसरे नुकसान पहुंचाने के इरादे से कानून का उल्लंघन करता है उसे जेल या जुर्माना या दोनों हो सकताहै. वहीं, IPC की धारा-120B का मतलब साजिश रचने से है. जबकि भ्रष्टाचार को लेकर उसके अधिनियम की धारा भी लगाई गई है.

Twin Towers corruption
Twin Towers corruption

सुप्रीम कोर्ट के साथ जांच समिति ने भी माना, प्राधिकरण अधिकारियों की है मिलीभगत

Twin Towers corruption : 4 अक्टूबर 2021 को लखनऊ विजिलेंस विभाग में दर्ज हुई एफआईआर में इस बात का भी जिक्र है कि नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों और सुपरटेक बिल्डर कंपनी के अधिकारियों की मिलीभगत के संबंध में 31 अगस्त 2021 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश में टिप्पणी की गई है. सभी तथ्यों से ये साफ होता है कि समय-समय पर ना केवल सुपरटेक लिमिटेड द्वारा नियमों की अनदेखी की गई बल्कि नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों द्वारा नियम के विरूद्ध आपराधिक और अन्य कार्यों को जानबूझकर नजरअंदाज करने का प्रयास किया गया और बिल्डर के अवैधानिक निर्माण कार्य को जारी रखने में स्पष्ट रूप से सहयोगात्मक रुख अपनाया गया.

इसके साथ ही ये भी कहा गया था कि मामले में बिल्डर और नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर कर कार्रवाई की जाए. लेकिन असल में हुआ क्या. एफआईआर होने के 10 महीने बाद ट्विन टावर भी ध्वस्त कर दिया गया लेकिन एफआईआर में शामिल कुल 24 नोएडा प्राधिकरण के अफसर और बिल्डर कंपनी के 6 अधिकारियों के खिलाफ रत्ती भर भी कार्रवाई नहीं की गई.

क्या कहा विजिलेंस के डीआईजी ने

इस पूरे मामले पर यूपी विजिलेंस विभाग के डीआईजी से क्राइम तक ने सवाल पूछा कि आखिर एफआईआर होने के बाद भी क्या एक्शन लिया गया. कितने लोगों की गिरफ्तारी हुई है अब तक. इन सवालों पर डीआईजी एल.आर कुमार ने कहा कि मामला बेहद संवेदनशील है. इस पर शासन स्तर से जांच हो रही है. अभी हम कोई कमेंट नहीं कर सकते हैं.

Twin Towers
Twin Towers

बिल्डर डायरेक्टर आरके अरोड़ा को उस रात नींद नहीं आई

28 अगस्त की दोपहर ठीक ढाई बजे जब ट्विन टावर ध्वस्त किए गए तब सुपरटेक बिल्डर डायरेक्टर आरके अरोड़ा के साथ क्या हुआ था. इस सवाल के जवाब में आरके अरोड़ा ने कहा कि जिस दिन ट्विन टावर गिराए जाने थे उस रात नींद नहीं आई थी. पूरी रात मैं सो नहीं सका था. मुझे चिंता इस बात की थी कि टावर गिराए जाने से आसपास की इमारतों को कोई नुकसान नहीं हो.

हालांकि, नोएडा प्राधिकरण अफसरों से मिलीभगत के सवाल पर आरके अरोड़ा ने साफ कहा कि अधिकारियों से हर काम अप्रूवल और एनओसी मिलने के बाद ही किए गए. अब इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिस भ्रष्टाचार को हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और सूबे की 4 सदस्यों की समिति ने भी चरम करप्शन मान लिया उस बारे में बिल्डर ने एक शब्द तक नहीं बोला.

इसी से पता लगाया जा सकता है कि आखिर नोएडा प्राधिकरण के अफसरों और बिल्डर कंपनी में कैसी गठजोड़ रही होगी. लेकिन अफसोस मुर्दा इमारत मिट्टी में मिल गई लेकिन इस इमारत को खड़ी करने के लिए पूरे सिस्टम को ताक पर रखने और करप्शन का नया पैमाना तय करने वाले अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी.

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