दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में खौफ का दूसरा नाम रहे जितेंद्र उर्फ गोगी और उसके नेटवर्क की यह कहानी जुर्म और गैंगवार के खूनी पन्नों को उजागर करती है। दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से शुरू हुई गोगी और टिल्लू ताजपुरिया की दुश्मनी ने आगे चलकर कई निर्दोषों और मशहूर हस्तियों की बलि ली। साल 2020 में जब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गुरुग्राम में गोगी और उसके साथियों को घेरा, तो एनकाउंटर के डर से जितेंद्र गोगी ने बिना कोई गोली चलाए आत्मसमर्पण कर दिया था और सोशल मीडिया पर सरेंडर का वीडियो तक जारी किया था। हालांकि, जेल जाने के बाद भी गोगी गैंग का खौफ कम नहीं हुआ। 2021 में रोहिणी कोर्ट के अंदर वकीलों की पोशाक में आए टिल्लू गैंग के शूटरों ने गोगी की गोली मारकर हत्या कर दी। गोगी की मौत के बाद भी उसका गैंग लॉरेंस बिश्नोई और कला जठेड़ी जैसे बड़े गिरोहों से हाथ मिलाकर वारदातों को अंजाम देता रहा। इसी खूनी नेटवर्क ने हाल ही में हरियाणवी गायक अंकित बालियान की हत्या का षड्यंत्र रचा। यह स्टोरी बताती है कि कैसे एनकाउंटर के खौफ से रोने वाले गैंगस्टर का नेटवर्क आज भी गायकों और कलाकारों की जान का दुश्मन बना हुआ है।