अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि मामले में उठाए गए कानूनी प्रश्नों की विस्तृत जांच आवश्यक है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि संबंधित कार्रवाई कानून के प्रावधानों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थी, जबकि प्रतिवादी पक्ष ने अपने निर्णय को कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया गया बताया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई तय की और कहा कि अंतिम निर्णय से पहले संबंधित दस्तावेजों और तथ्यों का गहन परीक्षण किया जाएगा।