हालांकि इस हमले की एक और बड़ी वजह है जिसका जिक्र IS ने अपने बयान में नहीं किया । वो वजह है काबुल में कब्जे के बाद की गई IS खोरासान के सबसे बड़े लीडर अबू ओमर खोरसानी का कत्ल। 15 अगस्त को जब तालिबान के आतंकी काबुल के बाहर पहुंचे तो उन्होंने काबुल जेल से कई तालिबान के आतंकियों को रिहा कराया था।
इस आतंकी की मौत का बदला लेने के लिए किया गया था काबुल एयरपोर्ट पर हमला!
Kabul एयरपोर्ट पर हमले के पीछे ISIS-K के Ex-chief Abu Umar Khurasani की मौत का बदला, तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान पर कब्ज़े के वक़्त मार डाला था, Read more latest updates on crime news in Hindi on CrimeTak
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27 Aug 2021 (अपडेटेड: Mar 6 2023 4:04 PM)
इसी जेल में बंद था IS खोरसान अफगानिस्तान का पूर्व चीफ अबू ओमर खोरसानी, तालिबान ने अबू ओमर खोरसानी के साथ ही IS के करीब 8 से 10 आतंकियों को भी मौत के घाट उतार दिया था। इस कत्ल के बाद से ही IS तालिबान और अमेरिका से बदला लेने के लिए मौका ढूंढ रहा था।
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वैसे भी IS खोरसान और तालिबान के बीच पुरानी अदावत चली आ रही है। IS खोरसान पूरे अफगानिस्तान में इस्लामिक राज्य चाहता है जबकि तालिबान शरिया कानून का समर्थन तो करता है लेकिन वो अब कट्टर इस्लाम से खुद को दूर कर के चल रहा है।
खुरसानी को अमेरिकी और अफगानी फौजों ने मई 2020 में एक ऑपरेशन के बाद गिरफ्तार किया था। उस वक्त खोरसानी को IS खोरसान के चीफ की गद्दी से हटाकर मौलवी असलम फारुकी को IS खोरसान का चीफ बना दिया गया था। हालांकि अबू ओमर खोरसानी का IS में दबदबा कम नहीं हुआ था और अफगानिस्तान में सक्रीय IS आतंकी उसे अब तक अपने ग्रुप का लीडर मानते थे।
साल 2015 में अफगानिस्तान में IS खोरसान की कमान संभालने के बाद अबू ओमर ने अफगानिस्तान में उसका काफी प्रचार प्रसार किया। उस वक्त तालिबान अमेरीकी सेना के साथ वार्ता और जंग में उलझा हुआ था।
यही वजह थी कि अबू ओमर ने कई कट्टर तालिबान आतंकियों को अपने साथ मिला लिया और अफगान के दो राज्यों पर कब्जा कर लिया था। जिसमें अफगानिस्तान का नंगरहार और जवज्जान राज्य शामिल थे । खुद अबू ओमर खोरसानी नंगरहार राज्य का गवर्नर बन गया था।
गवर्नर बनने के बाद खोरसानी इराक और सीरिया के ISIS की तरह लोगों को सजाएं देना शुरु किया। हालांकि तालिबान नहीं चाहता था कि IS अफगानिस्तान में अपने पैर पसारे। इस लड़ाई में अमेरिका ने भी तालिबान का साथ दिया और साल 2017 में mother of all bomb के नाम से नंगरहार की गुफाओं को इस बम का निशाना बनाया जिसमें 90 IS आतंकियों के मारे जाने का दावा किया गया था।
अफगानिस्तान में इस्लाम का झंडा उठाने की होड़ में तालिबान और IS एक दूसरे के कट्टर दुश्मन बन गए। अब अमेरिकी फौज के अफगानिस्तान से जाने के बाद तालिबान अफगानिस्तान में हुकूमत बनाने और अफगानिस्तान को चलाने में व्यस्त हो जाएगा तब एक बार फिर IS को अफगानिस्तान में अपने पांव पसारने के लिए जगह मिलेगी।
काबुल एयरपोर्ट पर धमाका कर IS ने ये संदेश तो दे दिया है कि अमेरिका और तालिबान मिलकर उसके सफाए की लाख कोशिशें कर लें लेकिन अफगानिस्तान में वो अपने पैर जमा चुका है और उसे वहां से उखाड़ फेंकना आसान बात नहीं है।
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