क्या होता है पेसमेकर? दिल में कैसे काम करता है? क्या हैं पेसमेकर के फायदे नुकसान, जान लीजिए

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दिल्ली से सुप्रतिम बनर्जी की रिपोर्ट

What is Pacemaker: यूपी के इटावा में मरीज़ों को नकली पेसमेकर लगाने के मामले ने लोगों को दहला दिया है, लेकिन सवाल ये है कि आखिर ये पेसमेकर क्या बला है? ये कैसे काम करता है? किसी को इसकी जरूरत क्यों होती है? असली पेसमेकर के फायदे और नक़ली के नुक़सान क्या हो सकते हैं तो आइए आपको इन सवालों के जवाब बताते हैं।

आखिर ये पेसमेकर क्या बला है? (What is Pacemaker)

इस दुनिया में करीब 30 लाख लोग ऐसे हैं, जो अपने सीने में पेसमेकर लिए घूम रहे हैं। जबकि हर साल औसतन 6 लाख नए लोगों को पेसमेकर लगाए जाते हैं। इसका आविष्कार अमेरिका के जॉन हॉप्स ने किया था। 1958 में आर्ने लार्सन नाम के शख्स को इस दुनिया का पहला पेसमेकर लगाया गया लेकिन तब ये पेसमेकर तीन घंटे में ही फेल हो गया था।

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असली पेसमेकर के फायदे और नक़ली के नुक़सान 

पेसमेकर वो मेडिकल इक्विपमेंट है, जो किसी इंसान के दिल को उसके सामान्य दर और ताल के मुताबिक धड़कने में मदद करता है। पेसमेकर का इस्तेमाल आम तौर पर उन मरीजों के लिए किया जाता है, जिन्हें एरिथमिया यानी अनियमित दिल की धड़कन की शिकायत होती है। मसलन कभी दिल बहुत तेज़ धड़कता है, तो कभी ज़रूरत से ज्यादा धीरे। ऐसे में सीने में लगा पेसमेकर मरीज के दिल को इलेक्ट्रिक पल्स यानी बिजली के स्पंदन भेजता है, जिससे दिल सामान्य गति से काम करता रहता है और दिल के सामान्य तरीके से काम करने का मतलब है शरीर में खून को सामान्य ढंग से पंप करना। जो कि किसी भी इंसान के लिए बेहद जरूरी है। इसे ऑपरेशन के बाद सीने में कॉलर बोन के नीचे त्वचा के अंदर लगा दिया जाता है। 

मोटे तौर पर पेसमेकर चार तरह के होते हैं:

 

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सीसा रहित पेसमेकर
सिंगल चेंबर पेसमेकर
डुअल चेंबर पेसमेकर और
बाइवेंट्रिकुलर पेसमेकर

डॉक्टर मरीज की हालत को समझ कर उसके मुताबिक उसे अलग-अलग किस्म के पेसमेकर लगाने की सलाह देते हैं। कुछ मामलों में मरीजों को आईसीडी यानी इंप्लांटेबल कार्डियो-वर्टर डिफाइब्रिलेटर लगाने का सुझाव भी दिया जाता है। हालांकि ये पेसमेकर तो नहीं है, लेकिन ये उपकरण भी दिल को नियमित रूप से धड़कने में मदद करता है।

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अब आइए समझते हैं कि आख़िर पेसमेकर के फायदे और नुकसान क्या हैं?

फायदे की बात करें तो पेसमेकर मरीज के सीने में दर्द, भ्रम, घबराहट, मतली समेत जरूरत से ज्यादा रफ्तार से दिल धड़कने की परेशानी को ठीक करता है। इसी के साथ एरिथमिया के मरीज़ों को बेहोशी के खतरे से भी बचाता है और सबसे अहम ये दिल को धड़कने से रुकने नहीं देता, जिससे मरीज की जिंदगी बच जाती है। नुकसान की बात करें, तो पेसमेकर से वैसे तो कोई नुक़सान नहीं होता, लेकिन कई बार इससे कॉम्प्लीकेशन यानी जटिलताएं पैदा हो जाती हैं, जो नुकसानदायक होती है। मसलन पेसमेकर में लगी चीज़ों या फिर पेसमेकर लगाने के दौरान दी गई दवाओं से मरीज को एलर्जी हो सकती है। कई बार खून के थक्के जमने की शिकायतें भी आती हैं, जिसके लिए ब्लडर थिनर का इस्तेमाल करना होता है। कुछ मामलों में सीने में लगा पेसमेकर या इसकी लीड खराब हो जाती है। इसलिए डॉक्टर पेसमेकर लगने के बाद शारीरिक गतिविधियों को नियंत्रित करने का सुझाव देते हैं। 

नकली पेसमेकर लगाने के मामले ने लोगों को दहलाया

कई मशीन मसलन मेटल डिटेक्टर वगैरह शरीर में लगे पेसमेकर की गति पर असर डालते हैं, इसलिए अक्सर पेसमेकर वाले मरीजों को ऐसे किसी मशीन के इस्तेमाल से या इनसे दूर रहने की सलाह दी जाती है। आम तौर पर प्राइवेट अस्पताल में पेसमेकर लगाने की कीमत 3 से पांच लाख रुपये तक आती है। मार्केट में अलग-अलग क्वालिटी के पेसमेकर मौजूद हैं। सबसे बढ़िया और छोटा पेसमेकर माइक्रा ट्रांसकैथेटर पेसिंग सिस्टम को माना गया है, जो आम पेसमेकर के मुकाबले दस गुना छोटा होता है और इसका आकार 50 पैसे के सिक्के के बराबर होता है। जिसकी कीमत चार लाख के आस-पास होती है। भारत में सबसे सस्ता पेसमेकर 40 हजार रुपये का आता है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि ये पेसमेकर खराब है, हां, लेकिन अगर पेसमेकर नकली हो, तो वो जानलेवा हो सकता है। 

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